अज़ीज़ नाज़रीन
मुसलमानों की हिंदुस्तान से मोहब्बत के नतीजे मिलने लगे हैं। मुसलमानों की हर महाज़ पर ज़लालत, उनसे नफ़रत, उनका क़त्ल ए आम, उनके घरोंदों रोज़गार की तबाही उनकी हक़तलफ़ी उनके नौवजवानों की गिरफ्तारी इंसाफ़ की इबादत गाह अदालतों से उनकी हक़तल्फ़ी जग ज़ाहिर है। फ़िर भी यह मुसलमान है की अभी भी पाकिस्तान की तोहसीह करो यह हक़ बात कहने से ख़ौफ़ज़दा है। हमें तो हिंदुस्तान से मोहब्बत है। यह मोहब्बत नहीं है बल्कि तुम्हारा ख़ौफ़ है और अंधी अक़ीदत है (अंध भक्ती)। जब ज़ालिम तुम्हारी नस्लों को काटना शुरू कर दे और तुम फ़िर भी उससे हुस्ने सुलूक की तवक़्क़ो रखो तो वोह उस ज़ालिम से मोहब्बत नहीं बल्कि तुम्हारी बेवकूफी और अंधी भक्ति है।
मेरी तालिबान पर लिखी हाल ही की नज़म तालिबान आया तालिबान आया ज़ाफ़रानी घबराया पर कुछ हूकूमती नुमाइंदों ने सख्त एतेराज़ दर्ज किया है।
मेरा सवाल उन्ही तन्क़ीदी अवाम से है तालिबान को २०० करोड़ की इमदाद किस ने दी थी। जिसके ऊपर मेने मज़मून लिखा है मुग़लों के बाद अब आये तालिबान। अपने ही वतन के अक़लियती वज़ारत ख़ाने का बजट ४०% कम कर के तालिबान को इमदाद फ़िर किस बुनियाद पर बीजेपी भारत के मुसलमानों से मोहब्बत का दम भरती है।
आज मुस्लिम अवाम को पीट पीट कर डरा डरा कर उस हद तक ग़ुलाम बना दिया गया है उससे भारत की एक और तक़सीम तो दूर पाकिस्तान की तोहसीह या अपने हक़ के बारे में भी बोलने में ख़ौफ़ होता है।
जिस मुस्लिम अवाम को एवान में भड़वा कटुआ मुल्ला आतंकवादी ज़रा मिल बहार बताता हूँ ऐसी धमकियां दी जा रही हैं उसी मुस्लिम अवाम की महिलाओं से हुस्ने सुलूक की तवक़्क़ो रखती है बीजेपी। अब में उन मुस्लिम ख़वातीनों से पूछना चाहता हूँ जो बीजपी और संघ के दिए हुए चंद टकों पर अपने ईमान का सौदा कर के इस्लाम मुसलमानों के खिलाफ बयान बाज़ी करती थी मोदी योगी को राखी पेश करती थी क्या वोह तवायफ़े हैं। और उनके शोहर, वालिद, भाई उनके लिए भड़वा गिरी कर रहें हैं। अगर नहीं तो जवाब दो। इस ज़ालिम पार्टी के गुंडे ट्रोलर ने एवान में एक मुस्लिम नुमाइंदे को कैसे भड़वा कटुवा कहा।
मुसलमानों
से हर मुद्दे पर भारत से मोहब्बत की उम्मीद की जाती है और जब उनके हक़ की बात आती है
तो उनके साथ हक़तल्फ़ी की जाती है। हरयाणा के
नोह, तमाम उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश का खरगोन, आसाम वहां से मुस्लिम बस्तियों
के ऐसे उजाड़ा है जैसे किसी ज़ालिम दुश्मन ने फ़िज़ाई हमला कर के बम गिराया दिया हो। पूरी पूरी मुस्लिम बस्तियाँ एक दो किलोमीटर नहीं
बल्कि १० और १२ किलोमीटर मट्टी का ढेर बना दी गई हैं।
मुस्लिम नामो निशाँ मिटा दिया गया है अब वहां मुस्लिम बस्ती के नाम पर सिर्फ राख का ग़ुबार, गर्द और तबाही का ढेर बचा है। फ़िर भी मुस्लिम सियासत है की हिंदुस्तान से मोहब्बत का दर्स दे रही है और उनको देख कर उनके पैरोकार उनसे दो क़दम आगे निकल कर हिंदुस्तान की मोहब्बत में पाकिस्तान को कौस रहें हैं, हिंदुस्तान हमारा वतन है हम यही रहेगें यही मरेंगे और इसी मट्टी में दफ़न होंगे।
हम कहाँ कह रहें हैं की पाकिस्तान की मट्टी में जा कर दफ़न हो लेकिन तोहसीह की बात तो कर सकते हो। जब ज़हर की मिक़्दार इतनी बढ़ गई है की सदन, अदालत, सदर ए जमुहरिया तक उसकी की तपिश पहुंच गई है तो अब मज़ीद किसी से हुसने सुलूक की उम्मीद रखना बेवक़ूफ़ी है।
इंसाफ़
देने वाला ही नाइन्साफ़ हो जाए तो अब तुमको ऐसे ही दुसरे और तीसरे दर्जे में जीना पडेगा
और अपनी नस्लों को ऐसे ही ज़लील होते देखना पड़ेगा।
या नहीं तो जो तुम्हारा हक़ है उसको ज़ालिम से छीन लो।
तालिबान को २०० करोड़ की मदद देने में भारत सरकार की मंशा पर सवालियां निशाँ हैं। जिसका ख़ुलासा अगले मज़मून में करूंगा। वोह २०० करोड़ दहशत को फ़रोग़ देने के लिए दिए गए थे ना की एक हमसाये की मदद की निस्बत से दिए गए थे। नियत गलीज़ थी अब तकलीफ भोग रहा है भारत। जिसका ज़िक्र ऊपर लिखे तालिबान को मदद दिए जाने वाले मज़मून में किया जा चूका है।
सहाफ़ी
ज़ुबेर
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