Tuesday, 31 July 2018

एक बागी से नफरत दुसरे से मोहब्बत

इस पत्रकार को उसके सटीक और कटाक्ष लेखन की वजह से सदा ही आतंकवादिओं के ट्रोलर्स के झुण्ड का सामना करना पड़ता है, जिस तरह से अनपढ़, गरीब, असहाय, निर्बल मुसलमान को भारत में आदमखोर हिन्दू लेनचर्स के झुंड का सामना करना पड़ता है. सभी ट्रोलर्स गन्दी, ओछी गालियाँ और लेखक को पाकिस्तानी बुला के भारत विरोधी कहते है.  यहां पे लेखक ये बात अपने वाचको को बताना चाहता है के ये ट्रोलर्स पाखंडी और एक ही समय में दो नावों पे पैर रख कर सवार होने वाले वो लोग है जो एक बागी को सराहते है और दुसरे को ट्रोल करते है.  सबसे बड़ी बात लेखक भारत विरोधी नहीं है, और ना ही वो किसी भी प्रकार से भारत के खिलाफ आतंकवाद या जंग का एक हिस्सा है.  अगर होता तो लेखक २०१५ में भारत के टॉप लेवल की सिक्योरिटी टीम और जांच एजेंसिओं से क्लीन चिट ले कर महज़ एक दिन में ही बाइज़्ज़त बहार गया था. मतलब भारत की सुरक्षा एजेंसियों के पास लेखक के खिलाफ इतने भी प्रयाप्त सबूत नहीं थे के उसको न्यायलय तक ले जाया जा सके. लेखक सदा ही कानून का मुहाफ़िज़ रहा है और जब कभी भी न्याय की हत्या होती है या सविधान के हिसाब से काम नहीं होता लेखक की सोच विचिलित हो जाती है जो के एक स्वाभाविक मानसिक परिस्तिथि होती है. 
 
सिक्के का एक रूख लेखक को ट्रोलर्स भारत विरोधी कहते है सिर्फ उसके लेखन की वजह से अब सिक्के का दूसरा रूख देख लीजिये ये ट्रोलर्स कैसे एक बागी सोच को सराह रहे है. अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश की एक महिला के खिलाफ बरेलवी मौलाना ने फ़तवा दे दिया के उक्त मुस्लिम महिला किसी भी तरह के मुस्लिम समाजिक और मज़हबी जलसो की हकदार नहीं है.  यहाँ तक आगे कहा गया था के उसको कब्रस्थान में भी जगह नहीं दी जाए.  उक्त फतवे पे भक्त, अंध भक्त, तमाम संघी आतंकवादी और बीजीपी के कारकून, मुहाफ़िज़ और लंगूर पत्रकार गुस्से से लाल पीले हो गए.  इतना ही नहीं जुलाई २०१८ महीने में मोदी के उत्तर प्रदेश दौरे पे उक्त मुस्लिम महिला से मिलने का कार्यक्रम था. अब दो बातें यहाँ पे ये पत्रकार समझने से क़ासिर है जब ये पत्रकार भारत में होने वाली न्याय की हत्या सरकार दूआरा भेदभाव वाली राजनीति मुस्लिम समाज के लोगो का क़त्ले आम, मुस्लिम समाज का लीचिंग उसपे सरकार की ख़ामोशी फिर अगर इस पत्रकार का लेखन भावुक हो कर क्रोधित हो जाता है तो उसको भारत विरोधी कहा जाता है; जबकि वो महिला जो के इस्लाम के कानूनों को ही नहीं मानती और कहती है के भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और उसमे किसी एक मज़हब का कानून नहीं चलेगा में शरीयत के कानूनों को नहीं मानती बल्कि भारत में यकसां कानून की हिमायत करती हूँ उससे मोदी जी मिलते है.

जो इंसान इस्लाम के कानूनों के खिलाफ बगावत करे उससे मोदी जी मिलते है और भक्त, अंध भक्त, संघी आतंकिओं का तमाम अमला, लंगूर पत्रकार सहानुभूति रखते है और जो पत्रकार मण्डली या खुली सोच रखने वाले दानिशमंद अगर सरकार के काम काज पे कटाक्ष करते है, सरकार को उसकी नाकामी गिनाते है सरकार को उसके गलत नीतिओं पर हाशिये पे लेते है वो सब भारत विरोधी हो जाते है.

यहाँ ये पत्रकार इस बात को हर हाल में कहेगा के अपने हक़ के लिए लड़ना अपने हक़ के लिए जद्दो जहद करना बोहोत अच्छी बात है लेकिन अगर उस कानून को ही नहीं माना जाए जिसमे रह कर तुम अपना हक़ मांगते हो तो क्या तुम गद्दार नहीं हो. उत्तर प्रदेश की उक्त महिला ने तो इस्लाम के कानूनों को मानने से ही इंकार कर दिया और कह दिया के वो शरीयत के कानून को नहीं मानती बल्कि कॉमन सिविल कोड की हिमायत करती है. उस हिसाब से उसको इस्लाम से ख़ारिज करने का फतवा बिल्कुल दुरूस्त था अब वो मुसलमान नहीं है तो उसके साथ सामजिक और मुस्लिम धार्मिक रीत रिवाज नहीं पाले जा सकते.  तो जो लोग इस पत्रकार को भारत विरोधी कह रहे है ये पत्रकार तो न्याय की पैरवी करता है और उसका मानना है अन्याय या इनजस्टिस हज़ार तरह के गुनाहों और जुर्म को जन्म देती है.  ये पत्रकार न्याय की पैरवी कर रहा है सविधान की बात कर रहा है मतलब भारत की न्याय विवस्था पे भारत के सविधान पे यकीन है अब इस पत्रकार की लड़ाई उन लोगो से है जो न्याय की हत्या करते है जो सांविधानिक पदों पे तो बैठे है लेकिन आतंकिओं का सत्कार करते है, उनकी गुलपोशी करते है बलत्कारिओं के समर्थन में जुलूस निकालते है ताके न्यायपालिका को प्रभावित किया जा सके.

बरेली शरीफ से उक्त मुस्लिम महिला के खिलाफ जो फ़तवा आया वो बिलकुल दुरुस्त था जिसपे के भक्त और बीजेपी और लंगूर पत्रकार आग बबूला हो गए थे. अब जो इंसान शरीयत को ही नहीं मानता बल्कि हिन्दू कानून की पैरवी करता है उसका मुस्लिम तसव्वुर करना ही बेकार है फिर जो मुस्लिम ही नहीं उसके साथ किसी भी दुसरे मुसलमान का सामाजिक और मज़हबी रिश्ता रखना ही अपने मज़हब को ख़राब करना है.

चलो ठीक है मान लेते है मोदी जी को महिलाओं की बड़ी चिंता है लेकिन ये क्या ऐसी तमाम मुस्लिम महिलाओं के साथ मोदी जी रिश्ता कायम कर लेते है जिनकी सोच इस्लाम के खिलाफ बागी होती है. फिर अगर महिलाओं के साथ साहानुभूति की बात है तो क्या मोदी जी राजिस्थान की उस बेटीयों से मिलेंगे जिन्होंने अपने पिता की अर्थी को कन्धा दिया और समाज और धर्म की परवाह किये बगैर मुख अग्नि दी. फिर ऐसा ही भगवा आदेश राजिस्थान की पंचायत से भी आया उनको धर्म निकाला कर दिया गया तो क्या मोदी जी चुनाव घोषित प्रदेश राजिस्थान में उन चार हिन्दू बहनो से भी मिलेंगे.

मोदी, बीजेपी, भक्त, लंगूरों की हरकतों से साफ़ ज़ाहिर होता है के ये सभी पाखंडी है जब अपने मज़हबी एतेक़ाद पे चोट लगे तो खामोश हो जाते है फिर दूसरों के मज़हबी मामलो में बढ़ चढ़ के बायान बाज़ी करते है इतना ही नहीं सहानूभूति का भी इन पाखंडिओं ने पैमाना तै कर रखा है मुस्लिम मर्द या औरत इस्लाम, मुसलमानो या मदरसों के खिलाफ बोलेगा तो वो इनका चहेता बन जाएगा और अगर किसी हिन्दू ने सच्ची बात भी बोल दी देश के बढ़ते हुए साम्प्रदाइक, आतंकवादी, जुर्म के खिलफ या हिन्दू कुरीतिओं के खिलफ तो वो भारत विरोधी हो जाता है और उसके खिलाफ ट्रोलर्स का झुंड इंटरनेट लीचिंग करना शुरू कर देता है.

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