Sunday, 20 August 2017

मोहम्मद समी को सताती है अपने परिवार की चिंता......

मोहम्मद समी क्रिकेटर डर और खौफ के साय में जीने को मजबूर है.  जब वो क्रीकेट दौरे पे भारत से बहार जाते है तो उनको उनकी पत्नी और बेटी की बड़ी चिंता रहती है. असल में पिछले महीने उनका एक हिन्दू परिवार से गाड़ी पार्क करने को लेकर कहा सुनी हो गई थी और उसके बाद उस हिन्दू युवक ने किसी सरकार फेमिली के साथ मिल के समी के साथ धक्का मुक्की भी की थी. जिस वक्त य सारा मामला हो रहा था  उनकी पत्नी और बच्ची गाड़ी में मौजूद थी. फिर बच्ची दहाड़े मार मार के रोने लगी और बेहद ख़ौफ़ज़दा हो गई.


इस हादसे को एक महिले के ऊपर हो गया है लेकिन अभी तक वो बच्ची इस हादसे से उभर नहीं पाई है. समी कहते है के कभी भी सरकार फेमेली उनकी पत्नी के साथ बदतमीज़ी कर सकती है तथा कभी भी उनके परिवार के ऊपर हमला कर सकती है.  वो जब विदेशो के दौरे पे रहते है उनको उनके परिवार की हमेशा चिंता रहती है इसीलिए वो अपने गेम पे कंसन्ट्रेट नहीं कर पा रहे है.


ये अकेले समी की कहानी नहीं है बल्कि हर वो इंसान जो मुसलमान है उसके साथ यही होता है. मोहम्मद अज़हरुद्दीन, शाहरुख खान, सलमान खान, आमिर खान, असदुद्दीन ओवेसी, अकबरुद्दीन ओवेसी, आज़म खान, मौलाना बरकाती, अबू असीम आज़मी, इम्तियाज़ जलील, वारिस पठान, मौलाना बुखारी, मौलाना तौसीफ रज़ा, हामिद अंसारी, फ़िदा हुसैन, नदीम सैफी, ज़ाकिर नाइक अगर नाम लेने निकलूंगा तो १९४७ से ले कर आज तक का जितना वक्फा हिन्दू लोगो ने सिर्फ भारत भारत चिल्लाने में बर्बाद किया हे अगर उसका आधा हिस्सा भी भाई चारे में लगाते तो देश की हालत और कुछ होती.


ऊपर लिखे लोग तो सिलेब्रेटी है और उनके साथ ऐसा व्यवहार फिर भारत की जनता और बीजेपी के कारकून कहते फिरते है के भारत एक ऐसा वाहिद देश है जिसमे सभी धर्मो के लोग आपसी भाई चारे के साथ रहते है. भारत सहनशीलता की विश्वविद्यालय हे. झूट बोलते है ये लोग महज़ फेकम पोल करते हैसही देखा जाय तो हर मुलसमान हिन्दू आतंकवादीओ से ख़ौफ़ज़दा है और यही बात में अपने बोहोत से आर्टिकल्स, डिबेट और मेसेजेस में कह चूका हूँकुछ हिन्दू आतंकिओ से मेरी जब बहस होती है तो वो मुझे कहते है के हिन्दू आतंकी कैसे हो गए इसका एक भी उद्धरण दो. तो उनको में पहले भी कई बार अपने आर्टिल्स के ज़रिये जवाब दे चूका हूँ और फिर कहता हूँ. आतंकवाद की भारत में या ताजिराते हिन्द में ऐसी कोई सामान्य शब्दावली नहीं है लेकिन यूनाइटेड नेशन ने इस शब्द के ऊपर स्कल्प लिया हुआ है. अगर किसी देश में नॉन स्टेट एक्टर्स किसी भी ख़ास समाज को लगातार डर के माहौल में रखे, उनकी इज़्ज़त का खतरा हर दम बना रहे, उनको रोज़ी रोज़गार करने से रोका जाय, उनके बच्चो को पढ़ने से रोका जाय, तथा बहुसख्यक समाज अल्पसख्यक समाज का राजनीतिक बहिष्कार करे या सदन में उनके प्रतिनिधित्व को नहीं आने दे तो ये सभी आतंकवाद की श्रेणी में आते है.  तो जिस तरह से भारत देश विश्व में एक वाहिद ऐसा देश है जिसमे ये सभी श्रेणियाँ साबित होती है और उससे ये भी साबित होता है के भारत में हिन्दू आतंकवाद है.


यहाँ तक के अब तो पत्रकारो और जौर्नालिस्टो को भी अपने मुसलमान होने की वजह से पड़तड़ना का एहसास होने लगा है और डर खौफ के साये में जीना पड़ रहा है जिसका में ज़िक्र कई बार अपने आर्टिकल्स में कर चूका हूँ और जिसकी शिकायत पुलिस कमिश्नर नवी मुंबई को २०११ से लेकर तीन चार बार कर चूका हूँ. मेरे ऊपर भी कई हमले हुए कभी एक्सीडेंट के नाम पे कभी ज़ुबानी कहा सुनी.  फिर अगर हामिद अंसारी साहब ये कहते हे के भारत का मुसलमान डर और खौफ के साये में जी रहा है तो क्या गलत कहते है.  जो कैफियत मोहम्मद समी ने ज़ाहिर की वही कैफियत मेरी रहती हे मेरे परिवार के प्रति, जब तक में ऑफिस से घर नहीं पहुँच जाता.  ये हालत तो पड़े लिखे मुसलमानो की और सिलिबरटीएस की है तो इस बात से अंदाज़ा हो जाता है की नार्मल मुसलमान या लेबर क्लास मुसलमान किस हद तक पडतडित किया जाता होगा. 


No comments:

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...