अज़ीज़ नाज़रीन,
जनाब असद साहब से गुज़ारिश करना चाहूंगा हर मुद्दे पर भारत के मुवाफ़ेक़त में बहस और हुकूमत को घेरने की बातें ना किया करें। बीजेपी, संघी कभी भी अपनी ग़लती और ग़फ़लत को तस्लीम नहीं करेगें।
मोदी और बीजेपी ही भारत को बर्बाद करेगें। बीजेपी का भारत को तोड़ने का काम चालू है। हाल ही मे चीन के भारत की मज़ीद जमींन पर क़ब्ज़ा करने वाली घटना पर जब आपने सवाल पूछे और एवान में बहस का मुतालबा किया तो संघी आग बाबुला हो गए। फ़ौज के बड़े बड़े कर्नल, आराकीन भी मोदी और हुकूमत की चाटूकारिता कर रहे थे। असद साहब आप तो अपना दुख ज़ाहिर कर रहे थे की भारत को मोदी इन्तेज़ामियाँ तोड़ डालेगी और संघी आपके उस दुःख पर भी गन्दी गाली गलोच कर रहे थे।
मै असद साहब से कहना चाहता हूँ काहे को आप भारत के हक़ मे बोल कर दहशतगर्दों की गाली गलौच और गंदी ज़ुबाँन सुनते हैं। मरने दीजिये इनको और इनके देश को। हाँ मुस्लिम हक़ की बात कीजिये उसमे संघी गाली दें या ज़लील करें, क़ौम और मिल्लत के लिए गाली सुनना पड़े तो भी चलेगा। लेकिन भारत के लिए नही। होने दो क़ब्ज़ा चीन का पाकिस्तान का या बंगलादेश का। हमे क्या करना है।
चीन के हाल ही के ९ दिसम्बर के हमले मे २० भारतीय फौजी मारे गए हैं। जिसका ज़िक्र मैने जिस रोज़ ख़बर आवामी हल्क़े में ज़ाहिर हुई थी, उसी रोज़ कर दिया था की २० फौजी मारे गए हैं और दर्जनों घायल हैं। उसके उपर वज़ीरे दाख़ला से बयान आया ना कोई घायल है ना कोई मरा है। अब मेरी उस बात की तस्दीक़ कल की गई और ख़बर को सिक्किम में एक हादसे में १६ भारतीय फौजी शहीद बोल कर लीक किया गया। जिसको सिक्किम का हादसा बोला गया वोह ९ दिसम्बर को मारे गए फौजी थे।
भारतीय फ़ौज के अफसरों का दोग़ला पन ग़द्दारी देखो वोह असद साहब के उपर तनक़ीद कर रहे थे और मोदी हुकूमत का बचाव। यह लोग तो भारत के ग़द्दार हैं इनको सबसे पहले गोली मारना चाहिए। असद साहब के वाजिब सवाल पर हर फौज का सरबराह मोदी हुकूमत को मेहफ़ूज़ कर रहा था और असद साहब के ऊपर निहायत ही अदना दर्जे की बदज़ुबानी कर रहा था। एक फौजी ऑफिसर असद साहब को कुत्ते से शबी देता है। सिर्फ इसलिए की असद साहब हक़ सवालात पूछ रहे थे और मोदी इन्तेज़ामियाँ को कटघरे में खड़ा कर रहे थे। तो वोह बात भारत के गद्दारों को हज़म नहीं हुई। फिर मरने दो इन गद्दारों को। असद साहब अब कभी भी चीन क़ब्ज़ा करे या भारतीय फौजी हज़ारों की तादात में मारे जाएँ कोई सवाल मत करिये। जब आपके जाइज़ और वतन की मोहब्बत वाले सवाल पर इन गद्दारों को अंगार लगती है तो टूटने दीजिये भारत को और मरने दीजिये हर दुसरे रोज़ इनके फौजी।
भारतीय ज़ाफ़रानी मीडिया के लंगूर और लँगूरनियों की मजबूरी कही जाए, दोग़ला पन या ग़द्दारी यह सहाफ़ी समझने से क़ासिर है। अब इन लंगूर-लँगूरनियों के नए आक़ा मोदी जी नहीं बल्कि राहुल जी होते जा रहें हैं। इन लँगूरनियों को जबी में ज़हन फ़रोश बोलता हूँ। जैसे की एक बदकिरदार औरत मौक़े की नज़ाकत और सामने वाले की क़ुव्वत, ओहदा और पैसा देख कर गिरगिट के जैसे रंग बदलती है और चापलूसी करती है वैसा ही आहिस्ता आहिस्ता यह लँगूरनियाँ करने लगी हैं।
जिस तरह की हवा मोदी, बीजेपी के लिए २०१२ से २०२२ तक हर इंतेखाब में बाँधना इस सहाफियों की मजबूरी थी वैसे ही हवा अब कांग्रेस और राहुल गांधी के लिए बांधना शुरू कर दी है।
हाल ही में आज तक की चित्र त्रिपाठी और अंजना ॐ कश्यप बीजेपी के नुमाइंदों को ज़रा ज़्यादा ही हाशिये पर रख रहीं हैं और कांग्रेस के लिए हवा बाँधने के काम कर रहीं हैं। लगता हैं उनको अब एहसास होना शुरू हो गया होगा की ग़ुलाम भारत के आखिर वाइसराय लार्ड माउंट बेन्टन का दौर का इक्तेदाम होने वाला है सो उन्होंने अभी से कांग्रेस के हक़ में चापलूसी का आग़ाज़ कर दिया है।
लेकिन यहाँ में फिर से दोहराना चाहूंगा की यह मीडिया हाउस फिर ग़लती कर रहें हैं। किसी एक हुकूमत या तंज़ीम की चापलूसी करना उनके हुकुम के ताबेदार होना और हक़ बात से मुँह छुपाना नाहक़ बात पर हुकूमत को हाशिये पर नहीं लेना चुब्ते हुए सवाल हुकूमत या इक़्तेदार की कुर्सी पर बैठे हुए नुमाइंदों से नहीं करना दरअसल अपने फ़र्ज़ और सहाफ़त से ग़द्दारी करने जैसा है।
बिल फ़र्ज़ अगर २०२४ में कांग्रेस आती है जिसके इमकानात कम नज़र आ रहें हैं और हुकूमत के किसी भी नाजाइज़ अमल पर पर्दापोशी की गई और सवाल नहीं किया गया तो वैसा ही होगा जैसा आज कल हो रहा है। सिर्फ उन्ही मुद्दों जिसपर की हुकूमत की भारत के विदेश नीति पर झूटी वाह वही वाली खबरे दिखाई जाएगी। मसला ऐ कश्मीर, मुस्लिम नस्ल कुशी, नाइंसाफ़ी, फ़िर्क़ा वाराना फ़सादात, अदलियाई दहशत, सियासी और इन्तेज़ामियाई दहशत जैसे मसलों पर अगर भारत को आलमी बरदारी कटघरे में खड़ा करेगी तो ख़ामोशी इख़्तेयार की जाएगी।
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