Saturday, 14 July 2018

आतंकिस्तान को एक और झटका।


मालदीव, ईरान, मलेशिया के बाद अब संयुक्त अरब अमीरात ने आतंकिस्तान को थप्पड़ मारा है। संयुक्त अरब अमीरात सरकार ने छोटा शकील के सहयोगी फारूक देवदीवाला को पाकिस्तान को सौंप दिया और आतंकिस्तान (भारत) के अनुरोध को ठुकरा दिया। महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दल (एटीएस) देवदीवाला की हिरासत की मांग कर रहा था और पाकिस्तान में दो भारतीयों के लिए आतंकवादी प्रशिक्षण की व्यवस्था के लिए भारत उनका प्रत्यर्पण चाहता था।

गुरुवार को गुजरात का पुलिस उप-अधीक्षक के.के. पटेल जो के एटीएस का हिस्सा है उसने पुष्टि की देवदीवाला, जो भारतीय मुजाहिदीन के सदस्य हैं, हालांकि भारत ने उनके खिलाफ इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने के बावजूद उनको पाकिस्तान भेज दिया गया है। महाराष्ट्र एटीएस से कोई भी देवदिवाला के मामले पर टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं था। हमने अपनी पूरी कोशिश की। देवदीवाला की हिरासत पाने के लिए मैंने दुबई का दौरा किया। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है पाकिस्तान का दावा संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों के समक्ष प्रबल रहा।  के.के. पटेल ने मीडिया बात करते हुए अपना दुख बयान किया।

एक के बाद दूसरा हिटलर को झटके पे झटके और असफलता हाथ लग रही है और उसके देश की छवि मुसलमानों पर बढ़ती आतंकवादी घटनाओं के चलते और जब से उसका देश आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बन गया है बुरी तरह से तबाह और बर्बाद हो गई है। मालदीव के बाद जो एक छोटा द्वीप है ईरान, मलेशिया ने भी हिटलर को गंभीर झटका दिया है। मालदीव मुस्लिम द्वीप में वह स्वेच्छा से सैन्य समर्थन देना चाहता था। लेकिन उसने इस पत्रकार के हिंदी में मालदीव: नशीद ने मांगी है नज़ीस्त से मदद अल्लाह खैर ... और अंग्रेजी में Maldeev: Naseed cry for help.  लिखे लेख के बाद आतंकिओं से किसी भी प्रकार की मदद लेने से इनकार कर दिया।  कड़वाहट यहाँ तक नहीं रुकी, हिटलर की आतंकवादियों की सेना (भारतीय सेना) ने मालदीव को एक लड़ाकू हेलीकॉप्टर देने की पेशकश की, यहां तक ​​कि मालदीव के प्रशासन ने आतंकवादियों के दूआरा प्रशंसात्मक आधार दी जाने वाली भेंट को भी स्वीकार करने से इंकार कर दिया। दूसरी बात मालदीव ने पाकिस्तान से सैन्य सहायता मांगी, यहां तक ​​कि मोदी का हिटलर प्रशासन मालदीव को सैन्य सहायता देने का इच्छुक और तत्पर था तथा आतंकवादियों को शांति सेना के रूप में  भेजने के लिए तैयार था परन्तु उसने पाकिस्तान के साथ पावर डील पर हस्ताक्षर किए। मालदीव शायद श्रीलंका, कश्मीर, अफगानिस्तान में शांति नियंत्रण के नाम पर भारतीय सेना के गंभीर आतंकवाद के इतिहास के बारे में जागरूक होगा।

मालदीव के बाद ईरान ने चारबर बंदरगाह पर झटका दिया है, और चारबर बंदरगाह पर भारत (आतंकिस्तान) को किसी प्रकार का पक्ष देने से इनकार कर दिया है। 

कोई भी मलेशिया के हाल ही में लिए गए निर्णय को अनदेखा नहीं कर सकता है जिसने आतंकवादियों के अनुरोध पर इस्लामी विद्वान को प्रत्यर्पित करने से इंकार कर दिया। इस पत्रकार ने मलेशियाई प्रशासन की कार्रवाई की सराहना की और इस मुद्दे पर इस पत्रकार ने मलेशियाई प्रधान मंत्री को एक खुला पत्र भेजा। क्योंकि जाकिर भाई को आतंकिस्तान में जान का खतरा है और उन्हें उचित कानूनी प्रक्रिया का अवसर नहीं मिलेगा क्योंकि हाई ब्रोथेल (उच्च न्यायलय) और सुप्रीम ब्रोथेल (उच्चतम न्यायलय) तो आतंकवादियों के लिए मनोरंजन का स्थान है और वह बल, धन और राजनीतिक शक्ति के कारण अनुकूल अपने पक्ष में लेते है।

यहाँ फिर से साबित हो गया कि मुसलमानों पर बढ़ते आतंकवादी हमलों के चलते अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और इस्लामी देशों में  भारत ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है। मोदी की चुप्पी और आतंकवादियों पर कार्यवाही ना करने के चलते अंतराष्ट्रीय स्तर पे उसको ज़बरदस्त झटका लगा है और ये ही उसके असफलता व अपमान के लिए सबसे बड़ा कारण है। संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर के मुद्दे पर अपमान के बाद पाकिस्तान फिर से भारत से अधिक शक्तिशाली साबित हुआ। जब भी हिटलर और आतंकवादी मानसिकता के प्रलोभन के तहत मोदी इस पत्रकार की चेतावनी को अनदेखा करेगा तो उन्हें अपमान और झटके का सामना करना पड़ेगा। यहां फिर से साबित हुआ है कि केवल विशाल जनसांख्यिकी, सबसे बड़ा क्षेत्र, शक्तिशाली सेना, सबसे बड़ा लोकतंत्र अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को प्रभावित नहीं कर सकता है, लेकिन वास्तविक उसपे कितना अमल होता है वो चीज़ प्रभावित कर सकती है और देश के अनुकूल परिणाम ला सकती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छवि को बढ़ा सकता है।


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Yet another blow to Terroristan.
autonomousjournalist.wordpress.com/2018/07/13/yet

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