Tuesday, 24 October 2017

इतिहास दुबारा लिखने की कवायत शुरू


जिस तरह से भारत के सभी आतंकी संघटन और बीजेपी के तमाम नेता इतिहास दुबारा लिखने की पुरज़ोर सिफारिश करते है में पत्रकार जुबेर उनकी इस मुहिम का एक हिस्सा बनने के लिए अति उत्सुक हूँऔर लेखक भी यही चाहता है के इतिहास फिर से लिखा जाएजिसमे ना सिर्फ मुस्लिम राजाओ का वो हिस्सा दुबारा लिखा जाए जिसमे उन्होंने देश की भलाई के काम किये है परन्तु वो हिस्सा भी दुबारा लिखा जाए जिसमे १९४७ में भारत का बटवारा हुआ थासंघी मानसिकता इस बात को कताई सुविकार करने को राज़ी नहीं है के मुस्लिम राजाओ ने इस देश में भलाई के काम किये और आधुनिक भारत का निर्माण मुस्लिम राजाओ की देन हैऔर वो उसी हिस्से को बदलना चाहते है जिसमे देश की उन्नति और मुस्लिम राजाओ के दुवारा हिन्दू मुस्लिम भाई चारे की बाते इतिहास के पन्नो में दर्ज हो चुकी है.  

उनको तो सिर्फ इस बात की आत्मगिलानी होती रहती है के उनके पूर्वजो ने इतिहास में कुछ भी ऐसा नहीं किया जिसकी आज के दौर में प्रशंसा की जा सके.   सही बात है लेकिन जिस तरह का झूट और फरेब  फैलाया  जाता है, मुस्लिम राजाओ का वैसा सच्चे इतिहास के पन्नो में कही भी दर्ज नहीं है.   औरग़ज़ेब के बारे में जो कुछ भी झूटी अफवाह फैलाई जाती है उस अफवाह का इतिहास में आकलन करने पे कुछ और ही तथ्य निकल के सामने आते है और इन संघी मानसिकता से एक दम विपरीत सच्चाई सामने आती है संघी मानसिकता ये अफवाह फैलते रहते है के औरंगज़ेब एक क्रूर और इन्साफ शासक थे जबकि इतिहास का आकलन करने पे पता चलता है के औरग़ज़ेब एक दयालू और इन्साफ परस्त राजा थे. अगर उन्होंने वाराणसी की मंदिर तुड़वाई तो उसके पीछे का और आगे का पसमंज़र नहीं बताया जाता है के उस मंदिर में महंत ने औरंगज़ेब के हिन्दू सिपहसालार की लड़की के साथ सेकड़ो हिन्दू लड़कीओ को बंधक बना रखा था फिर आलमगीर की बदौलत वो तमाम लड़किया महंत की कैद से आज़ाद हुई और उस मंदिर को तोड़ा गया और उसके बदले सेकड़ो एकड़ ज़मीन और करोडो रूपये दिए गए नई मंदिर बनवाने के लिएवो आजकल के पाखंडी राजा की तरह देश की संपत्ति  का धूआ विदेशो में भ्रमण करने में नहीं गवाते थे, और ८० लाख का सूट नहीं पेहेनते थे बल्कि अपनी निजी ज़रुरत के लिए कभी भी देश की संपत्ति के ऊपर डाका नहीं डालते थे और टोपी बून के  क़ुरआन लिख के जो मज़दूरी इखट्टा होती थी उसमे अपनी निजी ज़रुरत पूरी करते थे. फिर ग्रांट ट्रंक रोड हिन्दुस्तान की पहली एक्सप्रेस हाई वे किसकी देन है वो है शेर शाह सूरी की देन. फिर हरयाणा और राजस्थान में इतिहास बदलने की कवायत पूरी हुई और हल्दी घाटी के युद्ध में अकबर महान की पृथ्वीराज के ऊपर फतह को अब उल्टा पढ़ाया जा रहा है यहाँ पे बच्चो के ज़ेहन में ज़हर भरा जा रहा है के अकबर नहीं परन्तु पृथ्वीराज हल्दी घाटी में जीता था. और अकबर महान हारे थे

लेखक भी इतिहास फिर से लिखने और बदलने की पूरज़ोर अपील करता है और इन संघीयो के साथ शाना बा शाना इतिहास बदलने या दुबारा लिखने की मुहिम की पूरज़ोर वकालत करता हैलेकिन लेखक इन संघीयो और भाजपाइओ से एक अपील करना चाहता है सिर्फ मुगलो का ही इतिहास कियो दुबारा लिखते हो १९४७ में जो कुछ हुआ उसको भी दुबारा लिखो. मुगलो का दौर तो अब लौट के आने से रहानहीं तो हल्दी घाटी में एक युद्ध और हो जाता और उसका एकदम सटीक आकलन हो जाता जो इस दौर में जीत जाता उस को ही उस दौर का जीता हुआ राजा माना जाये. लेकिन  जो इंसाफ़ी १९४७ में मुस्लिम समाज के साथ हुई थी उसको तो इस दौर में फिर से लिखा जा सकता है और इतिहास अब भी बदला जा सकता हैजी हां बिलकुल सही समझा आपने लेखक का इशारा पाक की तरफ है उस दौर का मुगलिया इतिहास बदलने की बात करते हो तो इस दौर में मुस्लिम समाज को एक अलग स्टेट देना पड़ेगा या फिर पाक की सीमाओं को बढ़ाना पड़ेगातो सही में वो होगी इतिहास दुबारा लिखा जायेगा मुहिम की सही लिखावटक्योकि ये आधा अधूरा इतिहास फिर से लिखने  का कोई फायदा नहीं अगर दुबारा लिखना है तो है तो १९४७ का भी इतिहास फिर से लिखना पड़ेगा.

अगर संघी, आतंकवादी या भाजपाई सिर्फ मुगलिया इतिहास बदलना चाहते हे तो साफ ज़ाहिर है के वो एक तरफ़ा कारवाही और पाखंड पे यकीन रखते है और फैसले भी वैसे ही करना चाहते है जो उनके हक़ में हो. ये संघी, आतंकवादी और भाजपाई सिर्फ इतिहास का वो हिस्सा बदलना चाहते है जिसमे मुस्लिम राजाओ ने आधुनिक भारत के निर्माण में योगदान किया हो. क्योके इन संघीयो ने तो भारत के निर्माण में कोई भी योग्दान दिया ही नहीं है सिर्फ और सिर्फ खून खराबा देश का बटवारा और हिन्दू मुस्लिम की राजनीति में अपना भरपूर योगदान दिया है. जो संघटन एक बूढ़े, निहत्ते, निर्बल इंसान को मौत के घाट उतार सकता है  जिसने देश की आज़ादी में अपना भरपूर योगदान दिया हो तो ऐसा संघटन देश के इतिहास की नई लिखावट में दुबारा बटवारे की कवायत की भी पूर ज़ोर सिफारिश कर सकता है.  

जो भाजपा के बड़े बड़े नेता आई.इस.आई. को सेना की महत्वपूर्ण जानकारी दुश्मन देश को सांझा करते थे तो वो इस नए युग में जो इतिहास दुबारा लिखा जाएगा उसमे पाक की सीमाओं को बड़ाने के ऊपर भी काम करते हुए पाए जायगे. इतिहास में भी इन्ही देश द्रोहिओ की वजह से भारत का बटवारा हुआ था और नए युग के इतिहास में जो फिर से लिखने की कवायत शुरू की जा रही है उसमे फिर से भारत के बटवारे में इन्ही जैसे देश द्रोहिओ का नाम सरे फेहरिस्त रहेगा .

ये पत्रकार अपने पहले वाले बोहोत से लेखो के ज़रिये या फिर पब्लिक डेबिट में और अपने संक्षिप्त कमेंट में कई बार इस बात को कह चूका था अगर इन आतंकवादीओ के ऊपर नकेल नहीं कसी गई तो ये भारत को फिर से विभाजित कर देंगे.

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