ज़ाफ़रानी मीडिया के लंगूर और लँगूरनियों ने जो ज़हर हुकूमते हिन्द के
इशारे पे मुसलमानों के खिलाफ फैलाया था अब उसका ख़मयाज़ा खुद हिन्दू बेरुन मुल्क ख़ास ख़लीज
मुमालिकों में कर रहें हैं.
UAE के बाद दिखाए कुवैत ने सख़्त तेवर और मंगलुरु, का एक हिंदुस्तानी मुलाज़िम सिविल इंजीनियर
को सोशल मीडिया पर एक नाज़ेबा पोस्ट डालने के बाद कुवैत में एक कसीर अक़वामी कारपोरेशन
(एमएनसी) से मुलाज़मत से निकाल दिया गया।
कुवैत टुडे के मुताबिक़, मीडिया पर मुसलमानों और तब्लीगी जमात के खिलाफ
बे हद ना ज़ेबा तास्सुरात वाली पोस्ट करने के लिए इससे क़ब्ल एक भारतीय को मुलाज़मत से
निकाल दिया गया था। दोनों को एयरलाइंस शुरू
होने के बाद जिलातून करने का हूकूम जारी हुआ है।
एयरलाइंस के आवा जावी शुरू होते ही उसे इस्लामिक रियासत छोड़ने का हुकुम जारी हुआ है। मंगलोर का यह संघी दहशतगर्द हिन्दू शख़्स २० सालों से कुवैत में एक मल्टीनेशनल निगम (MNC) में काम कर रहा था। और खूब कमा खा रहा था. जिस इस्लामिक रियासत से इसका हुक्का पानी चलता था उसके बच्चे अच्छे स्कूल में तालीम लेते थे उसी इस्लाम, उनके रहबर पैगम्बर और क़ुरआन के खिलाफ ज़ाफ़रानी मीडिया के बहकावे में आ कर ना ज़ेबा कलेमात बोलने का उसको अब मलाल होगा.
एक दुसरे मामले में १५ अप्रैल के दरमियान मंगलुरु, का एक हिंदुस्तानी शख्स प्रख्यात कुमार (३०) ख़ौफ़ और डर से मर चूका है.
हाल ही में कुवैत में मुलाज़मत करने वाले कई भारतीयों को मुसलमानों के
ख़िलाफ़ नाज़ेबा और वाहियात पोस्ट करने के लिए मुलाज़मत से निकाल दिया गया था। एक दुसरे मामले में , फेसबुक पर एक पुराने इस्लाम
मुख़ालिफ़ पोस्ट के बाद एक ख़ातून को अपनी नौकरी खो देने का खदशा है। उस दुर्गा वाहिनी की स्लीपर सेल ख़ातून के पुराने
ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। उस ख़ातून ने माफ़ी मांगी थी.
सहाफी जुबेर का अरब और
मुस्लिम मुमालिकों से मोद्देबाना अपील.
तमाम अरब वर्ल्ड और मुस्लिम मुमालिकों से यह सहाफी गुज़ारिश करता है
ये जो ज़हर की ख़ेती मुस्लिम मुमालिकों में २०१४ के बाद बेहद फ़रोग़ दी गई थी और इन ज़हरीले
एजेंटों और स्लीपर सेलों को एक साजिश के तहत मुस्लिम मुल्कों में नसब किया गया था तो
इनको इतनी आसानी से नहीं जाने देना चाहिए.
१. इनको पहले इनके गुनाह ब्लेस्फेमी
चार्ज के तहत सज़ा होना चाहिए. अगर गर्दन क़लम
करने की सज़ा इस्लामिक मुल्कों में हैं तो गर्दन मार दी जाए. नहीं तो जो भी मुनासिब सज़ा हुकूमत के हिसाब से मौजूद
हो वोह सज़ा दे कर इनको छोड़ना चाहिए. महज़ मुलाज़मत
से निकाल देना तो सज़ा नहीं हुई. इसने जो गुनाह
किया उसका कफ़्फ़ारा महज़ नौकरी से निकालना तो नहीं हो सकता. अगर एक शख्स चोरी करता है और चोरी का माल सारा दे
देता है तो भी उसको माफ़ी थोड़ी मिल जायेगी. उसको उस चौरी की सज़ा तो मिलेगी क्योंकि वोह
गुनाह कर चूका. उसी हिसाब से इन गुनहगारों
को इस्लाम, क़ुरान, पैगम्बर और उनकी अज़वाज जो तमाम मुसलमानों की मायें हैं उनके ख़िलाफ़
की गई नाज़ेबा कलेमात की सज़ा तो मिलना चाहिए.
२. फिर इनको भारत जाते वक़्त इनके
पासपोर्ट पर जुर्म तहरीर कर देना चाहिए और तमाम इस्लामिक मुमालिकों में इस शख्स का
फोटो और चार्ज शीट भेज देना चाहिए ताके ऐसा ना मुराद ज़हरीला इस्लाम, क़ुरान और पैगम्बर
उनकी अज़वाज के ख़िलाफ़ इतना ज़हर रखने वाला मुस्तक़बिल में चाह कर भी मुस्लिम मुमालिकों
में तिजारत या ज़ारियाये माश नहीं तलाश सके.
३.
इनका तमाम बैंक अकाउंट और पैसा
वगेरा ज़प्त कर लेना चाहिए. फिर जिस तारिख से
इन जैसे लोगों का जुर्म साबित हो गया मतलब इस्लाम मुखालिफ ट्वीट की तारिख देख कर इनके
ऊपर सख़्त जुर्माना लगाना चाहिए. अब ये जुर्माना
भले ही ये शख्स अपनी हिंदुस्तान में ज़मीन जायदाद बेच कर दे या हुकूमत हिन्द अदा करे. ऐसा ही क़ायदा भारत के सूबे उत्तर प्रदेश में खूब
फल फूल रहा है. हर दुसरे मुसलमान को गिरफ्तार
कर के उसकी ज़मीन जायदाद बिकवा कर सरकार अपना ख़ज़ाना भर रही है. वही सब अब मुस्लिम मुमालिकों में करना चाहिए.
उत्तराखंड का ज़ाफ़रानी दहशतगर्द और ज़हर (वज़ीरे आला) बोलता है हम चुन
चुन के एक एक जमाती को उत्तराखंड से निकाल रहे हैं. अभी तक १४४५ छुपे हुए जमाती निकाले गए हैं. अब चुन चुन कर हर ज़ाफ़रानी ज़हर को नेस्त नाबूत किया
जा रहा है.
यह भारत का ज़ाफ़रानी मीडिया ही था जिसने मुसलमानों के ख़िलाफ़ अवाम के
अंदर ज़हर भरा था. अब वोह सब लंगूर और लँगूरनिया तो अपने अपने जॉब और मुलाज़मत में मशगूल
है और इनके झूट, फरेब और बहकावे में आ कर हर हिन्दू जो ज़हरीला बना था वो फस गया. वोह छुपे हुए थे ये फस गए.
कुवैत हुक्काम से गुज़ारिश है की इससे भी सख़्त अगर कोई अमल हो तो उसको
इख्तियार करना चाहिए. क्योंकि यह मीडिया ही है जिसने कुवैत जिसके साथ हूकूमते हिन्द
के हर वक़्त दोस्ताना तालुक़्क़ात थे उसके बादशाह के ख़िलाफ़ भी ज़हर अंगेशी की थी. २०१४ जब मोदी नया नया तलवार के ज़ोर पर हूकूमते हिन्द
की कुर्सी पर जब्र और दहशत के ज़ोर पर क़ाबिज़ हुआ था. बात तब की है जब २०१५ में कुवैत के सिन रसीदा बुज़ुर्ग
बादशाह अपने प्रोस्टेट के इलाज के लिए भारत आये थे. फिर 'आज तक' और 'नव भारत टाइम्स'
हिंदी खबरनामों ने कैसी झूटी और फरेबी ख़बरे शाया की थी. उन बुज़ुर्ग बादशाह के ख़िलाफ़ भी झूठा प्रोमोशन करना
शुरू किया था. खबरनामे की हेड लाइन ही ऐसी
ना ज़ेबा थी. कुवैत के ८० साल के बुज़ुर्ग बादशाह अपनी जवान और हसीन ८ बीवियों के साथ भारत इलाज के लिए आये.
बाक़िया तमाम ख़बर पूरा का पूरा झूठ का पुलिंदा थी. जिसमे बे हद संगीन इल्ज़ामात लगाए गए थे. जैसे की होटल ताज में ८० साल का बूढ़ा बादशाह रक्स
करता है, शराब ख़ौरी में मुलव्विस है वग़ैरा वग़ैरा.
अब सवाल यह उठता है जब मीडिया के दिलों दिमाग में जिस मुल्क के बादशाह के ख़िलाफ़
इतना ज़हर है की झूटी सच्ची खबरे चला रहे हो तो उस मुल्क से तमाम तिजारती मुहायदे मुनतक़ा
कर देना चाहिए. दूसरी बात कोई भी मुस्लिम बा एक वक़त ८ बीवियां नहीं रख सकता ४ की इजाज़त
है. अगर कोई ऐसा कर रहा है तो शरई गुनाह गार
है और ऐसा ही जवाब इस सहाफी ने उस पोस्ट पर दिया था. आगे मज़ीद कहा था ये तो अपनी अपनी क़िस्मत है ८० साल
में मुस्लिम बूढ़े में भी इतनी क़ुव्वत है की ८ को संभाल रहे हैं और वही मोदी तो भरी जवानी
में एक भी नहीं संभाल पाया और भाग खड़ा हुआ.
कहने का मक़सद ये ही है की इन ज़हर को इतनी आसानी से महज़ नौकरी से निकाल
कर नहीं छोड़ना चाहिए. पूरी वसूली और हर्जाना
जुर्माना लगा कर सज़ा दे कर छोड़ना चाहिए. जब
से ना ज़ेबा ट्वीट सामने आई उस तारीख़ से ले कर जब मुक़दमा चला तब तक का हर्जाना की रक़म
वसूल करना चाहिए. क्योंकि इन लोगों के अमल
से इस्लाम की रूह को ईज़ा पहुंची है. और इस्लाम
की इमेज ख़राब हुई है.
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