Wednesday, 17 July 2019

भारत में झूटी और फरेबी खुशी.


बालाकोट की तरह ही आतंकी जादव की आई.सी.जे. के फैसले के बाद भारत की भगवा हुकूमत, भगवा तंज़ीमे, भगवा आतंकी और भगवा मीडिया के लंगूर और लँगूरनियाँ झूटी और फरेबी खुशी में तल्लीन हैं.  जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल तलाक़ के आदेश के बाद संबित पात्रा अपनी फरेबी हसी देखता है लेकिन उसके चेहरे पे मायूसी साफ़ झलक रही थी.  उसके बाद बालाकोट का झूठा हमला ३०० मार डाले ४०० मार डाले तबाह कर दिया, घर में घूस के मारा.  लेकिन हार के सारे चिन्ह चहरे पे साफ़ नुमाया थे.  उसी हिसाब से आतंकी जादव के फैसले को मोदी हुकूमत अपनी जीत बता रही है.  है है है.  पाक को फटकार लगाईं, भारत की वह वही हुई.  ऐसी बाते कर के मोदी, लंगूर, अनपढ़ गवार भारत की जनता अपनी खुद की रूसवाई कर रही है.  उनको लगता है जजमेंट की कॉपी सिर्फ उनके ही पास है. 

है है है क्या बकवास है लंगूरों थोड़ा कम फेको समूचा निर्णय आ चूका है इस पत्रकार के पास. झटके भारत को लगे हैं. भारत की समूची प्ली तो नकार दी गई है. ना ही आतंकी कुलभूषण को भारत आने को कहा, ना ही उसको उधोगपति तस्लीम किया और ना ही उसकी फ़ासी पे रोक लगी है. मक़सद क्या हासिल हुआ इतना उठक पटक करने से. फ़ासी पे पाक सरकार से पुनर्विचार करने की निवेदन किया गया है ना की आर्डर दिया है. अब पाक चाहे तो निवेदन माने या ना माने. है है है. अजब जलवा है हुज़ूर आपका हार पे भी खुशियां मना रहे हो.

श्री लंका ईस्टर ब्लास्ट पे भी ऐसे ही उछल कूद कर रहे थे लंगूर और भगवा मोदी प्रशासन और समूची ज़िम्मेदारी इस्लामिक संघटन पे लाद रहे थे. इस पत्रकार ने समूची जानकारी निकाल के अपने लेखों में पब्लिश की थी. अब श्री लंका के राष्ट्रपति श्री सिरिसेना ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है ईस्टर हमला इस्लामिक संघटन का किया हुआ नहीं था. उसमे बाहरी मुल्क के ड्रग माफिया का हाथ था. अभी ड्रग माफिया बोला जा रहा है जल्द भारत का हाथ है बोला जाएगा. जैसा की ये पत्रकार शुरू से कहता आ रहा है.

मोदी इतना उछल कूद कर रहा था पिछले महीने श्री लंका दौरे पे गया और हुकूमत को प्रभावित करना चाहा, फिर लंगूरों ने झूटी सच्ची खबरे चलाई बोध साधुओं ने मस्जिदों पे हमला कर दिया डॉक्टर ने ४०००० बोध महिलाओं की नसबंदी कर डाली वगेरा वगेरा. है है है क्या हुआ. इस सबसे तुम इस्लाम को बदनाम करना चाहते थे सो वो तो हुआ नहीं अब तुम बदनाम होंगे और अंतराष्ट्रीय दबाव तुम्हारे ऊपर पड़ेगा आतंकवाद को बढ़ावा देने में.
इस मुद्दे पे सहाफी जुबेर की मज़ीद नुक़्ताये नज़र

अमूमन पाकिस्तान, इस्लाम और मुसलमानों का नाम आते ही ज़ाफ़रानी ज़हर काफिरों के दिलों दिमाग पे जुम्बिश करने लगता है. और वो पाकिस्तान, इस्लाम,  मुसलमानो और इस्लामिक मुमालिकों को कोसने लगतें हैं.  करतारपुर कॉरिडोर मुजाकेरात से क़ब्ल लँगूरनियाँ ज़हर अंगेशी कर रही थी और काफिर भगवा डिफेन्स एक्सप्रर्ट पाकिस्तान के खिलाफ ज़हरीली भाषा का उपयोग कर रहा था.   और पाकिस्तान से किसी भी किस्म की मुजाकेरात को तर्क करने की पुर ज़ोर वकालत कर रहा था. 

भारतीयों की तो आदत ही बन गई है सभी से अबोला बांधने की और मुजाकेरत तर्क करने की.  कश्मीर पे बात चीत नहीं होगी क्योंकि पाकिस्तान हुर्रियत को साथ ले कर चल रहा है, करतारपुर पे बात चीत नहीं होगी क्योंकि पाकिस्तान खलिस्तान समर्थकों को साथ ले कर चल रहा है. भारत के मुस्लिम नुमाइंदों से बात नहीं होंगी क्योंकि वो टुकड़ा टुकड़ा गैंग के शाना बा शाना खड़े हैं. अमेरिका के ट्रम्प से बात चीत नहीं करेंगे क्योंकि वो हमारे हिंतों की खिलाफ वर्ज़ी करतें हैं. और दहशतगर्दों के खिलाफ अमल दर होने की बात करते हैं, और हमारे हित हैं हिन्दू आतंकवाद को फरोग देना, अलामी बरादरी में हिन्दू आतंकवाद को जाइज़ करार देना.  अब तुम ही अकेले सही हो बाक़ी तमाम आलमी बरादरी गलत.  जो मुमालिक जमुहरियत पे यकीन रखते हैं, सभी को साथ ले कर खड़े हैं और सभी को साथ ले कर चलते हैं, बस तुम बातें ही बड़ी बड़ी करते हो सबका साथ सबका ...... लेकिन अकेले ही चले हो.  दूसरी बात कश्मीर हो पंजाब हो या मुस्लिम अवाम हो इनके साथ ज़बरदस्त दहशतगर्द वारदात हो रही हैं तभी तो वो बटवारे की जानिब गामज़न हैं और उन दहशतगर्द वारदातों में तुम शामिल हो.  तुम्हारी गलत नीतिओं की वजह से आज भारत आतंकिस्तान, रेपिस्तान, लचिस्तान और कुफ्रिस्तान बन गया है.  दुनिया के १० देश जिसमे पाकिस्तान भी शामिल है दहशतगर्द, तशद्दुत, फ़िरक़ापरस्ती पे तुम्हारे ऊपर लानत कर रहे हैं. बस तुम एक अकेले सभी को लानत कर रहे हो अब बताओ दुनियां के १० देश सही है या एक अकेले तुम.

भारती के ज़ाफ़रानी मीडिया के लंगूर लँगूरनियों ज़ाफ़रानी ज़हरीली  दिफ़ाई महरीनों के ज़हर अंगेशी के बावजूद ये तो पाकिस्तान की दरयादिली है जो दहशतगर्दों से भी बात चीत को राज़ी हो गया ताके इलाक़े में अमन और सुकून बना रहे. दूसरी तरफ हस्बे आदत आतंकवादी हर बार पे अड़ंगा फ़साने से बाज़ नहीं आ रहे थे. जिसकी दो वजह हैं एक करतारपुर कॉरिडोर का तमाम क्रेडिट सिद्धू जी के ऊपर चला गया और ज़ाफ़रानी इन्तेज़ामियाँ के हाथ लगा बाबा जी का टिल्लू दूसरा अमन और पीस के मामले में मोदी इमरान के सामने बोना नज़र आया. ये पांचवां मौक़ा है जब मोदी को बोना बना दिया इमरान ने. १. अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका की क़यादत में पाक को पीस प्रोसेस आगे बढ़ाने का ऑफर. हालांकि मोदी के संघी आतंकी तालिबान से ग़ैर हूकूमति बात चीत पे लंगूर बोहोत उछल कूद कर रहे थे लेकिन हूकूमत की जानिब से क़यादत करने का शर्फ़ पाकिस्तान को मिला. २. कश्मीर मसले पे ओ.आई.सी. का क़रारदार जो भारत के खिलाफ गया. हालांकि सुषमा को मेहमान खुसूसी बनाने पे लंगूर और हुकूमत बोहोत उछल कूद कर रहे थे. ३. यूनिटेड नेशन में पुलवामा के बाद पाक के ऊपर तमाम ज़िम्मेदारी लादने के भारत के करार को तगड़ा झटका लगा. ४. हिन्दू दहशतगर्द और हुकूमते हिन्द की जानिब से इमदादी दहशतगर्दी पे भी पाक की जीत हुई.  ५ दहशतगर्द जादव पे जीत.

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Rejoice on the Weeds.

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