Thursday, 26 July 2018

कामयाब हुई हाफिज के साथ की गई राजनैतिक गठजोड़


लेखक, पत्रकारों, दानिशमंदो का काम होता है के देश की राजनीति को सही दिशा सही आयाम दें. लचिस्तान और पाकिस्तान दो देशो के नाम है. पाक नाम को लंगूरों ने आतंक का नाम दे कर बोहोत बदनाम किया था.  लेकिन आतंक की फैक्ट्रिया तो भारत में २०१४ के बाद कायम हो रही है और खूब पनप रही है.  हाफिज साहब का राजनीति में आना भी सच्चाई को सामने लाने की एक रणनीति थी. जिस पाक जनता को लंगूर और भारत का प्रशासन पानी पी पी के कोसता था के पाक में आतंक पनप रहा है. पाक में आतंक की नई फैक्ट्रिया खुल रही है पाक आतंक का पनाह गाह बन गया है, इस चुनाव के बाद अब लंगूरों के और आतंकिस्तान के प्रशासन के मू पे ताला लग जाएगा.

इस पत्रकार की रणनीति कामयाब हुई. समूचा चुनाव रणनीति के मुताबिक हुआ और पाक जनता ने हाफिज को नाकर दिया. अब अंतराष्ट्रीय मंच पे लचिस्तान के मू पर कलोस पूतेगा. भारत को लचिस्तान, आतंकिस्तान बनाने वाले कौन है भारत की जनता. क्या उनको मोदी, बीजपी, योगी का ट्रैक रिकॉर्ड मालूम नहीं था फिर भी भारत की जनता ने अपने ही देश को बनने दिया लचिस्तान, आतंकिस्तान अब ये अंतराष्ट्रीय मंच और समुदाय को तै करना है कौन से देश में आतंक की फैक्ट्रिया फल फूल रही है और कोनसे देश ने आतंक कहे जाने वाले शख्स को नकार दिया.  

पाक के चुनावी नतीजों से ये भी साबित हो गया के पाक जनता आतंक के साथ नहीं है और ना ही इस्लाम, क़ुरान, मदरसे आतंक की शिक्षा देते है और ना ही मदरसों में कट्टरवाद सिखाया जाता है.  वही दूसरी तरफ भारत जो कभी एक धर्म निरपेक्ष देश हुआ करता था वहां की जनता के मन में मुस्लिम, क्रिस्टी समाज के लिए इतना ज़हर भरा है के पत्रकार, (लंगूर) दानिशमंद, वकील, पुलिस, सेना सभी आतंकवादी की हामी है. अब जो आतंकवाद और मोदी रुपी हिटलर मानसिकता का विरोध करते है उनका हाल गौरी लंकेश या शुजात बुखारी जैसा होता है और न्यायपालिका में जस्टिस लोया जैसा होता है. 

ये पत्रकार फिर भी दो बाते समझने से क़ासिर है के पाक जनता हाफिज को नकार देती है.  लंगूर मीडिया लचिस्तान प्रशासन पडोसी देश की बात करते हैं के वो आतंक के साय में है फिर भी वहां हिन्दू काफी सुरक्षित हैं.  तभी तो वहां के सविधान के हिसाब से १० नेशनल असेंबली की सीट्स हिन्दू नुमाइंदो के लिए सुरक्षित है और ६० सीट्स महिलाओं के लिए. पडोसी देश तो धार्मिक कानून को मानता है फिर भी वहां अल्पसख्यकों के लिए जगह है जबकि भारत तो एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र होते हुए भी वहां किसी भी मुस्लिम नुमाइंदे के लिए सीट्स संसद में सुरक्षित नहीं है. 

दूसरी बात अगर पाक जनता आतंकवाद की हामी होती या आतंकवाद को समर्थन देने वाली होती और भारत की शांति प्रिय होती तो भारत पीछे की तरफ जा के लचिस्तान नहीं बनता बल्कि और आगे की जानिब जाता. तो फर्क पाकिस्तान और भारत के चुनावी नतीजो में साफ़ देखने को मिल रहा है.  आतंकिस्तान की जनता ने एक आतंकी, क़ातिल, खुनी, रेपिस्ट को चूना और पाक की जनता ने दी सो कॉल्ड आतंकी हाफिज को नकारा. अब तै करे विश्व कौन सबसे बड़ा आतंकी देश है और किस देश की जनता में आतंक, और ज़हर भरा हुआ है. फिर लंगूर पाक को बदनाम करते है के वहां आतंक की फैक्ट्रियां खुल रही है. लेकिन लीचिंग तो हिन्दू आतंकी कर रहे है. तो बात साफ़ यही आतंक की फैक्ट्रिया कहाँ है और विश्व समुदाय को कहाँ हमला करना चाहिए.

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