Tuesday, 28 December 2021

फिर तुम को अब्बू से कौन बचाएगा।

अज़ीज़ नाज़रीन,

आज आप लोगों के दरमियान दो तीन मुद्दों को ले कर हाज़िर हुआ हूँ।   पहला उत्तराखंड में भगवा दहशतगर्दों की जानिब से हूकूमते हिन्द के खिलाफ जंग का एलान करना।  दूसरा मुस्लिम नस्ल कुशी का एलान करना और तीसरा भगवा कीड़ों की जानिब से ऊल जलूल बयानबाज़ी करना।  

ऐसी ही हिमाक़त लंगूर और लँगूरनियों ने मई जून २०१९ में की थी जब उन्होंने इंतेखाब को जंग का नाम दे कर मौत के उस ख़ौफ़ से अपने जिस्म की दर्जे हरारत को मज़ीद बरक़रार रखने की नाकाम कोशिश की थी।   उस ऐलाने जंग के बाद इतने जूते इन भगवा लंगूर और लँगूरनियों  को पड़े थे आज तक लंगूर और लँगूरनियों के बच्चे गंजे पैदा हो रहें हैं।  उस जंग के एलान के बाद कई काफिर ज़हरीले लंगूर और लँगूरनियाँ जहन्नुम रसीद हो चुके हैं।  और होने की कगार पर हैं।  आगे और है, और है। 

लंगूरों के उस जंग के एलान के बाद गोली मारो मोहीम का आगाज़ किया गया।  जो अभी तक थमने का नाम नहीं ले रहा है।  जिस जिस भगवा वाइरस ने गोली मारो मोहीम का नारा दिया था अब पचता रहे होंगे क्योंकि ८० फीसद भगवा कीड़े ही गोली मार के हलाक किये गए मतलब यही देश के ग़द्दार थे।  गोली मारो मोहीम के बाद ९९ फीसद अवाम गोली मारो के तहत हिन्दू ही निकले।  इसमें से कुछ ने खुद ही गोली मार कर खुदकशी कर ली और कुछ को गोली मारी गई।  आगे और है।  हिन्दू मज़हब ख़तरे में भगवा धारी गुंडों की वजह से हो रहा है।    ना की किसी मुस्लिम, क्रिस्टी, सिख या दलित की वजह से हो रहा है।  

इस गोली मारो मोहीम में एक और मक़तूल का नाम जुड़ गया है।  सूबे शुमाल के अलीगढ़ में बरोज़ पीर शाम को एक अज़ीम और क़वी सीमेंट ताजिर संदीप गुप्ता को पुलिस के हिफ़ाज़ती घेरे को तोड़ते हुए गोली मार कर हलाक कर दिया है। 

इस ज़ाफ़रानी ताजिर संदीप गुप्ता का क़त्ल उस वक़्त हुआ जब उसके साथ हूकूमती गनर और पुलिस का तहफ़्फ़ुज़ अमला भी साथ था।  इस ज़ाफ़रानी ताजिर को किसी नावाक़िफ़ अमले ने उसकी सियाह फार्च्यून गाडी में ताबड़तोड़ गोली मार के हलाक कर दिया।    आगे और है, और है। 

नाज़रीन २०१९ में ही इस सहाफ़ी ने वज़ीरे दरिंदा अमित शाह और मोदी को चूनौती दी थी की तुम इस सहाफ़ी को १५ दिनों के अंदर गिरफ्तार करो अगर गिरफ्तार करने में कामयाब हो गए तो समझो तुम कामयाब हो गए नहीं तो हुकूमत मुसलमानों के हाथों में दे देना या जंग करना लेकिन तुम यह जंग किसी सूरत से फतह नहीं कर सकोगे।   फिर १५ दिनों का वक़्फ़ा गुज़र जाने के बाद भी वज़ीरे दरिंदा अमित शाह और मोदी को हुकूमत मुसलमानों के हाथ में सौपने की बात कही थी, क्योंकि तुम हमें गिरफ्तार नहीं कर पाए।  लेकिन बजाये अमन के मोदी इन्तेज़ामियाँ ने जंग को तरजीह दी और नतीजा आपके सामने हाज़िर है।  २० जनवरी २०२० को जो पहला करोना का केस सामने आया था तब से ले कर अब तक ग़ालिबन ७ लाख से ज़ाइद अफ़राद मारे गाये।

नाज़रीन वही हिमाक़त अब भगवा दरिंदों ने की है इन लोगों को जंग का क्या भूत सवार है हर मुद्दे पर जंग की जानिब सोचने लगते हैं।  क़ुव्वत और ताक़त का पता नहीं अपनी लुगाई संभाली जाती नहीं और जंग की बात करतें हैं।  लठ में नहीं ताक़त, करें जंग की बातें।  

नाज़रीन इन भगवा जनखों ने जंग का एलान तो कर दिया, लेकिन उनके हाथों में इतनी ताक़त और क़ुव्वत ही नहीं है की लठ उठा सकें, तो ऐसी सूरत में फिर वही पुराना रास्ता इख़्तेयार करने की फ़िराक़ में है, "फरारी", जनखा साधू और बीजेपी की इंतेखाब को मन्सूख़ करना चाहतें हैं।     

सूबे शुमाल में असेंबली इंतेख़ाब (UP Election 2022) से क़ब्ल इंतेख़ाब कमीशन का एक वफंद वहां अहम दौरे पर पहुंच रहा है।  इस दौरे से इंतेखाब कमीशन की टीम सियासी तंज़ीमों से उनकी राये ले कर उनका दिल टटोलने की कोशिश करेगा और हालात का जायज़ा लेने के बाद ते करेगा की सूबे शुमाल के इंतेखाब अपने वक़्ते मुक़्क़र्रा पर करवाए जाएँ या उनमे ताख़ीर की जाए।  ऐसी हिकमत एक गुलाम तंज़ीम चुनाव आयोग की जानिब से सिर्फ और सिर्फ ज़ाफ़रानी ब्रिगेड की मुमकिना शाकिस्त को देखते हुए ली गई है।   गुलाम सोच इन्तेख़ाबी आयोग का यह मशकूक दौरे का आगाज़ आज से हो रहा है।

कोई ज़ाफ़रानी कीड़ा साधू के लठ की हूल पट्टी दे रहा था।   बस हमारा एक ही झटका देख कर में फट गया साधू का लठ,  इस जनखे के लठ में इतनी ताक़त नहीं की हमारे लठ के बाद तक खड़ा रहे।  अगर हिजड़े में ताक़त होती तो विवाह करता लेकिन डर गया की कही पड़ोस में रहने वाले अब्दुल के बेटे से तो मेरी  लुगाई मोहब्बत नहीं कर बैठेगी।  साहेब यह तो लव जिहाद है।  

में उस ज़ाफ़रानी कीड़े से सवाल करता हूँ, तू जिस साधू के लठ की ताक़त की बात करता था वोह तो उठने से पहले ही लूल हो रहा है, तभी तो दस्तूरी नुमाइंदों की मदद लेने की ज़रुरत पड़ी।   अगर लठ में ताक़त और क़ुव्वत होती तो चुनाव आयोग इंतेखाब को मुल्तवी करने की बात नहीं करता।   भगवा लठ ठीला होता दिख रहा है।   उसमे इतनी क़ुव्वत और ताक़त नहीं की हमारे लठ से देर तक खड़ा रह सके। 

अबे तू तो लूल लठ पर भरोसा कर के बकवास कर के चला जाएगा लेकिन फिर तेरे को और तेरी जमात के लोगों को अब्बू से कौन बचाएगा।  जी अब्बू।  

Zuber

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