Friday, 5 April 2024

इजराइल और ईरान के दरमियान जंग का ख़तरा बढ़ा।

मोहतरम आली जनाब

मौलाना क़ल्ब जव्वाद साहब

मुस्लिम मज़हबी रहनुमा और दानिशमंद

लखनऊ सूबा शुमाल

 

अज़ीज़ मौलाना साहब,

 

इजराइल की जारिहाना दहशत से ग़ाज़ा तो तबाह हो चूका है, अब उसकी ग़लीज़ और गंदी नियत इस्लामिक ममलेकत ईरान की जानिब हैं।  अभी दो रोज़ क़ब्ल सीरिया में ईरान के सिफ़ारात ख़ाने पर मिसाइल हमला करने के बाद  बोहोत मुमकिन है की एक दो रोज़ के अंदर इजराइल की दहशत का आगाज़ ईरान की जानिब हो जाए।  

इससे क़ब्ल अक़वाम मुत्तहिदा की जानिब से मज़लूम ग़ज़ा के मासूम बच्चों और ख़ातूनों को खाना फ़राहम करने वाली टीम पर मिसाइल हमले में बेरुन मुल्क अफ़राद हलाक हुए थे। 

आपसे, हिन्द में आपके हमख़याल तमाम मौलानाओं और बोहरी उलेमाओं से गुज़ारिश है की वोह ज़ाफ़रानी हुकूमत से पुर ज़ोर तरीक़े से कहें  की इजराइल अपनी जारिहाना दहशत को फ़ौरन बंद करे नहीं तो हुकूमत हिन्द उसका सिफ़ारत ख़ाना बंद कर देगी और जंग में इजराइली दहशत के ख़िलाफ़ फौज उतारेगी। 

हिन्द में इंतेखाब होने वाले हैं अगर हुकूमत हिन्द इजराइल के ख़िलाफ़ फौजी हिकमत करती है तो हमारी पूरी कम्युनिटी का वोट आपको मिलेगा नहीं तो हम आपको वोट नहीं करेगें। 

मोदी हुकूमत की ईरान के सिफारातखाने पर इसरायली दहशतगर्द हमले की मज़्ज़म्मत काफी नहीं है इजराइल से तमाम ताल्लुक़ तोड़ने होंगे।  अगर इजराइल का हमला ईरान पर होता है और मोदी हुकूमत खामोश तमाशबीन बन कर एक और इस्लामिक मुल्क की तबाही देखती रहती है तो लखनऊ, शुमाल और तमाम हिन्द से किसी भी शियाबोहरी मुस्लिम को मोदी और बीजेपी को वोट नहीं करना चाहिए। 

दूसरी बात मोदी इन्तेज़ामियाँ ईरान को ख़ामोश रहने की तरग़ीब करेगा कियोंके वोह नहीं चाहता है की उसके ताल्लुक़ात इजराइल की दहशत से कशीदा हों।  ईरान को अपने नुकसान का पूरा बदला लेने का हक़ है।  जब इजराइल ने ईरान के सिफ़ारात ख़ाने पर हमला किया था तब उसको सोचना चाहिए था की जंग का तीसरा मरहला खोलने से नुकसान किस को ज़्यादा होगा।  यह जंग आलमी जंग की जानिब गामज़न हैं। 

सहाफ़ी ज़ुबेर

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