Tuesday, 30 April 2024

चीन का बढ़ता रूतबा, ज़ाफ़रानी दहशत की वजह से भारत का ज़वाल।

अज़ीज़ नाज़रीन, 

ज़ाफ़रानी दहशत, नाइंसाफ़ी, क़त्ल ए आम, बदनज़मी और मोदी की दरन्दगी तानाशाही की वजह से भारत की साख को आलमी हल्क़े में शदीद बट्टा लगा है और भारत का ना सिर्फ़ इज़्ज़त और विकार में बल्कि हर मुद्दे पर तेज़ी से ज़वाल देखा जा सकता है।  

हाल ही के कुछ सालों में ख़ास २०१९-२० से भारत के ना सिर्फ़ तिजारती बल्कि सिफ़ारती रिश्ते भी बेनक़वामी सतह पर काफी कशीदा हुए हैं।  आज की तारिख में कोई भी मुल्क भारत के अशियात को क़ुबूल नहीं कर रहा है।  उनको वापिस लौटा दिया जा रहा है। 

जिस हिसाब से ज़ाफ़रानी महाज़ ने २०१९ में मुतलक़ अक्सरियत हासिल की थी उसका भर पूर फ़ायदा भारत बेन अक़वामी हल्क़े में उठा सकता था।  लेकिन जब वतन की सरपरस्ती एक जाहिल अदना काम करने वाले ऐसे शख़्स के हाथों में होगी जो ज़हर की काश्त करने अक़लियतों ख़ास मुसलमान, क्रिस्टी और सिखों से नफ़रत और पड़ोसी मुल्कों की ज़मीन पर जंग का ख़ौफ़ दिखा कर क़ब्ज़ा करने की ज़ेहनियत रखता होगा तो तमाम आलमी बरादरी में ऐसे मुल्क की मट्टी पलीद होना लाज़िम होता है।    

भारत में बढ़ती हुई मिलावट की वजह से भारत में तय्यार शुदा अशिया और खाने पीने के सामान को आलमी मुमालिक रिजेक्ट कर रहें हैं।  जिसकी वजह से भारत के बेरुन मुल्क फंड में ज़बरदस्त ज़वाल देखा गया है।  मिलावटी और दुसरे तीसरे दर्जे के खाने पीने के सामान बनाने वाली कंपनियों पर भारत की हुकूमत की जानिब से कोई भी हिकमत ए अमली ना करना ज़ाफ़रानी ताजिरों का अपने खाने पीने के सामान में गाये के पेशाब पख़ाने का मिलाना क्रिस्टी और मुस्लिम मुमालिकों में भारत के खाने पीने के सामान को वापिस करने की बड़ी वजह रही है। 

यह बात महज़ भारत को तिजारती अलहदा करने तक महदूत नहीं रही बल्कि २०१४ के ज़ाफ़रानी ग़ुलाम भारत को आलमी हल्क़े से आहिस्ता आहिस्ता अलग थलग किया जाने लगा।  तिजारती सिफारती अलहदगी के बाद भारत में बढ़ती हुई बदअमनी, ज़ाफ़रानी दहशत की शिद्दत पसंदी के चलते भारत में मुक़ीम कई बेरुन मुल्क कपनीज़ ने अपनी तिजारत को बंद कर दिया।  हर मुद्दे पर ज़ाफ़रानी इन्तेहापसन्द हिन्दू अवाम के मज़हबी जज़बात टूट जाते थे।  कम्पनीज़ पर दहशगर्द हमले ज़ाफ़रानी परचम लगाने की ज़िद्द, गाये के पेशाब पख़ाने की नुमाइश, नाग, पत्थर, पानी हवा को पूजने की ज़िद्द कपनीज़ में चर्च या मुस्लिम अवाम के लिए नमाज़ का एहतेमाम करने पर कम्पनीज़ के मुलाज़िमों और आला ओहदेदारों को हर वक़्त अपनी जान का ख़तरा रहता था।  बेरुन मुल्क ज़्यादातर कम्पनीज़ क्रिस्टी मुल्कों के ताजिरों की होती हैं हिन्दू इन्तेहापसन्द अपने मज़हब की रिवायत जब उनके ऊपर थोपेंगे, नहीं मानने की सूरत पर उनको उनके मुलाज़िमों पर तशद्दुत करना मार पीट करना यहाँ तक जान से मार डालना उसके ऊपर भारत की हुकूमत की ख़ामोशी के चलते भारत के अवाम को आला तन्ख़्वाह देने वाली तमाम बेरुन मुल्क कम्पनीज़ या तो पाकिस्तान चली गई या चीन।   ऐसे ही यह शिद्दत पसंद हिन्दू अपने ही मुल्क की अर्थ व्यवस्था को तबाह करने और बेरोज़गारी बढ़ाने में बड़े कारसाज़ साबित हुए।

२०१४ के बाद कोई भी बड़ी बेरुन मुल्क कंपनी भारत में अपनी सरमायाकारी नहीं की है।  अब तो इस देश की क़िस्मत मे तबाही ही लिखी जायेगी।  यहाँ तक हालात ऐसे हो गए जो अवाम कभी बड़ी बड़ी कपनीज़ में मुलाज़िम थे वोह ८०% वाले अवाम किलो सरकारी ख़ैरात पर ज़िंदा है।  अभी तो इन ८०% को भीख मागते हुए देखेगें दुनियाँ वाले।   कियोंके अभी भी ज़हर का पैमाना लबरेज़ है।  हिन्दू मुस्लिम से ऊपर ना ही बीजेपी के सियसतदाँ उठे हैं और ना ही यह ८०% वाले।  २०% वाले तो जैसा पहले थे वैसा ही अभी हैं।  उनके अंदर कोई तबदीली नहीं आई लेकिन इन २०% को बर्बाद करने के चक्कर में ८०% तबाह और बर्बाद हो गए। 

नाज़रीन अब तो हो ऐसा रहा है बेरुन मुल्क सफ़ीर और सदर भारत को ज़लील कर रहें हैं।  इसी साल जनवरी २०२४ को फ्रांस के सदर एमुअल मेक्रो भारत के दौरे पर आये थे, मोदी हस्ब आदत ज़ाफ़रानी बातें और हिंदुत्व की तरफ़दारी करने लगा और उनको गीता तोहफे में दी।  हालांके  सदर मेक्रो आये तो भारत के योम जम्हूरिया में बतौर मेहमान ख़ुसूसी लेकिन वोह निज़ामुद्दीन ओलिया के आस्ताने पर चले गए। क़व्वाली सुनी और घंटों बैठे रहे।   यह वैसा ही है जब मोदी जापान गया था उसने शिंज़ो अबे के लिए भारत से भगवत गीता का तोहफा ले कर गया।  आज जापान में इस्लाम सबसे तेज़ी से फ़ैलने वाला मज़हब है। 

मोदी और यह भगवा वायरस अपनी गलीज़ और गंदी करतूतों की वजह से हर ख़ित्ते में सामाजिक, माशी और सियासी अछूत के जैसे तस्लीम किये जा रहें हैं।  खबर थी के ट्वीटर के सर्वे सर्वा और तिसला मोटरस के चीफ़ एग्जीक्यूटिव  एलान मास्क भारत रहें हैं।  फ़िर यकायक उन्होंने अपना भारत का दौरा केंसल कर के चीन की जानिब रूख़ किया।  जी हाँ नाज़रीन यह वही चीन है जिसने मोदी नाम के इस ज़ालिम दरिंदे को ख़ूब रगड़ा है और चीन महान,  पाकिस्तान का नाम आते ही मोदी, बीजेपी, शिद्दत पसंद हिन्दू और संघी दहशत को बुख़ार आने लगता है। ऊल जलूल बकवास करतें हैं एक दिन आज़ाद कश्मीर भारत का होगा अगर भारत मे टेस्ला की कंपनी खुलती तो रोज़गार पैसा भारत को सब मिलता।    

नाज़रीन जिस ख़ालिस्तान, शरिया और हलाल से इन ज़ाफ़रानी वायरस के ज़ालिमों को अंगार लगती है उस ही ख़ालिस्तान की हिमायत कनाडा के बाद अब अमेरिका भी आ गया है।  अमेरिका में ख़ालिस्तानी सियसतदांओं को मोदी के इशारे पर ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों रॉ के एजेंटों ने मौत के घाट  उतारा है। 

वहीँ कनाडा के वज़ीर ए आज़म हलाल बैंकिंग और शरिया के उसूलों में तवज्जो दे रहें हैं।   इस साल के बजेट में उन्होंने मुस्लिम अवाम के लिए हलाल मॉर्गेज लोन देने का एलान किया है।  वहीँ भारत में मस्जिदों, मदरसों को तबाह कर उनकी ज़मीन हड़प ली।  मुस्लिम अवाम को तबाह करने के क़ानून बनाये गए उनकी ज़मीनें, बंगले महल सब पर बेदर्दी से बिलडोज़र चला दिया गया। 

अब्दुल की बद्दुआ बोहोत सख़्त होती है जिस जिस मुल्क या शख्स ने अब्दुल की बद्दुआ ली वोह मुल्क और शख़्स बर्बाद हो गया इस बर्बादी में बर्मा, इजराइल के बाद भारत का ही नंबर है।  और जिस ने दुआ ली इंसाफ़ से काम किया उनका जो हक़ है उनको दे दिया अब्दुल की हक़तल्फ़ी ना की वोह मुल्क और शख्स सरसब्ज़ और शादाब हो गया। 

सहाफ़ी ज़ुबेर

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