इस्लाम का फलसफा और क़ुरआन का कहना है की अल्लाह जिसे चाहे इज़्ज़त दे और जिसे चाहे ज़िल्लत दे ये उसके बस की बात है. वैसे तो ये बात कई मौकों पे सही और दुरुस्त साबित हो चुकी है परन्तु भक्तो, अंध भक्तो और लंगूरों की जानकारी के लिए २१ वि सदी में फिर से एक बार ये बात उनके ध्यान में लाना चाहता हूँ जो मोदी और ज़ाकिर नाइक के केस में फिर से साबित हो गई. मोदी रुपी हव्वे का खौफ लंगूरों ने २०१२ के अंत से दिखाना शुरू किया था. उनको ऐसा करने के लिए भी संघ और बीजेपी ने खरीद लिया था जब से मोदी का नाम प्रधान मंत्री पद के दावेदार के लिए सुर्खियों में आया था. फिर क्या था लंगूरों ने शुरू कर दी मोदी रुपी राक्षस की टी.आर.पी. बढ़ाना. उसकी शान में कसीदे लिखे जाने लगे
"बोहोत कड़क प्रधान मंत्री है"
"देश को ऐसा प्रदान मंत्री आज तक नहीं मिला"
"अब कश्मीर मसला हल होगा"
"जिहादी घबरा रहे है"
"जो कहते है वो करते है"
"तुरत निर्णय लेते है"
"टाइम्स मैगज़ीन में मोदी पहला नंबर"
"मोदी की लोकप्रियता ने ओबामा को पीछे छोड़ा"
"मोदी के फोल्लोवेर्स ओबामा से ज़्यादा हो गए" और अगर कोई कसीदा उस राक्षस के लिए जो लंगूरों ने कहा या लिखा था बचा होगा तो भक्तों याद दिला दो.
ये पत्रकार पूरी तरह आश्वस्त था के एक दिन इस का हशर किसी भिकारी से कम नहीं होगा. और आज क्या हालत है जैसे की फूले हुए गुब्बारे से हवा निकल जाती है वैसी हालत हो गई है मोदी रुपी गुब्बारे की. अब लेख का दूसरा रूख देखते है जो क़ुरआन की सत्यता को प्रमाणित करता है. इज़्ज़त और ज़िल्लत का देने वाला सिर्फ और सिर्फ ऊपर वाला है. ज़ाकिर नाइक जिनके पीछे मोदी, भक्त, अंध भक्त, संघ, आतंकवादी,
भारतीय प्रशासन सभी पड़े हुए थे लेकिन उनकी इज़्ज़त में ज़र्रा बराबर कमी नहीं आई. यहाँ तक के इंटरपोल ने भारत के रेड क्रॉस नोटिस की धज्जिया उड़ा दी और उनको क्लीन चिट दे दी. अब भारत जैसे शक्ति शाली देश, मोदी जैसे सशक्त और कद्दावर प्रधान मंत्री, विशाल सेना के होते हुए भी एक मुस्लिम धर्म गुरू को इंटरपोल क्लीन चिट दे रहा है क्या ये मोदी के लिए किसी ज़िल्लत और ज़ाकिर भाई की इज़्ज़त में इज़ाफ़े का सबूत नहीं है.
लंगूरों ने शुरू की थी मोहीम "मोदी, मोदी, मोदी" जहाँ देखो भक्त गण शांत मुद्रा में खड़े रहते थे और जैसे ही इशारा हुआ शुरू हो जाते थे मोदी मोदी मोदी. और आज क्या हालात है सभाओं से आम जनता तो छोड़ो खुद भक्त गायब है.
जब मोदी पहली बार यूनाइटेड अरब अमीरात के दौरे पे था तो वो अबू धाबी में किंग अल ज़ायद मस्जिद में गया, अब अज़ान के समय किसी भी काम को करना (दुनयावी या दीनी) वर्जित है फिर अज़ान होते ही दूबाई के किंग का सुरक्षा अमला, पत्रकारों की फौज और खुद किंग बहार की तरफ भागे उनके पीछे पीछे मोदी भी भागा मुस्लिम किंग और सरकारी अमला अल्लाह के खौफ से भागे लेकिन मोदी अपनी जान बचाने के लिए भागा क्योके अगर सुरक्षा विभाग ही नहीं होगा तो वो एक सधारण व्यक्ति है और कोई भी उसको टपका सकता है. हद तो तब हो गई जब 'आज तक' की लँगूरनी श्वेता सींग टी.वी. क्लिपिंग को झुट्लाते हुए जिसमे साफ़ दिख रहा रहा के खुद मोदी मस्जिद में मौजूद है कहती है देखिए मोदी की लोकप्रियता के मस्जिद में अज़ान की परवाह किये बगैर लोग मोदी को देखने दौड़े.
ऐसे झूट और फरेबी खबरों से अभी तक पर्दा उठता जा रहा है और आगे भी उठता रहेगा. अगर मोदी की लोकप्रियता होती तो वो खुद भारत में नहीं दिख रही है. अब तो भक्तो का संख्या बल भी कम होता जा रहा
है. पिछले हफ्ते ही की खबर है ट्वीटर पे कुछ ७ लाख से ज़्यादा मोदी फ़ॉलोअर्स कम हो गए.
दूसरी बात अगर मोदी को किसी भी देश में सम्मान मिल रहा है तो वो उस इंसान मोदी को नहीं बल्कि भारत के प्रधान मंत्री को मिल रहा है. क्योके ये एक अंतराष्ट्रीय प्रोटोकॉल है और विश्व के तमाम देश जिसके लिए बाध्य हैं. अगर कल हाफिज सईद साहब पाक के प्रधान मंत्री बन जाते है और उनको प्रोटोकॉल के हिसाब से इज़्ज़त दी जाती है तो वो उनकी नहीं बल्कि एक प्रभुत्व-सम्पन्न देश के प्रधान को इज़्ज़त दी जा रही है.
लेकिन ये आश्चर्य की बात होगी जब मोदी से ज़्यादा इज़्ज़त एक धर्म गुरू ज़ाकिर भाई को दी जाए वो भी जिनके पीछे समूचा सशक्त समझे जाने वाला मोदी प्रशासन, आतंकवादी, संघी ज़ेहनियत, हिन्दू समाज पड़ा हो. और जिनको बदनाम किया गया हो के वो जिहादी गतिविधिओं में लिप्त है जिससे अंतराष्ट्रीय सहानुभूति ली जा सके. परन्तु क्या बात है के उनकी लोकप्रियता में कुछ कमी नहीं आई.
फिर अगर मोदी इतना ही लोकप्रिय है तो उसको एक चूनौती ये पत्रकार फिर से देता है अगर उसमे मर्दानगी है और वो अपने माता पीता का वंशज है तो छोड़ दे भारत के प्रधान मंत्री पद का भार और बाहर आ जाए अपने सुरक्षा बिल से फिर एक साधारण जन मानस के जैसे किसी भी देश की यात्रा करे फिर देखे की कितनी पब्लिक उसके पीछे है और कितने देश के प्रधान मंत्री, किंग, राष्ट्रपति उसको अपने महलों में ले के जाते है और इज़्ज़त से नवाज़ते है और उसको तमगा दिया जाता है. दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा
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“What
is the reason, my celebrity cannot erase”
Honour more than Hitler and terrorists https://autonomousjournalist.wordpress.com/2018/07/22/honour-more-than-hitler-and-terrorists/ …
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