अज़ीज़ नाज़रीन,
बोलीवूड
में एक फिल्म बनी थी बिच्छू जिसमे आशीष विद्यार्थी ने जो किरदार किया है वही असल ज़िन्दगी
और नारकोटिक्स डिपार्टमेंट में रह कर समीर वानखेड़े ने जो ग़द्दारी, ज़लालत और मनफ़ी अस्क
पेश किया है उससे मंशियाती महकमे की काफी बदनामी हुई है। फिल्म में आशीष विद्यार्थी भी नारकोटिक्स का सरबराह
था जो ड्रग पेडलरों से मिला हुआ था। असल ज़िन्दगी
में भी यह ग़द्दार शातिर मुजरिम गुंडा समीर वानखेड़े भी वही था।
अब
यह वतन का ग़द्दार, ड्रग माफिया समीर वानखेड़े ३१ दिसम्बर को आई आर अस नारकोटिक्स कंटोल
ब्यूरो के अपने ओहदे से बरतरफ़ हो जाएगा। इसको
इसके गुनाहों की सज़ा मिली है और आगे मज़ीद इसको फ़ज़ीहत और परेशानी दूर नहीं होने वाली
हैं।
नाज़रीन
जिस तरह से बॉलीवुड में हर मनफ़ी किरदार वाले के लिए एक हीरो होता है बिच्छू फिल्म में
भी आशीष विद्याथी को उसको अंजाम तक हीरो बॉबी देओल ने पहुंचाया था। क्योंकि उस फिल्म में उस ड्रैग माफियां ने हीरो
के घर वालों को गलत इलज़ाम में ड्रग का केस बना कर जेल भेज दिया था।
असल
ज़िन्दगी में इस ग़द्दार, ड्रग माफिया विलन समीर वानखेड़े को उसके अंजाम तक पहुंचाने वाला
हीरो और कोई नहीं हर दिल अज़ीज़ मज़लूमों की आवाज़ नवाब मालिक हैं। जिनको इस ग़द्दार ने मामूली इंसान समझ कर ज़ाफ़रानी
दहशतगर्दों के बहकावे में आ कर उनके अहले खाना में से किसी एक शख्स पर झूठा और फरेबी
केस बना दिया। फिर क्या था शुरू हो गयी उसकी
उलटी गिनती। उसने पंगा भी तो हीरो से लिया
था। नवाब मालिक ठहरे अल्लाह पर कामिल यक़ीन
रखने वाले वली सिफ़त इंसान उनके ऊपर ख़ास करम है जभी तो कब्रस्तान से गड़े हुए मुर्दों
का हसब और नसब निकाल लाये।
अज़ीज़
नाज़रीन इस समीर वानखेड़े से यह सहाफ़ी २०२० में उसके दफ्तर शहीद भगत सिंह रोड फोर्ट मुंबई
में मिल चूका है। इसको मिलवाने वाले एक हमारे
क़दीमी दोस्त नवनीत वानखेड़े थे। जब हम डॉ पद्मसिंह
पाटिल के यहाँ रॉयल स्टोन पर PA की हैसियत से काम करते थे तब से इन नवनीत वानखेड़े से
मरासिम थे। जो पुलिस प्रोटेक्शन में आला ओहदेदार की हैसियत से हैं। यह समीर वानखेड़े हमको भी ड्रग केस में मुलव्विस
करने की फ़िराक़ में था। और अपने ३-४ आला ऑफिसरों
के साथ आया था।
लेकिन
उसी वक़्त जो जो नवनीत के सामने उस ख़बीस समीर वानखेड़े को बोल दिया था वही हू बा हू हुआ अब मुझको वही दिन याद आ रहा है। तब तो
में क्या कह रहा हूँ मुझको खुद भी पता नहीं था।
उस वक़्त शाहरुख़ का नाम भी लिया था और उनके फ़रज़न्द आर्यन का भी नाम लिया था। और वही हुआ। जब सब कुछ कैफियत में बोलता चाला गया तब समीर को एहसास हुआ की उसने गलत शख्स
से पन्गा ले लिया है। उसने बोला भी खान साहब
कुछ करना मत में तो मज़ाक कर रहा था। लेकिन
तब तक तीर कमान से निकल चूका था। और बात अर्शे
इलाही पर जा पहुंची थी। वही हुआ हो गया वाटला
और पद से नीचे भी आ गया।
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