अज़ीज़ नाज़रीन,
जुम्मन मियां सुधर जाओ नहीं तो बोहोत जूते खाने वाले हो। जो जुम्मन मजलिस को वोट ना देने की अपील कर रहें
हैं उनसे कहना चाहता हूँ तुमने नोनिहाद सेक्युलर तंज़ीमों को अभी तक वोट किया, क्या मिला तुमको। तुम्हारी अस्मत लूटी गई, क़त्ल किया गया, ज़मीन जायदाद
हड़प ली, मस्जिदों को लूट लिया गया। अगर अभी
भी तुम संघ और बीजेपी के इशारे पर उस इंसान के ख़िलाफ़ बदगुमानी पैदा कर रहे जो जंग
लड़ रहा है तो तुम्हारा अल्लाह भी हाफीज़ नहीं होगा। कियोंके तुम मुनाफ़िक़ों की जमात में चले गए हो मुजाहिद
पर झूट फ़रेब बेबुनयाद बातें कर के उम्मा के दिलों दिमाग़ में शक वस्वसे डालना शैतानी
अमल है। अगर मजलिस और उसके सरबारह असद, अकबर बिके हुए हैं तो कोई पुख़्ता सबूत लाओ,
ताके उनके ख़िलाफ़ मुफ़्ती ऐ आज़म की जानिब से शरई फतवा दिया जा सके नहीं तो तुम्हारा
अमल ब-ज़ाहिर मुनाफ़िक़ाना है, बातिन का अल्लाह जाने। जुम्मनों बग़ैर कोई पुख़्ता सबूत तुम्हारी लायानी बातें, बेबुनयाद इलज़ाम ना सिर्फ क़ाबिले मज़म्मत हैं बल्कि लानत के मुर्तकिब भी हैं।
।। सहाफ़ी ज़ुबेर ।।
दौरे मौजूदा में जो हालात हिन्द के हो चले हैं वोह कोई ग़ैर तसव्वुर कर्दा नहीं हैं, बल्कि इसका शऊर हर दानिशमंद, सहाफिओं, फलसफे बाज़ों और दूरंदेश अवाम को था, की ऐसा होने वाला है या ऐसा हो सकता है। आज जो तमाम नोनिहाद सेक्युलर तंज़ीमे अपने ऊपर किये गए मज़ालिमों को दिखा कर अश्क़बार हो रहीं हैं और सहाफ़ी इजलासों में मोदी, अमित, योगी, बीजेपी और संघ के ऊपर ख़ूब अपना ग़ुबार निकाल रहीं हैं अगर वक़्त रहतें तुमने संघ और शिद्दत पसंद बीजेपी के उन तमाम नुमाइंदों के ऊपर हिकमते अमली इख़्तियार की होती जो पुर आलूद थे हैं और रहेंगे जो तुम्हारी हुकूमत होते हुए भी ज़हर की काश्त करते थे तो आज तुमको दूसरों के सामने अपने ज़ख़्म दिखाने की हाजत ही नहीं होती।
Who is the real army in India, Indian Army or RSS??????????
अभी
३ रोज़ क़ब्ल सूबे शुमाल में सपा सियसतदाँ अखिलेश यादव एक इजलास में सहाफ़ियों के सामने
खूब आँसू बहा रहे थे और योगी को खूब खरी खोटी सुनाई। वोह बोलतें हैं की योगी हमारे नुमाइंदों हमारी तंज़ीम
के लोगों पर बेजा ज़ुल्म बंद करे। हमारी हुकूमत
में हमने कभी योगी के ऊपर हिकमते अमली नहीं की।
अखिलेश जैसे उन तमाम नोनिहाद सेकुलरों को हर वक़्त तन्क़ीदी तब्सिरों और मज़ामीनों
के ज़रिये यह सहाफ़ी सलाह देता रहता है और हालाते हाजरा इन नोनिहाद सेकुलरों, मुस्लिम
मआशरे में मौजूद सियाह भेड़ों (जुम्मानों) को एक सबक़ है की इससे मज़ीद बूरा तुम्हारे साथ
होगा अगर वक़्त पर बेदार नहीं हुए।
यह
सहाफ़ी २०१० से २०१३ तक कांग्रेस की तब की हुकूमत को ख़ूब ख़ुतूत और मज़मूनों के ज़रिये
हालात से आगाह करता था और उसका यही कहना था की खूंखार ज़ालिम तरीन दरिंदा सिफ़त दहशतगर्द
तंज़ीम RSS और उसके तमाम विंग्स को बेन करो नहीं तो मुस्तक़बिल में तुमको जीने नहीं
दिया जाएगा। २०११ में सूबे दरमियान (एमपी)
के भोपाल, इंदूर में दहशतगर्द महाराणा प्रताप और एक हैवान (जानवर) लंगूर की योमे पैदाइश
पर जब RSS ने असलहा के साथ मुस्लिम हल्क़ों से जुलूस निकाला था तब मध्य प्रदेश
और मरकज़ की हुकूमतों को ख़त लिखे थे की इनको किस ने इजाज़त दी इस क़दर जदीद तरीन अस्लेह
के साथ जुलूस निकालने की, और क्या यह मुस्लिम अवाम को ख़ौफ़ज़दा करने की हिकमत नहीं है। मेने साफ़ यही लिखा था अगरचे बंदूकें लाइसेंस वाली
हैं तो उनका लाइसेंस रद्द किया जाए और अगर ग़ैर क़ानूनी तरीके से ली हुई हैं तो उनको
ज़प्त कर के मुल्ज़िमों के ऊपर एक्शन लिया जाए।
कियोंके अगरचे लाइसेंस वाली बंदूक भी है तो वोह इस तरीक़े से एक ख़ास फ़रीक़ को
दहशत में डालने और मुज़ाहिरे करने के लिए नहीं होती है। बल्कि हुकूमत लाइसेंस हिफाज़त के लिए देती है ना
की दुसरे फ़रीक़ को डराने धमकाने मुज़ाहिरे करने के लिए।
कांग्रेस
उस वक़्त ग़फ़लत में रही की ज़ुल्म मुसलमानों के ऊपर हो रहा है हम तो इन दहशतगर्दों के
ऊपर हिकमत नहीं कर के इनकी मदद करेगें फिर जब इनकी हुकूमत आएगी तो यह हमारे ऊपर कोई
हिकमते अमली इख़्तेयार नहीं करेगें।
लेकिन
जैसे ही हाकिम दहशत का आक़ा बना उसने तो कांग्रेस, सपा, बसपा, आप का सियासी क़त्ले आम
मचाना शुरू कर दिया। इन दहशतगर्दों और उसके
आक़ा के नज़दीक मुख़ालिफ़ों की उनकी हुकूमत में कोई ज़रुरत नहीं है। यह दरिंदा सिफ़त ज़ालिम
तरीन क़ातिल जल्लाद तमाम मुख़ालिफ़ों का सियासी
क़त्ल कर के भारत में किम जोग की तरह एक ज़ालिम तरीन हुकूमत क़ामय करना चाहता है। जहाँ सिर्फ और सिर्फ उसकी ही आवाज़ को तरजीह दी जाए
और जो कोई भी उसकी नाजाइज़ हरकतों के खिलाफ आवाज़ बुलंद करे उसका क़त्ल कर दिया जाए या
गोली मार दी जाए। यहाँ तक की इस ज़ालिमाना
हिकमत में दिल्ली सल्तनत पर क़ाबिज़ माफ़ी वीर का वारिस झूट, फरेब, लुगाई छोड़ भगोड़ा ग़ीर ने अपने खुद के भाई मराठा वारिस का ही सियासी क़तल कर
दिया और उनके कई वफ़ादार साथियों को जेल में ठूस दिया।
(आलमगीर
रेहमतुल्लाह अलैहे) पर ऊँगली उठाने वाले ज़रा देख लें २०२२ में जब जदीद आलम की इफ़्तेताहा हो रही है तुम जदीद भारत का ख़्वाब देख रहे हो लेकिन उस जदीद भारत में तुमने अपनों के
साथ क्या किया।
२०१५ में राहुल गांधी भोपाल अवामी इजलास में गए थे वहां पर RSS को खूब कोस रहे थे वतन की सालमियत के लिए खतरा हैं वगेरा तब भी उनको हिंदुस्तान टाइम्स अंग्रेज़ी ख़बरनामे में जवाब दिया था। श्रीमान राहुल जी जब आपके हाथों में हुकूमत थी तब तो आपने कोई हिकमत नहीं की और अब कोस रहे हो। ज़ाहिर हो रहा है आप दोनों एक ही थाली के चट्टे बट्टे हो।
आज तमाम मुख़ालिफ़ीन संघ की दहशत और ज़ाफ़रानी तंज़ीम के ज़ुल्म और ग़ैर वाजिब हिकमते अमली से परेशान हैं। संघ और बीजेपी की मुख़ालिफ़ीनों को ख़तम करने की हिकमत है। जब मुख़ालिफ़ीन हुकूमत में थे और उन्होंने इन जैसी ज़ालिम तरीन दहशतगर्द तंज़ीमों के ऊपर हिकमत नहीं की वोह तुम्हारी ग़फ़लत, नाहेली और कमज़ोरी थी, तुम्हारे अंदर सियासी शऊर और दूरंदेशी नहीं थी की तुम्हारे साथ क्या क्या हो सकता है। लेकिन जब दहशतगर्द, ज़ालिम, दरिंदे हुकूमत पर क़ाबिज़ हुए तो उन्होंने दिखा दिया की वोह तुम्हारे साथ क्या कर सकतें हैं और किस हद तक जा सकतें हैं। वोह तुमको ख़तम कर देंगें।
इतना
ही नहीं २०१४ से अभी तक संघ, बीजेपी, शिद्दत पसंद हिन्दू, लंगूर-लँगूरनियों को भी खूब
नसीहतें की थी लेकिन जैसा की कांग्रेस और तमाम उस दौर की नोनिहाद सेक्युलर तंज़ीमों ने अनदेखी की
वैसे ही यह ज़ाफ़रानी तंज़ीम कर चुकी अब इसका भी वही हाल होने वाला है जो आम तोर पर ज़ालिमों,
दरिंदों, फरेबियों, झूटों और धोख़े बाज़ों का होता है।
जुम्मन अपने अपने हल्क़ों में आवाज़ बुलंद कर रहें हैं और नाम बनाम बोल रहें हैं की मजलिस को वोट मत दो। असदुद्दीन बीजेपी को फ़ायदा पहुंचाने आये हैं। वोट का बिखराव होगा मुत्तहिद हो कर एक ही तंज़ीम को वोट दो। लेकिन यह बताना भूल गए की किस तंज़ीम के ऊपर मुस्लिम अवाम भरोसा कर सकता है। जुम्मनों की बात को मान लिया जाए की मजलिस हुकूमत क़ायम नहीं कर सकती तो १९९० में आडवाणी ने ज़ालिम तरीन, दरिंदा सिफ़त हुकूमत क़ायम करने का बीड़ा उठाया था और आज पिछले १० सालों से बीजीपी मरकज़ में है और भारत के कमो बेश २० सूबों में हुकूमत क़ायम करने में कामयाब हुई।
अपने हक़ के लिए जद्दो जेहद करना होगा आज से आग़ाज़ किया तो उसका फल तुम्हारी नस्लों को मिलेगा। उन्होंने ज़हर की काश्त की बबूल बोये उसका फल उनको मिला और शूल उनके अपनों में ही पेवस्त हो रहें हैं। अकाल मौतों का गड बन गया है तमाम शुमाली हिन्द, सूबा दरमियान, गुजरात और वोह तमाम सूबे जो ज़ाफ़रानी हुकूमत के ज़ेरे इंतज़ाम हैं। तुम आम की काश्त करो मीठे पानी के चश्मे जारी करो तुम्हारी नस्लों को आराम होगा सुकून होगा। आज की तुम्हारी तकलीफ कल की राहत होगी। सऊदी और तमाम इस्लामिक मुल्क जो कभी रेगिस्तान की आतिशी धुप में तपते थे आज तमाम आलम भारत को मिला कर उनसे तिजारत करने उनसे भीक मांगने उनके पीछे भाग रहा है।
सहाफ़ी ज़ुबेर
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