अज़ीज़ नाज़रीन,
आज
का मज़मून दो कहावतों में थोड़ी तरमीम कर पेश करने की इजाज़त चाहूंगा।
१.
अब आया है लंगूर पहाड़ के नीचे,
२.
लंगूर के मुँह में अंगूर:
इंडिया महाज़ के लंगूर लँगूरनियों की ख़ास जमात के बहिष्कार से ज़ाफ़रानी चिड़ियाघर (मीडिया) के लंगूर और लँगूरनियाँ ज़बरदस्त बिलबिला गए हैं। ऐसे तमाम लांगूर और लँगूरनियों को हुकूमत तब्दील होते ही जेल में ठूसना चाहिए और फांसी की सज़ा देनी चाहिए। कियोंके इन लंगूर लँगूरनिओं की ग़द्दारी और मोदी हुकूमत की हर ग़फ़लत ख़िलाफ़ ए दस्तूर अमल पर भी सवाल ना पूछने की वजह से ही भारत का ज़वाल हुआ।
यही भारत के साथ ग़द्दारी है। मोदी और बीजेपी वालों का जो होगा सो होगा लेकिन सबसे पहले इन ग़द्दार लंगूर लँगूरनिओं को चुनचुन कर इनके घरों से निकाल कर जेल में ठूसना होगा और भारत की शिनाख़्त, सालमियत और बाहमी भाईचारगी के ख़िलाफ़ जंग की साजिश का केस चलाना होगा।Waging war against Country. जिसका सबूत २०१९ अप्रैल में वोह इन्तेख़ाबी तजज़िया था जिसमे चित्रा त्रिपाठी, अंजना ॐ, स्वेता सींग, रूबिका लियाक़त और कई दुसरे लंगूर इन्तेख़ाब को एक जंग जैसे पेश कर रहे थे।
फिर मोदी को एक जंगी फौजी की तरह हाथ में तलवार लिए घोड़े पर और राहुल को दूसरी तरफ दिखाया गया था। उस तज्ज़िया को नाम दिया गया था "धर्म युद्ध"। अब यह समझमे नहीं आ रहा है की वोह धर्म युद्ध किस के ख़िलाफ़ था। दोनों कांग्रेस और बीजेपी हिन्दू पार्टी हैं और भारत की ही हैं। दूसरी बात जब नतीजे आना शुरू हुए तो यहीं लँगूरनियाँ ज़हरीली नगीने किसी भी मुख़लिफ़ नुमाइंदे की शाकिस्त को ऐसे बोल कर बयान करती थी "यह देखिये दुश्मन का एक और फौजी हलाक हुआ, दुश्मन का एक और क़िला भाजपा के क़ब्ज़े में हुआ" उसके ऊपर पेनल में मौजूद एक सहाफी ने एतेराज़ भी दर्ज किया था। आप कैसे दुश्मन अलफ़ाज़ का इस्तेमाल कर रही हैं और मुख़लिफ़ कैसे भारत का दुश्मन हो गया दोनों ही तंज़ीमे भारत की हैं और इन्तेख़ाबी मरहले का हिस्सा हैं। मुख़लिफ़ भी दस्तूर के हिसाब से इन्तेख़ाब में हिस्सा ले रहें हैं।
भाजपा के बोये हुए इस ज़ाफ़रानी ज़हर को ख़त्म करने की पहली क़िस्त वही होगी ज़हरीले लंगूर और लँगूरनिओं को ख़तम किया जाए। और आला तरीन सहाफ़ियों को पेनल में जगह मिलनी चाहिए जो नई हुकूमत से सवाल पूछे। जैसे अभिसार शर्मा, साक्षी जोशी, प्रज्ञा मिश्रा, रविश कुमार, संदीप चौधरी और बोहोत से नाम हैं नई सरकार खुद ही फेलसा करे।
सिर्फ वतन से झूठी मोहब्बत में अंधे हो कर हुकूमत के हर नाज़ेबा अमल की पैरवी ना करें। असली वतन का वफ़ादार वही जो आतिशी मुद्दों पर जिस पर की आलमी सतह पर भारत की साख खराब होती है मौजूदा हुकूमत से सख्त अलफ़ाज़ में सवाल करे और हुकूमत को ऐसा काम करने से रोके जिसकी वजह से मुस्तक़बिल में वतन की आन बान और शान को झटका लगे।
सहाफ़ी ज़ुबेर
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