Tuesday, 5 September 2023

कुल हिन्द पाक इत्तेहाद देख भाजपा का ज़हरीला कीड़ा तिलमिला गया।

अज़ीज़ नाज़रीन

पाकिस्तान और श्रीलंका की मेज़बानी में चल रहे एशिया कप क्रिकेट में जब भारत और पाकिस्तान की दोनों टीम आमने सामने आई तो पाकिस्तानी अवाम की जानिब से अमन और भाईचारे के पैग़ाम दिए जाने लगे।  फिर मैदान पर दोनों ही टीमों के खिलाड़िओं की जानिब से ख़ुश ख़ुर्रम और हस्ते खेलते फोटों देख कर भाजपा का ज़हर गटर फेम की तरह गन्दा पानी ज़ेहनों में भरा गोबर बहार निकल कर आने लगा। 

एक गटर की पैदाइश को ऐसे हस्ते खेलते अमन और भाईचारे के मुज़ाहारे करते हुए हिन्द पाक खिलाड़ी ज़रा भी पसंद नहीं आये।  उसने अपने गटर नुमा ज़ेहन में भरा हुआ गोबर और ज़मीन का गलीज़ पानी बहार फेंकना शुरू कर दिया।  गटर का कीड़ा बोलता है की भाईचारा और हसी मज़ाक़ मैदान के बहार करो मैदान में जंग। 

भाजपा के इन जैसे ज़हरीले कीड़ों की वजह से ही भाईचारे की बातें नहीं होती और दुश्मनी बढ़ती जाती है। खैर यह तो पाकिस्तान है यह भाजपाई ज़हरीले कीड़े खुद उनके वतन के मुस्लिम अवाम का नाम आते ही गटर के गंदे पानी और ज़हर से भर जातें हैं।  ज़हरीले कीड़े

पाक खिलाड़ी की खेल भावना से जुड़ा हुआ वोह फोटों सोशल मीडिया पर वायरल हो चूका है जिसमे वोह एक भारत के खिलाड़ी के जूते के लेस बाँध रहें हैं।  जिस पाकिस्तान को यह भाजपाई,  भारत के दहशतगर्द और लंगूर-लँगूरनियाँ पानी पी पी कर कोसते हैं दरअसल मेहमान नवाज़ी हुस्ने सुलूक मोहब्बत भाईचारा कोई पकिस्तानिओं से सीखे।  अगर वही तस्वीर का रूख उलटा होता पाकिस्तानी खिलाड़ी के जूते का लेस कोई हिंदुस्तानी खिलाड़ी बांधता तो बॉम्बे से सावरकर की औलादें (जो ख़ुद भी क्रिकेट के अज़ीम खिलाड़ी रह चुके हैं) और तमाम भारत से भाजपा के ज़हरीले कीड़े ख़ास दिल्ली, हरयाणा और जम्मू के ज़ाफ़रानी खटमल जो ख़ुद भी क्रिकेट खिलाड़ी रहे हैं तिलमिला जाते।  लंगूर लँगूरनियाँ तो गटर के खुले हुए ढक्कन से जैसा गंदा पानी सडकों पर बेहता है ऐसे ही गंदे पानी की तरह गंदगी फैला कर बह निकलते।  लेकिन ना ही पाकिस्तानी सहाफ़त से ऐसी कोई तनक़ीद आई और ना ही अवाम ने उसको गैर ज़रूरी तूल दिया।  तमाम पाकिस्तानी अवाम ने उस बात को खिलाड़िओं के दरमियान एक खिलाड़ी की मदद का जज़बे के मुज़ाहिरे के रूप में लिया। 

जो ज़हर भारत की अवाम में भरा पड़ा है उससे कई गुना ज़्यादा भाईचारा और मोहब्बत, इंसानियत पाकिस्तान, मुसलमानों में मौजूद है।  लेकिन भारत में दिखाया वही जाता है जो होता नहीं है और जो  हक़ीक़त में होता है उसको पोशीदा कर लिया जाता है।  वोह तो भला हो सोशल मीडिया का जिसकी वजह से लंगूर लँगूरनिओं का पाकिस्तान मुसलमानों की निस्बत से फ़ैलाया हुआ हर झूट फ़रेब ज़हर फ़ौरन पकड़ में आ जाता है और उसका पर्दा फाशा हो जाता है की झूटी खबर फ़ैलाई जा रही है।   

फिर जब ऐसी भाई चारे की खबरे मंज़र ए आम पर आती हैं तो गटर के कीडों का कुलबुलाना लाज़िम हो जाता है।  ज़ाफ़रानी कीड़ों को अमन भाईचारे की बातें पसंद नहीं हैं उनको तो जंग क़त्ल ए आम खून ख़राबे नफ़रत की बातें पसंद हैं।  फिर भरोसा कैसे जमेगा।  मुस्लिम अवाम और पाकिस्तान तो भारत के ठन्डे पानी से जले हुए है और मीठी खीर के नाम पर ज़हर को पीये हुए हैं। 

बाबरी से ले कर हिजाब, ट्रिपल तलाक़ और तमाम उन मसलों पर मुस्लिम हक़ तलफ़ी हुई जिसमें उनके मज़हबी और जज़बाती एतेक़ाद पोशीदा थे।  बाबरी पर अदालत ए उज़्मा में हलफ़ दिया की हमें सिर्फ पूजा अर्चाना की इजाज़त दी जाए मस्जिद को कोई नुकसान नहीं होगा इस बात की हम पर ज़िम्मेदारी है।फिर किया हुआ गले लग कर क़तल कर दिया। 

उस पर सितम देखीये तमाम भारत दंगों की आग में झुलस गया जिसमे बॉम्बे भी शामिल था।  और जब सज़ा देने की बारी आई तो अदालत उज़्मा ने शहीद भाई याक़ूब मेमन को क़ानूनी क़तल कर दिया।  और बाबरी मस्जिद की शहादत को अदालत ने एक मुजरिमाना अमल माना जो एक सोची समझी साजिश के तहत शहीद की गई।  फिर भी मुजरिम आज़ाद घूम रहें हैं।  उन पर आज ३० सालों में मुक़दमा तक दर्ज नहीं हुआ।  

आज मुझ से तमाम पुलिस अफसर और तमाम सरकारी नुमाइंदों का याक़ूब मेमन के साथ मुस्लिम हमदर्दी की निस्बत से एक सा सवाल होता है।  जिसने २५६ लोगों की जान ली उनके चिथड़े बम ब्लास्ट में उड़ा दिए उसकी फांसी पर तुम मुसलमान काहे को हमदर्दी दिखा रहे हो।  जो बम ब्लास्ट में मारे गए उनके अहले खाना के लिए काहे को वोह जज़्बा नहीं है।  यह पुलिस अफसर और हूकूमती नुमाइंदे बम ब्लास्ट पर बाल्टी भर भर आंसू बहाते हैं और २५६ मौतों पर याक़ूब मेमन की फांसी पर जश्न मनातें हैं। 

उन सभी को रू बरू भी जवाब दिया जा चूका है लेकिन अवाम की जानकारी के लिए लिख रहा हूँ।  याक़ूब मेमन पर सिर्फ़ मुस्लिम ही नहीं हर इंसाफ़ पसंद अवाम आंसूं बहाता है।  हर क़ानून का जानकार बोलता है उनके साथ ग़लत हुआ।  उसकी वजह है पहले बाबरी मस्जिद को शहीद किया गया फिर बॉम्बे में दंगे हुए ना ही बाबरी मस्जिद की शाहदत के मुजरिमों को सज़ा हुई और ना ही दंगों में मुस्लिम अवाम को तबाह करने वाले मुस्लिम क़त्ल ए आम करने वालों को सज़ा हुई।  फिर याक़ूब मेमन को २० साल जेल में रखा उनको यह बोल कर भारत आने को बोला गया था की तुमको फांसी नहीं होने दी जाएगी।   

रॉ के साबिक़ चीफ़ जिनकी दरख़्वास्त पर याक़ूब भारत आये थे और अपने आपको क़ानून के हवाले कर के पूरी जानकारी अदालत को फ़राहम की फिर उनके साथ वही किया जो आम तोर पर ज़ाफ़रानी ग़द्दार करते है दोस्त बोल कर गले लगे और पीछे से गर्दन उतार दी।  इसलिए याक़ूब मेमन के साथ तमाम इंसाफ़ पसंद अवाम की हमदर्दी थी।  अदालते उज़्मा ने अदालत का दोस्त लक़ब से नवाज़ा था।  

पहले तो बाबरी मस्जिद शहीद हुई फिर दंगे हुए याक़ूब तो तीसरे नंबर पर थे तो सबसे पहले उनको सज़ा कैसे दे दी गई।  पहले और दुसरे अभी तक मौज कर रहे हैं।  अगर हुकूमत ने अपना फ़र्ज़ अंजाम दिया होता और अदालत तक पहले दो मुजरिमों को पेश कर के सज़ा दिलवा दी होती तो याक़ूब की फ़ांसी पर किसी को हमदर्दी ना होती।  

गटर फ़ेम लंगूर-लँगूरनियों के ज़हर का पैमाना देखीये पाकिस्तान के ख़िलाफ़ मैच में पूरी फ़ौज की यूनिट को अपनी यूनिफार्म और अस्लेह के साथ जम्मू में दिखाया गया।  ज़हरीली हेडलाइंस पहले मैच में पीटेगा पाकिस्तान फिर जंग में भारतीय फ़ौज से पीटेगा।  जब्कि मेने पाकिस्तान के किसी भी सहाफ़ी टीवी या ख़बरनामे में ऐसी ज़हरीली ज़ुबान और जंग की बातें करते हुए नहीं देखा।  

उधर मज़्ज़फ़्फ़रपुर दिल्ली के बाद कर्नाटक में शिवमोगा में १ सितम्बर को एक हिन्दू ख़ातून उस्ताद मंजूला देवी ने मुस्लिम तालिब ए इल्मों को इज्तेमाई ज़लील किया है।  वोह बोलती है की तुम पाकिस्तान कियों नहीं चले जाते।  काबा, क़ुरान और क़ुर्बानी पर भी बोहोत से नाज़ेबा बातें कहीं हैं।  

 ::नतीजा ::  

में बहैसियत सहाफ़ी भारत के वज़ीरे आज़म से गुज़ारिश करूंगा की हर रोज़ की इस ज़लालत से और हिन्दू अवाम में मुसलमानों के ख़िलाफ़ बढ़ते हुए ज़हर को देखते हुए पाकिस्तान की सरहद की तोहसीह कर दीजिये।  हम भी अब ऐसे ज़हरीले फ़िर्क़ापरस्त और गटर की गंदगी में नहीं रह सकते।  हिन्दू हिन्दुस्तान में ख़ुश रहें और मुस्लिम पाकिस्तान में खुश रहेगें।  लेकिन तोहसीह २५ करोड़ मुसलमानों को देखते हुए करना होगी।  भीक में दिया हुआ टुकड़ा हमको क़ुबूल नहीं हैं।   

सहाफ़ी ज़ुबेर

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