अज़ीज़ नाज़रीन,
हालिया
दिल्ली बल्दिया इन्तेख़ाबात के नतीजे आये हैं वोह चौकाने वाले हरगिज़ नहीं हैं। ना ही बीजेपी के लिए और ना ही अवाम के लिए। दरसल सियासत की बिसात पर ज़ाफ़रानी तंज़ीम अब कमज़ोर
होने लगी है। मोदी के ज़ईफ़ कंधे अब वतने हिन्द
में होने वाली बर्बादी, आमवात, तबाही के वज़न को नहीं उठा सकते तो उन्होंने आप के नाम
से एक जदीद तंज़ीम तय्यार की है। जिसको जंग
में फौजी अफसरान सेकंड लाइन ऑफ़ एक्शन बोलतें हैं।
यह वैसा ही है अगर हम शाकिस्त खा गए तो हमारे हक़ में काम करने वाला कोई तो होना
चाहिए जो हिंदुत्व की सियासत और फ़िरक़ापरस्ती को आगे की जानिब ले जा सके।
बीजेपी और कांग्रेस ग़रूब होते हुए सितारे हैं।
इस बात का ज़िक्र २०१८ से हर वक़्त करता रहा हूँ की बीजेपी, संघ, हिन्दू शिद्दत पसंदी ख़तम हो जाएगी।
१९४७ से क़ब्ल हिन्दू महा सभा हुआ करती थी जो निहायत ही ज़हरीली मुस्लिम, क्रिस्टी क़त्ले आम पर यक़ीन रखने वाली दंगा फसाद दहशत फैलाने वाली तंज़ीम थी।
वोह ख़तम हुई आज़ादी के बाद १९५१ में जनसंघ ने हिन्दू महासभा का चोला पहल लिया जो उसका जदीद रूप थी और १९८४ में इंदरा गाँधी के क़तल तक रही।
जनसंघ ख़त्म होने की कगार पर थी की १९८० में उसकी जगह बीजेपी ने ले ली जिसने तमाम भारत पर हिन्दू हुकूमत का ख़्वाब मुकम्मल किया।
ज़ाफ़रानी
तंज़ीम बीजेपी के ख़ात्मे के बाद "आप" उसकी कमान संभाल रही है कियोंके जिस हिकमते
अमली पर आप काम कर रही है वोह हू बहू बीजेपी का तय्यारकर्दा है। आप की Modus
Operandi वैसी ही है जैसी बीजेपी की है। ज़ाहिर हो रहा है ख़ाका या मसौदा बीजेपी ने तय्यार कर दिया आप उसपर
अमल पेरा होगी। भलें ही केजरी बोलते रहें हमारी
बीजेपी से कोई सांठ गाँठ नहीं है मोदी, अमित या योगी को कितना ही कोसते रहें दरअसल
यह सभी अंदर से मिले हुए हैं।
नाज़रीन एक बात वाज़े है जितनी भी हिन्दू दहशतगर्द तंज़ीमे बनी ख़्वाह सियासी हो या समाजी अगरतो उन्होंने इंसाफ़पसन्दी से काम किया है तो सरसब्ज़ होंगी नहीं तो तबाह और बर्बाद हो जाएगी।
कांग्रेस ने जिस तरह मुस्लिम हक़तल्फ़ी, नाइंसाफ़ी की थी झूट फरेब, दग़ाबाज़ी, धोकेबाज़ी का हर दम साथ दिया था आज वोह तंज़ीम अपनी आख़िर साँसे गीन रही है।
दरअसल देखा जाए तो कांग्रेस के निकलते हुए जनाज़े के लिए बाबरी की नाइंसाफ़ी और अफ़ज़ल भाई का Judicial Murder शामिल है।
बाबरी के साथ की हुई नाइंसाफ़ी आज कांग्रेस की ख़तम होने के पीछे एक एहम वजह है।
ना ही कांग्रेसी अपने इक़्तेदार के नशे में चूर हो कर सबसे बड़ी अक़लियती आबादी के हक़तलफ़ के मुजरिम बनते और ना ही आज कांग्रेस को अपने नुमाइंदों के जनाज़े कन्धों पर उठाने पड़ते।
बाबरी मस्जिद की शहादत के बाद सूबे शुमाल में फिर कभी कांग्रेस नहीं आई।
उसी तरह कांग्रेस को १९९२ के बाद १० साल तक मरकज़ में सियासी अछूत के जैसे अलहदा
रखा गया।
बिल आख़िर गुजिश्ता १० साल के लिए आई थी फिर वही नाइंसाफ़ी कर दी और किसी बहरूपिये काने दज्जाल बाबा और उसके चमचों संघी दहशतगर्दों बीजीपी वालों से ख़ौफ़ज़दा हो कर दहशतगर्द सुशिल कुमार शिंदे, दहशतगर्द प्रणव मुखर्जी ने सुप्रीम दहशतगर्द के साथ मिल कर मासूम बेगुनाह अफ़ज़ल गुरू का Judicial Murder कर दिया।
बस फिर किया था उनके क़तल से क़ब्ल जो कांग्रेस हुकूमत कर रही थी सीधे धड़ाम से ४५ पर आ टपकी।
वही हाल बीजेपी का हुआ है और वही हाल अगर आप ने नाइंसाफ़ी, हक़तल्फ़ी, झूट फरेब के साथ काम किया तो उसका होगा।
कियोंके यह तो इंसान मनहूस नामुराद है जो अपने इक़्तेदार या ताक़त के नशे में चूर हो कर नाइंसाफ़ी, सियहा सफ़ेद तमाम काले झाले करता रहता है लेकिन मालिके कायनात तो ज़र्रा भर नेकी का सिला इंसान को देता है और ज़र्रा भर गुनाह का कफ़्फ़ारा अदा करना होता है।
ख़ैर जो भी सच्चे ईमान वाले मोमीन होंगे वोह कांग्रेस के ज़ुल्म और क़त्ले आम से नहीं डरे बीजेपी के क़त्ले आम और तशददुत से नहीं घबराये तो आप के आला तरीन जदीद तशददुत से भी नहीं डरेगें।
जब तक आप हक़ और इन्साफ से काम करती रहेगी उसके साथ अच्छा होता रहेगा जहाँ उसने हक़ तलफ़ी की मुस्लिम अवाम के ऊपर हिन्दू शिद्दत को बेजा मुसल्लद किया तो होगा उसका भी हमारी अदालत में मुक़दमा दायर। फिर होगी पेशी और अगर आप का किरदार मशकूक रहा तो होगा उसका भी वाटोला।
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