Sunday, 26 December 2021

आ गए जंग में बाबर और औरंगज़ेब

अज़ीज़ नाज़रीन,

आज का मौज़ूं कुछ अलग नहीं है बल्कि वही पुराना क़िस्सा है जिसको आश्रम बोल कर मुख़ातिब किया जाता है।  और ऐसे आश्रमों के ख़िलाफ़ २०१५ से कई मज़मून शाया किये हैं।   जिसमे इन ज़ाफ़रानी पैराहन पहनी ख़ातूनों और उस आश्रम के ताल्लुक़ात को बरहना कर दिया है।   नाज़रीन जैसा की गुजिश्ता हर मज़मून में दुर्गा वाहिनी और उससे मुनसलिक ख़ातूनों के बारे में बताया गया है की ऐसी ख़ातूने जिन्सी ग़ुलाम की हैसियत से काम करती है और दहशत की नस्ल को आगे बढ़ाती हैं।   


 

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नाज़रीन इन ज़ाफ़रानियों का किसी और मज़हब के ख़िलाफ़ ज़हर अंगेशी करने और गिरजाघरों, मदरसों या गुरूद्वारों पर हमला करने के पीछे भी मक़सद अपने गुनाहों से पोशीदगी रखना होता है।   बाक़ी का बचा हुआ काम इन आश्रमों की भीक में पल रहे छी न्यूज़ जैसे मीडिया के लंगूर और लँगूरनियाँ पूरा कर देती हैं।   किसी भी खबर को तोड़ मरोड़ कर पेश कर के ऐसे आश्रमों की बदनामी होने से पहले ही छोटी सी बात का बतंगड़ बना कर जो एहम और ख़ास खबर है उसको ब्लैक आउट कर दिया जाता है।  


नाज़रीन इस सहाफ़ी के पास पूरी तहक़ीक़ात और सबूत मौजूद हैं जिसके ऊपर कई मज़मून शाया भी किये जा चुके हैं की किस तरह से इन आश्रमों में दुर्गा वाहिनी की जवान और हसींन हिन्दू बच्चिओं को मज़हब के नाम पर ज़हर भर कर आलमी सतह पर दहशत को फ़रोग़ देने और हिन्दू मज़हब फ़ैलाने के लिए भेजा जाता है।   जवान लड़कियों को एक हदफ़ दिया जाता है उसमे किसी भी मुल्क के सरबराह से अपने मक़सद को पूरा करने से ले कर तो उस मुल्क की फौजी ताक़त और क़ुव्वत की जानकारी फ़राहम करने की ज़िम्मेदारी होती है।  इस काम में अगर जिन्सी ताल्लुक़ात भी कायम करना पड़े तो यह लड़कियां उसके लिए भी तैयार रहती हैं।  इनके ज़हन को आश्रमों में जालसाज़, ज़ेहनी मरीज़ ज़ाफ़रानी गुंडों की सोहबत में रह कर उसी तरीके से तैयार किया जाता है।   पहले इनका इस्तासाल साधू करतें हैं जो भी आश्रम का सरदार होता है वोह खूब मौज उड़ाता है उसके बाद उसके चमचे फिर जब वोह पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी होती है तो उसको ज़ेहनी और जिस्मानी तरीक़े से मज़हब के नाम पर ज़हर की मिक़्दार दे दे कर उस काम के लिए तैयार किया जाता है।  अब यह लड़की तालीमी आफ़ता या उमंग से भरी हुई अवाम के लिए मुल्क के लिए कुछ करने की आशा ली हुई नहीं रह जाती है बल्कि बन जाती है एक खतरनाक शातिर मसूबे वाली ज़हरीली बदमाश लड़की जिसको उसका हदफ़ हर दम याद रखना होता है।  


नाज़रीन इन सघ, विहिपी, बजरंगदल के आश्रम हिंदुस्तान से ले कर ब्रतानियाँ, अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैण्ड जैसे मुल्कों में बेतहाशा शिद्दत से चल रहें हैं।  इनमे से कुछ योग की तालीम के नाम पर फरेब कर रहें हैं।  


नाज़रीन छी न्यूज़ के लंगूर और लँगूरनियाँ ओवेसी के बयान पर बवाल मचा रहें हैं उसकी वजह ही उत्तराखंड में जो क़सम मोहीम ज़ाफ़रानी शैतानों और उनकी पालतू आश्रम की पैदाइश वोह तवाइफ़ है उसकी कारगरदेगी पर पर्दापोशी करना है।  ओवेसी ने कुछ भी गलत नहीं कहा, उन्होंने तमाम पुलिस वालों के लिए कुछ नहीं कहा उन पुलिस वालों के लिए बयान दिया जो ना इन्साफ हैं, नाहक़ अपनी फ़िर्क़ावाराना ज़ेहनियत का मुज़ाहिरा करते हुए मासूमों पर गोलियां चलातें हैं।  उन्होंने सही कहा मोदी और योगी आज हैं कल नहीं रहेगें लेकिन क़ानून हमेशा है और रहेगा और जब वोह नहीं रहेगें तब तुमको कौन बचाने आएगा।  और उन्होंने मालिके मुतलक़ से बद्दुआ की है।   जब दिल दुखता है तब बद्दुआ मुँह से करो या ना करो मालिक सुनता है। ओवेसी जी का दिल दुखा उन्होंने बद्दुआ दे दी अब उसमे हाय तोबा इसलिए मचाई जा रही है की उत्तराखंड के देहशती इजलास पर पर्दा डाल दिया जाए।  लेकिन उत्तराखंड में नाम बनाम मुस्लिम अवाम की नस्ल कुशी की बात कही है और पुलिस, फौज को भी इस मरदूदे हरम में शामिल होने की दवात दी है।   साबिक़ वज़ीरे आज़म को गोलियों से भून देने की बात कही है।


हम भी याद रखेगें एक एक ज़ुल्म और बर्बरियत को याद रखेंगे, २० साल तक भी याद रखा जाएगा और जो जो पुलिस वाले, फौज के अराकीन, संघी ज़हर, शिद्दत पसंद हिन्दू ज़ुल्म और बर्बरियत में शामिल हैं उनको चुन चुन के मारेगें।  जिस तरह से दिल्ली हिन्दू दहशतगर्द हमले के तमाम पुलिस वाले, हिन्दू शिद्दत पसंद हमलावर और वोह ताजिर जिन्होंने इस हमले के लिए माशी इमदाद की थी उसमे से ज़्यादातर सभी महज़ १ साल के वक़्फ़े में जहन्नुम रसीद हो गए।   भाजपा का एक दहशतगर्द बोहोत उड़ रहा है जब जब औरग़ज़ेब और बाबर की बादशाहत आई राणा प्रताप और पृथ्वी राज उठे हैं।  उसको बता दूँ जब जब राणा या पृथ्वी उठेगा उसको धुल चटा दी जाएगी और पत्तल पर सूला दिया जाएगा घास की रोटी खाने पर मजबूर कर दिया जाएगा, और क़ैद कर दिया जाएगा महदूत कर दिया जाएगा महज़ पहाड़ों की ज़ीनत बना दिया जाएगा।  अगर माज़ी की बात करते हो मौजूदा वक़्त में तो वैसा ही होगा जो माज़ी में हुआ था।   


तुम्हारे अंदर पेवस्त ज़हर को निकालने या ख़त्म करने के दो ही रास्तें हैं।  


१. गर्म सूजे तैयार कर के तुम्हारे अंदर पेवस्त ज़हर को उससे निकाला जाए नहीं तो ज़हर पूरे जिस्म में फेल जाएगा।  


२. जिस्म के उस हिस्से को ही काट दिया जाए जो ज़हरीला हो चूका है।  नहीं तो ज़हर पूरे जिस्म में फ़ैल जाएगा। 


Zuber

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