Thursday, 28 May 2020

मुल्के हिन्द पर ३ तरफा क़ुदरती क़ेहर


قید کر سکوگے نہ تم مجھکو 
الفاظ میں نہ قلم کی سیاہے میں 
ہوا کا جھونکا ہوں میں 
اڈا کے لے جاونگا  تم سب کو 
                                                                                                                                      
صحافی زبیر

क़ैद कर सकोगे ना तुम मुझको
अलफ़ाज़ में ना क़लम की सियाही में
हवा का झोंका हूँ में
उड़ा के ले जाऊँगा तुम सबको.

सहाफी ज़ुबेर


अज़ीज़ नाज़रीन,

कोई भी दानिशमंद, तालीमसाज़, प्रोफेसर या सहाफी किसी भी मुल्क के मौजूदा हालात देख कर उस मुल्क में आने वाली तबाही को साफ़ तोर से महसूस कर सकतें हैं.  मुल्के हिन्द में भी जिस तरह से हवा का रूख बह रहा था और २०१४ के बाद से जो ज़हर और आलूद की काश्त की जा रही थी उसकी फसल महज़ तबाही और बर्बादी होगी इस बात को हर बार इस सहाफी ने अपने तमाम गुजिश्ता मज़मूनों में पेश किया था.  हर मज़मून में यही बात कही थी की भारत सख़्त तबाह होगा बर्बाद हो जाएगा. 

इस सहाफी को मुल्के हिन्द के सियासतदाँ, दानिशमंद और सहाफी (लंगूर-लँगूरनियाँ) भारत मुखालिफ या गद्दार तस्सव्वुर कर के इसके मज़मूनों में दी हुई नसीहतों को हवा में उड़ा देते थे.  लेकिन वही बात २०१६-१७ के बाद तक़रीबन हर खुले ज़ेहन वाले सहाफी ने कही. जिसमे ख़ास नाम लेना चाहूंगा अभिसार शर्मा, प्रसून कुमार वाजपाई, रविश कुमार, विनय दुबे, बॉलीवुड के आशुतोष राणा.   लेकिन सही कहतें हैं सहाफी जुबेर 

क्या बात थी, तेरे सेहर के नशे में ऐ साक़ी

की सहर होने तक सब तबाह हो गया.

आज ज़ाफ़रानी मिडिया के लंगूर और लँगूरनियों की वही हालत हो चुकी है.  जो कभी वतन की मोहब्बत के फरेब और झूट में सिर्फ और सिर्फ मोदी मोहब्बत का दम भरते रहे और हूकूमते हिन्द को उसकी गफलत, गलती की जानिब तव्वज्जो ही नहीं दिलवाई और हुआ ये की सब कुछ बर्बाद होने के बाद इन लंगूरों की आँखों से जादू की जो परत चढ़ी हुई थे साफ़ हुई, तब इनको इस बात का एहसास हुआ की इनकी गुलामी ने इनके खुद के मुल्क को तबाह और बर्बाद कर दिया है. 

मुल्के हिन्द पर २०२० सख़्त आज़माइश ले कर आया है.  यूं तो जनवरी २०२० से ही कुछ ना कुछ आफ़ात और बला से हुकूमत को दो चार होना पड़ा.  लेकिन अप्रैल २०२० से ले कर मई २०२० तक तीन तरफ़ा क़ुदरती क़ेहर ने भारत को तक़रीबन तबाह कर दिया. 

१.           करोना हमला
२.          तूफ़ान का हमला
३.           टिड्डी फौज का हमला.

इन हमलों में एक वबा का हमला है (करोना) और दो हवा के हमले हैं. तूफ़ान और टिड्डी.   ऐसा भी नहीं है की आगाही नहीं की गई थी.  फरवरी में अपनी ऊपर दी हुई उन्वान वाली उर्दू नज़म में साफ़ अलफ़ाज़ में लिखा था. 
"हवा का झोंका हूँ में उड़ा के ले जाऊँगा तुम सबको"

फिर भी बीजीपी और उनके कारकून गफलत में रहे और हर मसले पर बजाये अपनी गफलत मानने के कभी जमाती कभी तब्लीगी कभी मुसलमान कभी पाकिस्तना इन्ही मसलो में उलझे रहे. 

ख़ैर जो होना था हो चूकालेकिन एक बात वाज़े है, इस जंग के बाद तमाम आलम के सुपर पावर तस्सवुर किये जाने वाले मुल्क अमेरिका बर्बाद होगाऔर जिन तीन मुल्कों के बाशिंदो के ऊपर ज़ाफ़रानी दहशत ने अपनी सियासत चमकाने का अधूरा ख़्वाब देखा था उनमे से कोई एक मुल्क ज़बरदस्त क़ुव्वत वाला और ताक़तवर बन के उभरेगा

Zuber Ahmed Khan
 shared a link. Admin3 May at 20:41

करोना की इस यूध के बाद अमेरिका रूस जेसी बड़ी बड़ी सूपर पवर आर्थिक हल्क़े मे पूरी तरह टूट जायेगे. एशिया के अभी तक के सबसे कमज़ौर समझे जाने वाले 3 देश उभर कर आयेगे. वो इनमे से होंगे. पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका या आफ्गानिस्तान. दो देश मिल कर एक बड़ा सूपर पावर बनेगा. ओर विश्व मे फिर उसी की बात को तरजीह दी जायेगी.

इसकी मज़ीद वज़ाहत इस सहाफी ने अपने फरवरी २०२० को लिखे ब्लॉग में की है.



इमरान खान साहब मुबारक

No comments:

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...