Thursday, 24 August 2017

में साधू नहीं.... नैतिक हूँ

पिछले दिनों दो बड़ी रेल दुर्घटनाय हुई एक तो उत्कल एक्सप्रेस जिसमे कम से कम ४० से ५० लोगो के मारे जाने की खबर है और कम से कम १०० से ज़्यादा घायल होने की सम्भावना है. और दूसरी दुर्घटना कैफियत एक्सप्रेस जिसमे कम से कम ३० से ४० लोगो को मामूली चोटे और कुछ को गंभीर चोटे आई है. फिर भी सुरेश प्रभु ने अपनी नैतिकता समझी और उस आधार पे अपने पद से त्यागपत्र दे दियायहाँ ये बात बताता चलु के सुरेश प्रभु एक साधारण मनुष्य है कोई साधू संत प्रवचन देने वाले व्यक्तित्व नहीं है. दूसरी और साधू महाराज जो उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री के पद पे आसीन है अभी तक त्यागपत्र की बात तो छोड़ो त्यागपत्र शब्द तक उसकी ज़ुबान पे नहीं आया. ये वही साधू महाराज है जो नैतिकता की बाते करते है और संसार की मोह माया से अपने आपको अलहदा रखने की बात करते है और ये महाराज मोक्ष को पहुँच चुके है. फिर इनके उत्तर प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था, बच्चीओ के ऊपर रेप, महिलाओ के ऊपर गेंग रेप, हत्या, लूट, साम्प्रदाइक माहोल खराब, लवजिहाद के ऊपर विशेष समुदाय के बच्चो को प्रतारणा, ११ और १२ क्लास के विशष समुदाय के बच्चो के साथ बजरंग दल के आतंकिओ दोवारा मार पीट, गौ रक्षा के नाम पे मार पीट और हत्या ये सारे कुकर्म दिखाई नहीं देते और ये महाराज फिर भी अपने पद पे असिन है.

अभी कल ही लखनऊ में एक मनोज प्रजापति नामक युवक ने एक १२वी क्लास की बच्ची के साथ छेड़ खानी की और जब उस बच्ची ने प्रतिकार दिखाया तो उसने तलवार ला के पहले बच्ची को खूब भगाया फिर उसका हाथ ही काट डालाइतना सब होते हुए पब्लिक भी तमाश बीन बन के देखती रही. बच्ची अपने आपको बचाने केलिए लोगो से फर्याद करती रही इधर उधर जान बचाने के लिए भागती रही लेकिन इतनी भीड़ में से किसी ने उसकी मदद नहीं की और जब मदद की तब तक उसके ऊपर जान लेवा हमला हो चूका था और उसका हाथ काटा जा चूका था.

इतना ही नहीं पिछले सप्ताह मस्तिष्क बुखार के चलते कुछ ७० बच्चो ने अपनी जानगवा दी फिर भी ये साधू महाराज पद पे बने रहे और नैतिकता के आधार पे दो बेगुनाहो को बलि चढ़ा दी. इस बलि प्रथा में शहीद होने वाले डॉक्टर कफील भी शामिल है क्योकि साधु महाराज के आदेश के ऊपर उनकी भी बलि दी गई थी.

क्या कानून व्यवस्ता का सुचारु रूप से निर्वाह करना एक मुख्य मंत्री की ज़िम्मेदारी नहीं है. क्या बिगड़ती हुई कानून विवस्था को देखते हुए मुख्य मंत्री नैतिक ज़िम्मेदारी नहीं ले सकते और अपने पद से इस्तीफे की पेशकश नहीं कर सकते. कर सकते है बिलकुल कर सकते है, लेकिन अगर उनमे नैतिकता हो तोयहाँ तो मलाई खाने के पीछे होड़ लगी हुई है. मोदी से लेकर योगी तक सब एक ही हम्माम ने नंगे है सभी को एक दुसरे की कमिया, खामिया खूब मालूम है तो नैतिकता की कौन बात करेगा.

दूसरो को नैतिकता की शिक्षा देंगे लेकिन खुद उसपे अमल नहीं करेंगे. मोदी मुस्लिम महिलाओ की चिंता करते है और उनको उनका हक़ दिलवाना चाहते है और खुद अपनी ब्याहता को छोड़ के बैठे है. तलाक शुदा मुस्लिम महिलाओ के भरण पोषण की फ़िक्र है लेकिन जिनके पति गौ आतंकिओ के हमले में मारे गये उनकी कोई सुध नहीं. ठीक हे, आगे से ऐसे हमले हो कोई और लड़की बेवा, कोई और बच्चा यतीम और किसी माँ की कोख नहीं उजड़े उसके ऊपर क्या पेश बंदी की है मोदी ने. तो नैतिकता दूसरो के लिए है जहा अपना मफ़ात घायल होता दिखे आखे, कान बंध कर लो.

तो अब में सभ्य समाज से एक बात तो ज़रूर पूछना चाहूँगा कौन सच्चा नैतिक इंसान हे एक साधू जो इतनी हत्याएं, डकैती, लूट, बलात्कार, साम्प्रदाइक सौहार्द बिगड़ने की भरपूर घटनाए होति है और फिर भी वो अपने पद पे बना रहता है या एक साधारण इंसान जो एक हादसे की ज़िम्मेदारी अपने ऊपर लेता है और नैतिकता के आधार पे अपने पद से इस्तीफा दे देता है.

जुबेर एहमद खान
पत्रकार


No comments:

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...