Wednesday, 28 December 2022

यौमे जिन्ना धूम से मनाया, यौमे बाबर की करो तय्यारी।

अज़ीज़ नाज़रीन,

हर साल की तरह इस साल भी सहाफ़ी ने २५ दिसम्बर बड़े ही धूम धाम से बनाया।  अपने एहबाबों को मेरी क्रिसमस मुबारकबादी पैग़ाम दिए और जश्न मनाया।  दोस्तों की दावत पर मुर्ग़ मुसल्लम के साथ कबाब और मीठे का एहतेमाम किया गया था।  नाज़रीन २५ दिसम्बर को जश्न बनाने की सहाफ़ी के पास दो वजह होतीं हैं।  एक अपने हम ख़्याल हम वतन क्रिस्टी अवाम की ख़ुशी में शामिल होना दूसरा उस अज़ीम शख़्सियत को ख़िराजे अक़ीदत पेश करना, जिनकी दनिश्वरी, दूरअंदेशी की वजह से आज अज़ीम इस्लामिक रियासत जोहरी ताक़त बना और कुफ़्र, नाइंसाफों, कातिलों, इस्लाम दुश्मनों के लिए सबसे बड़ा ख़तरा। 

आज हिन्द में मुसलमानों के ऊपर होने वाले ज़ुल्म, नस्ल कूशी, नाइंसाफी, इज़्ज़ते नफ़्स का क़त्ल और इस्लाम पर हमले होने के सबब सबसे पहले वोही अज़ीम इस्लामिक रियासत मुस्लिम हुक़ूक़ की बात करती है।  मुस्लिम अवाम भी अब अपने हक़ और इस्लाम की बक़ा के लिए पाकिस्तान की ही जानिब देखने लगा है।  यह बात अलग है दौरे नबूवत की तरह अभी भी कुछ मुनाफ़िक़ हैं जो पाकिस्तान से लिल्लाही बुग्ज़, कीना रखते हैं और हर चंद कोसते रहतें हैं उनको अपनी बक़ा भारत के ना इंसाफ़, ज़ालिम, इस्लाम दुश्मन हाकिमों के अंदर ही नज़र आती है।  ख़ैर ऐसे मुस्लिम अवाम सिर्फ नाम भर के मुस्लिम होतें हैं उनको ना इस्लाम से कोई मतलब और ना ही पैग़म्बर की बेहुरमती से कोई सरोकार यह तो हैं ही काफ़िर  इनकी नमाज़े, इबादत, तिलावते क़ुरान सब बेकार हैं अगर इनके अंदर एक मुसलमान के दर्द का एहसास नहीं है और नबी सल्लम की बेहुरमती पर इनका ख़ून जोश नहीं मारता है तो यह काफ़िरों से मिले हुए हैं।  यह लोग वैसे ही हैं जैसा की पाँचों वक़्त नबी के पीछे नबवी शरीफ़ में नमाज़ अदा करने वाले, नबी की महफ़िल में बैठने वाले लेकिन उनके दिलों के ऊपर अल्लाह ने लानत की मोहर लगा दी थी। ऐसे ज़लील मुसलमानों की नबी सल्लम ने सिफ़त बयान की और  सूरे मुनाफ़ेक़ून नाज़िल की गई की यह मुसलमान नहीं बल्कि मुनाफ़िक़ हैं।

इस साल २५ दिसम्बर में दोहरी ख़ुशी का एहसास हुआ।  हर साल तो यह सहाफ़ी ही उस अज़ीम संत की सालगिरह का जश्न बनाता था इस साल उस जश्न में सऊदी अरेबिया भी शामिल हो गया।  नूर अला नूर।  सऊदी हुकूमत ने इस साल क्रिसमस सिलिब्रेशन का फैसला किया था।  बाज़ारों में क्रिसमस की धूम नज़र आई और ताजिरों ने अपनी दुकानों पर क्रिसमस ट्री सजाया।   शॉपिंग माल, दुकाने लाल रंग की पैराहन क्रिसमस केप से आरास्ता थी।

सऊदी की दारुल ख़िलाफ़त रियाद में  क्रिसमस की धूम देखी गई।  सऊदी के अज़ीम खबरनामे "दी अरब न्यूज़" में पहली दफ़ा क्रिसमस को ले कर एक ख़ुसूसी शुमार शाया किया गया था।    

उम्मीद है जिस तरह यौमे जिन्ना को क्रिसमस की तरह सऊदी और तमाम मुमालिकों में बनाया गया उसी तरह १४ फ़रवरी को यौमे बाबर को जश्न के साथ मानाया जाए। 

यह सहाफ़ी किंग सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ की अदलिया में दरखवात करता है। 

होलूविन हो गया, मुसलमानों और इस्लाम दुश्मन हिंदी सिनिमा चल गई, जुव्वे-मैख़ाने खुल गए, कुफ्रिया दरबार खुल गए, हिजाब हट गया, ख़ातूनों को अब बहार निकलते वक़्त मेहरम की पाबन्दी नहीं।  तो अब ख़ातून ऐ जन्नत हज़रते फ़ातेमा ज़ेहरा का मज़ार ऐ अक़दस बनाया जाए। जन्नतुल बक़ी में जितने भी सहाबा ऐ किराम मौजूद हैं उनके मज़ारात पर तहरीर किया जाए की यह किस सहाबा का मज़ार है।  हज़रते आयेशा का पोशीदा किया गया मज़ार वापिस से नमूदार किया जाए।  उम्मा को ज़ियारत का शर्फ़ बख़्शा जाए।

Zuber

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