एक सफ़ेद कॉलर
डाकू को अमित के बाद वरुण बचाने आये: पत्रकार जुबेर ने पूछे कुछ तीखे सवाल और किया
वरुण गाँधी पे कटाक्ष
बीजेपी सांसद वरूण गांधी ने शुक्रवार को डकैत जय
शाह के बचाव में खुल के किया समर्थन. नलसार
विधि विश्वविद्यालय के एक छात्र के सवाल कि सरकार ने बिना जांच के जय शाह को दोषमुक्त
मान लिया है पर प्रतिक्रिया देते हुये गांधी ने कहा, - एक लेख से कोई दोषी नहीं होता.
आगे उन्होंने कहा कि कोई आरोप एक शख्स को दोषी नहीं बना देता और लेख के आधार पर निरंकुशतावादी
स्थिति नहीं बना लेनी चाहिये. वरूण गांधी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह के
कारोबार से जुड़े एक लेख के संदर्भ में यह बात कह रहे थे.
पत्रकार जुबेर
ने वरुण गांधी की बात को तुरत लपक लिया और उनके ऊपर किया ज़ोरदार हमला. वरुण जी आपकी हैसियत पार्टी में क्या है आपको खुदको पता होना चाहिए फिर आप किस आधार पे यहाँ अपनी प्रतिक्रिया दे रहे है क्या आप न्यायपालिका है क्या आप कानून मंत्री है क्या आप प्रधान मंत्री है किया आपको पार्टी ने अधिकृत किया है क्या आप पार्टी
के स्पोक पर्सन की हैसियत से ये बात कह रहे है. आपकी राय की क्या एहमियत है वो इसी बात से दिख जाती है जब आपने रोहंगिया शरणर्थीओ का समर्थन किया था तो भारत की कट्टरपंथी जनता की बात तो छोड़ दो आपकी खुद की पार्टी से आपके खिलाफ बागी सूर निकलने लगे थे.
आप एक सफ़ेद कालर डकैत और उसके पीता का समर्थन सिर्फ इसलिए कर रहे है के अगर फिर आपने पार्टी के पदाधिकारी या उन से जुड़े हुए किसी भी शख्स पे अपनी राय रखी तो पार्टी आपके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है तो आपको डाकू हो मुजरिम हो आतंकवादी हो देश द्रोही हो हर उस इंसान का समर्थन करना ही पड़ेगा जिसको पार्टी का सपोर्ट होगा.
फिर आप कैसे किसी इंसान को क्लीन चिट दे सकते है एक लेख से कोई भी इंसान दोषी या निर्दोष नहीं हो जाता लेकिन जिसके खिलाफ कोई आरोप हो और जांच ही शुरू नहीं की जाय तो कैसे पता चलेगा के आरोप सही या गलत.
कल अमित शाह अपने पुत्र के समर्थन में आये, काश उनको अपने धर्म का थोड़ा सा ज्ञान होता तो ऐसी बात नहीं कहते जिस तरह से दशरथ राजा का तीर एक बालक को लगता है और उसकी मृत्यू पे उस बालक के पीता राजा दशरथ को श्राप देते है "जिस तरह तूने मेरे पुत्र को मारा है तू भी उसी तरह पुत्र वियोग में तड़प तड़प के मरेगा" तो अमित शाह को अपने डकैत बेटे का बचाव करने से पहले खुद अपने अतीत को देखना चाहिए के उसने कितने निर्दोष पुत्रो की जान ली है और उनके माता पीता के श्राप से वो कैसे बच सकता है. जब एक पुत्र की जान लेने पे राजा दशरथ जो हिन्दू धर्म के हिसाब से भगवान् के अवतार थे वो श्राप से नहीं बच सके और उनके ऊपर विपदा आई तो अमित जैसे गुंडे मावली, आतंकवादी ने तो अनगिनत पुत्रो की जान ली है फिर उसके ऊपर श्राप का क्या असर होगा वो तो आने वाला समय ही बताएगा.
फिर अमित कहता है के मेरा बेटा डकैत नहीं है बल्कि उसने १०० करोड़ का दावा किया हे वेबसाइट के ऊपर. न्यायलय
में मानहानि का दावा इस बात का सबूत नहीं हो जाता के सामने वाला निर्दोष है या दोषी.
भारत में न्यायपालिका की स्थिति मालूम है जब फौजदारी केस १९८७ में जिन पुलिस वालो ने
मलिहाबाद में ४९ निरपराध मुसलमानो को गोली मार के शहीद कर दिया था और उनकी लाशो को
नेहर में बहा दिया था उस केस का निकाल अभी एक साल पहले ही आया है. तो दीवानी दावों
का निकाल बरसो लग जाते है आता ही नहीं है. और जब आएगा तब तक आपका डकैत बेटा या तो नर्क
में जा चूका होगा या फिर बूढ़ा हो चूका होगा. तो अमित महोदय आप न्यायलय के दावे की बात
सिर्फ जनता को गुमराह करने के लिए कह सकते है लेकिन एक दानिशमंद पत्रकार तो आपसे सवाल
करेगा.
मेरा निवेदन तो सरकार से है के वो जय शाह के खिलाफ जांच के आदेश दे और अगर उसके खिलाफ आरोप सिद्ध हो जाते है तो जो एक आतंकवादी, डकैत, देश द्रोही की सजा वो उसकी सजा.
जुबेर एहमद खान
पत्रकार
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