Thursday, 19 October 2017

क्या ये ज़रूरी है.........



 
एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजबीर का आईपीएस बेटा रोहित

दक्षिण एशियाई देशो में मुख्यता भारत में एक परम्परा होती है के पिता की विरासत और प्रोफेशन बेटा स्वीकार या इख्तियार करता है और उसी मार्ग पे चलता है जो उसके पिता ने उसके लिए बनाया है या जो संस्कार उसको परिवार से मिले है उन्ही को अपनाता है। लेकिन एक डॉक्टर का बेटा डॉक्टर हो तो अच्छा है एक इंजीनियर का बेटा इंजीनियर हो तो भी अच्छा है यहाँ तक के एक अधिवक्ता का बेटा अधिवक्ता हो तो भी अच्छा है लेकिन ये क्या ज़रूरी है एक पुलिस का बेटा पुलिस हो और ख़ास कर के अपने पिता की आकस्मिक मृत्यु के बाद अपना ज़ेहन तब्दील कर के पुलिस फोर्स ज्वाइन करे ये कताई सही नहीं है।



ऐसा ही एक मामला दिल्ली से इस पत्रकार के सामने आया है जहा दिल्ली पुलिस के विवादित 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' एसीपी राजबीर सिंह के सुपुत्र रोहित राजबीर सिंह एसीपी के पद पे नियुक्त हुए है। उनकी नियुक्ति पे इस पत्रकार को कोई आपत्ति नहीं है बल्कि ये पत्रकार तो एसीपी रोहित जैसे होनहार, युवा, गतिशील और काबिल अफसर की तारीफ करना चाहता है। इस पत्रकार को आपत्ति है तो रोहित के पिता से जो के ५० एनकाउंटर में शामिल थे जिनमे कई पे विवाद और अपवाद है और उनका भी एनकाउंटर ही हुआ जिसके बाद रोहित के आकस्मिक मन बदलने के पीछे क्या बदले की भावना तो नहीं है। 


२४ मार्च २००८ की शाम को दिल्ली पुलिस के विवादित 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' एसीपी राजबीर सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई।  एसीपी राजबीर देश के ८ सबसे ज़्यादा विवादित 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' में शुमार रहे और बेहद कम वक्त में शोहरत की बुलंदियों को हासिल किया।  राजबीर की शख्सियत पे भी विवाद है जो १९८२ में भर्ती तो सब इंस्पेक्टर के पद पर हुआ, मगर इंसानी लाशो के दम पर महज १३ साल में प्रमोट होकर एसीपी बन गया।  उसने एक के बाद एक ५० से अधिक एनकाउंटर किए। जिसमे कई फेक एनकाउंटर की सीमा को लाँगते है और उसको एसीपी के पद पे पहुँचाने के लिए काफी है।  लेकिन विधि का विधान देखिये जो पोलिस अफसर दूसरो का एनकाउंटर करता था उसका खुद का एनकाउंटर हो गया। इस हत्या काण्ड के बाद राजबीर के सुपत्र रोहित ने इंडियन पुलिस सर्विसेज ज्वाइन करने का फैसला लिया भवष्यि के इरादों को मीडिया के साथ साझा किया।


पत्रकारों से बात करते हुए क़ातिल के बेटे ने कहा जब उसके बाप का क़त्ल हुआ वो महज़ १६ वर्ष का था फिर क़ातिल के बेटे ने दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी से २०१३ में मैकेनिकल इंजिनियरिंग पूरी की। अब सवाल यहाँ ये उठता है जब रोहित ने मेकेनिकल इंजीनियरिंग पूरी कर ली थी तो पुलिस विभाग में क्यों आया.  यहाँ ये बात साफ़ हो जाती है के रोहित अपने बाप के क़ातिल को अपने हाथो से मारने के लिए पुलिस फ़ोर्स में भर्ती हुआ है न की देश की सेवा का जज़्बा रखते हुए।  जो काम वो एक गुंडे की हैसियत से नहीं कर सकता अब वो खाकी धारण कर के पूरा करेगा।  अगर रोहित देश की सेवा का जज़्बा ले कर पुलिस फ़ोर्स में भर्ती नहीं हुआ बल्कि बदला लेने के लिए भर्ती हुआ है तो कानून और भारतीय सविधान के हिसाब से बिलकुल गलत है।  एसे लोग ही पुलिस विभाग का नाम बदनाम करते है।  कांग्रेस शासन मे इस पत्रकार ने बोहोत से पत्र उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, प्रधान मंत्री, ग्रह मंत्रालय तथा सभी संबंधित अधिकारिओ को लिखे है के पुलिस विभाग या न्यायिक पोस्ट पे मनुष्य का बेक ग्राउंड देख के ही नियुक्त किया जाये।  अब जिसका बाप ५० से ज़्यादा एनकाउंटर मे शामिल था ओर ड्रग्स माफिया, गुंडों से जिसकी सांठ गाँठ थी तो उसका बेटा क्या कानून की रखवाली कर पायेगा। ये सवाल बड़ा है जिसका जवाब आने वाला वक्त ही देगा.  मीडिया को दिए इंटरव्यू में खुद ही इस बात को तस्लीम कर रही है के इस आईपीएस ऑफीसर के पिता एक हवलदार की हेसियत से पुलसि मे भर्ती हूए थे फिर एनकाउंटर कर कर के .सि.पि. बने।  बेटा पुलिस मे आया तो वो अपने बाप की मौत का बदला लेने को आया है ना के देश की सेवा करने का कज़्बा ले कर आया है.


वैसे भी पुलिस को ये पत्रकार कभी खाकी आतंकवादी, कभी खाकी डकैत और कभी खाकी खुनी इन नामो से ज़्यादा संबोधित करता है। उत्तर प्रदेश पुलिस का रेट कार्ड फिक्स है. किसी को टपकना है तो सुपारी ले के कानून के दायरे में एनकाउंटर, फिर जेल में डालना है तो उसके लिए अलग रेट, आतंकवादी गतिविधियों में चार्ज लगाना है तो उसके लिए अलग रेट, जेल में सड़ाना है तो उसका अलग रेट।


तो जिस पुलिस अफसर के ऊपर ५० एनकाउंटर करने का इलज़ाम है जिसमे से कुछ फेक एनकाउंटर की फेहरिस्त को लांग रहे हे और जिस पुलिस अफसर की सांठ गाँठ ड्रग्स माफिया, क्रिमिनल्स, गुंडों, मावलीओ से हो तो ये कैसे मुमकिन है के उस पुलिस अफसर का बेटा ख़ास कर के उसके खून होने के बाद पुलिस फोर्स में देश की सेवा करने का जज़्बा रख के निस्वार्थ निश्छल और साफ़ मन से आया हो। सवाल बड़ा है सच्चाई क्या हे आने वाला वक्त ही बताएगा।

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