Tuesday, 22 August 2017

मुसलमानो से एक अपील,

उच्चतम न्यायलय ने तीन तलाक़ महीनो के लिए रद्द कर दी लेकिन मुसलमानो का ज़मीर नहीं रद्द किया है इस्लाम का फलसफा नहीं रद्द किया है. अब बड़ा सवाल ये उठता है के क्या कोई भी हिन्दू इस्लाम के कानून को तब्दील कर सकता है. जिस उच्चतम न्यायलय के फैसले को संघी आतंकवादी मोदी, अमित और उनके हामी सही बता रहे है और मुस्लिम महिलाओ को आज़ादी करार दे रहे हे तो उनको एक फिर से हिदायत दे रहा हूँ. कानून बोहोत बनते हे लेकिन उससे समाज में सुधार तो नहीं दीखता. पोस्को कानून बना जिसमे नाबालिग के ऊपर रेप करने वालो के ऊपर सख्त सजा का प्रावधान है लेकिन आतंकी सरगना मोदी खुद देख ले के पोस्को कानून बनने के बाद भी कितने नाबालिगों के साथ रेप हुए. अभी १६ अगस्त को ही एक संघी आतंकवादी ने केरल में एक १६ साल की लड़की को अगवाह किया और उसका रेप किया. उसी तरह से उत्तर प्रदेश पिछले महीने एक १२वि क्लास की हिन्दू लड़की को खूखार आतंकी संघटन बीजेपी के जिला प्रधान के लड़के ने गाला रेत के हत्या कर दी क्योकि वो उस लड़की से एक तरफ़ा प्यार करता था.


क्या बाल विवाह पे कानून नहीं है फिर भी राजिस्थान, हरयाणा में बाल विवाह धड़ल्ले से होते है. अप्रैल, मई, जून के महीनो में मुझे हर एक महीने एक विडिओ मिलता था लड़का और लड़की दोनों बालिग़ और अग्नि के समक्ष फेरे ले रहे है और पंडित दोनों की मदद कर रहा हे. एक विडिओ में तो सामूहिक बाल विवाह का वीडियो आया जिसमे बच्चिया रौ रही है और बच्चे इधर उधर देख रहे है फिर उस सभी की अग्नि के समक्ष फेरे होते हे और पंडित मदद करता है.

क्या दहेज़ प्रथा पे कानून नहीं हे फिर भी हिन्दू समाज में दहेज़ या लेन देन के बगैर शादी ही फिक्स नहीं होती. अब मुस्लिम धर्म गुरुओ को इस फैसले का तोड़ निकलना होगा और शरीयत और इस्लाम को ज़िंदा रखना होगा. हम नहीं मानते कसी भी कानून को हमारे मज़हबी अक़ाइद में सिर्फ इस्लाम का कानून हमारे लिए सर्वपरि है किसी देश का नहीं.

तो असली तकलीफ तो अब शुरू होगी जो महिलाये सच्ची इस्लाम और शरीयत की पेकर हे और अगर उनको उनके शोहर ने तीन तलाक़ दे दी तो वो हरगिज़ उस शोहर के घर में नहीं रुकेगी. क्योकि उनको इस्लामिक फलसफा मालूम है अगर वो फिर भी रूकती है तो वो हराम करती है और उनसे पैदा होने वाली नस्ल हराम होगी के जाइज़. दूसरी बात एक मिलिट्री अफसर को दाढ़ी रखने के ऊपर भारतीय फौज से ससपेंड कर दिया गया था. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा फिर कोर्ट ने कहा के तुम मिलिट्री में दाढ़ी नहीं रख सकते ये हमारा फैसला है इसको तुमको मानना ही पड़ेगा. तो उस मिलिट्री अफसर ने सुप्रीम कोर्ट के आर्डर की ऐसी की तैसी कर दी और उस आर्डर की धज्जिया उड़ा दी उसने उसी वक़्त भारतीय फौज से इस्तीफा दे दिया और अपनी लाबी दाढ़ी के साथ हर बार सुप्रीम कोर्ट के सामने प्लीडिंग में हाज़िर हुआ . जिसको देख के सुप्रीम कोर्ट खुद शर्मिंदा हो गया और कुछ नहीं कर सका.

दूसरी बात अगर शौहर ने बिल फ़र्ज़ तीन तलाक़ दे दी और उस महिला को घर से धक्के दे कर निकाल दिया तो ऐसी सूरत में कोर्ट ज़बरदस्ती कैसे दोनों को एक साथ रहने के लिए बाध्य कर सकता है. तीसरी बात जो महिलाय टीवी पे आँसू बहा रही है जिनका इस मसले से कुछ भी ताल्लुक नहीं था फिर भी खुशिया बना रही है तो अगर शोहर ने ट्रिप्पल तलाक़ दे दिया और घर से भाग गया तो ऐसी सूरत में क्या होगा. एक नजीब को तो पुलिस हाई कोर्ट के निर्देश के बावजूद नहीं तलाश कर पाई तो किया ऐसे शोहरो की तलाश कर पाएगी जो तलाक़ दे कर घर से भाग गए. ये जो महिलाये टी.वि. के सामने रोने का नाटक कर रही है उनमे से एक तो सोशल वर्कर है दूसरी तवायफ इन दोनों का एक पत्रकार होने के नाते इतिहास मालूम है. पैसे लेकर ये अपना ईमान और सब कुछ बेच देती हे.

तो मोदी, अमित, संघी आतंकिओ, बीजेपी और उच्चतम न्यायलय तुम्हारे कानून बनाने से क्या होगा मुसलमान वही करेगा जो उनके धर्म गुरु कहेगे. क्या पोटा और टाडा कानून आतंकवादी घटनाओ को रोक पाए थे. क्या पोटा और टाडा जैसे कड़क कानून होने के बावजूद भी आतंकवादी हमले नहीं हुए. तो न्यायलय खुद अपनी फजीती करवाएगा. क्योकि मुसलमान अपने मज़हब और शरीयत से सबसे ज़्यादा प्यार करता है और उनको किसी हिन्दू राष्ट्र का क़ानून या सविधान शरीयत में मदाखलत करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता.
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