Friday, 3 November 2017

सिख मज़हबी वफंद पाकिस्तान पंहुचा.


भारत से २६०० कारकूनो वाला सिख समुदाय का एक मज़हबी वफंद वाघा बॉर्डर होते हुए कल बरोज़ जुमेरात पाकिस्तान पंहुचा. यहाँ पे ये वफंद सिख समुदाय के पहले मज़हबी रहनुमा नानक बाबा की यौमे विलादत इजलास में शिरकत करेगा.

                             सिख मज़हबी वफंद वाघा बार्डर से पाक पहुंचा
 

जैसा की पाकिस्तानी अवाम हर बेरुन मुल्क मेहमान की खुले दिल से खेरमकदम करती है और जिसके लिए पाकिस्तानी बड़े दिल वाले जाने जाते है उसी तरह पाक में इस मज़हबी वफंद का भी खेर मकदम किया गया. इस वफंद को वाघा बॉर्डर पे गुलाब के फूलो से खुशामदीद किया और उनके ऊपर गुलाब की पखुड़िया उड़ाई गईइस वफंद का खैर मकदम पाकिस्तान में इवकी ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के सरबराह सिद्दिकुल फ़ारूक़ ने किया इनके हमराह पकिस्तान के गुरुद्वारे प्रबंधक समिति के मेंबरान भी मौजूद थे उन्होंने अपने भारत से आने वाले सिख भाईओ को गले लगा खुशामदीद किया.

          सिख मज़हबी वफंद का पाकिस्तान में गुलाब की पखुडिओ से ज़बरदस्त खैरमकदम
 

पाकिस्तानी अवाम की दरयादिली इतना प्यार खुलूस और मोहब्बत देख ग्रुप लीडर सरदार गुरमीत सिंह सहाफीओ से खिताब करते हुए बोले की सिख मज़हबी वफंद प्यार, खुलूस और दोस्ती का पैगाम ले कर आया हैउन्होंने कहा पाकिस्तान सिख रेहनूमाओ की पैदाइश करता ज़मीन है और सिख बरादरी इससे प्यार करती है. हम यहाँ मुस्लिम और सिख के प्यार का मुज़ाहेरा करने आये है.  

                           वफंद के सरबराह सहाफीओ से खिताब करते हुए
 

सिख वफंद पाकिस्तान में कुल दिन क़याम करेगा और नवंबर के खुसूसी मज़हबी इजलास जिसको नानकनामा साहिब कहा जाता है में अपनी शिरकत दर्ज करा के ११ नवंबर को उनके वतन भारत के लिए रवाना होगा.  

इस सहाफी की गुज़ारिश आम

पाक हुकूमत और मुअल्लेक़ीनो से मूअदबना गुज़ारिश है के इस वफंद की खैरख्वाही और हिफाज़त करे क्योके सिख ब्रदर हिन्दू राष्ट्र में मुसलमानो के सबसे ज़्यादा हामिओ में से है और वो ज़ाफ़रान महाज़ से मुसलमानो की हिफाज़त करते है. उन्होंने अमेरिका, फ्रांस और यूरोपियन युनियन में कई पेटिशन दाखिल किये है जब २००२ के दहशतगर्द हमलो का मास्टर माइंड वहां पंहुचा था.  सिख बरादरी ने २००२ के दहशतगर्द हमलो का मास्टर माइंड के खिलाफ अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और बर्तानिया में ज़बरदस्त एहतेजाजी मुज़ाहरो में भी हिस्सा लिया था.  इन्होने अमेरिका, कनाडा और दुबाई में अपने मुस्लिम भाईओ के लिए मज़हबी इफ्तार का एहतेमाम किया था.  हाल ही में जून २०१७ में ईदुल फ़ित्र की नमाज़ के लिए सिख समाज ने अपने गरुद्वारा के दरवाज़े मुसलमानो के लिए खोल दिए थे और उनको नमाज़े ईद उल फ़ित्र अदा करवाने में भरपूर ताऊन किया था.  पाकिस्तान हुक्मरान, लोग, सियासी जमातें और मज़हबी तंज़ीमों को तहे दिल से इस वफंद का इस्तकबाल करना चाहिए और सभी ज़रूरी साज सामान मोहिय्या करना चाहिए ताके ये लोग अपने मज़हबी एतेक़ाद के मुताबिक सारे अर्हकान को अंजाम दे सके

भारत से कुछ तशदुदत पसंद ज़ेहनियत अभी से सिख समुदाय के पाक में आने के ऊपर तनक़ीद करने लगे. इन लोगो का कहना था के गुरू नानक जयंती तो भारत में रह के भी मनाई जा सकती थी उसके लिए पाक जाने की क्या ज़रुरत थी.  इस सहाफी ने ऑन लाइन कुछ शरपसंद तशद्दुत अफ्ता लोगो से चेट किया और पुछा के क्या पाक से सभी सिफारत और कारोबारी रिश्ते तोड़ देना चाहिए उसपे उनका कहना था ये तो सरकार को ते करना है हम तो कब के पाक से सारे रिश्ते तोड़ चुके है.

हिन्दू राष्ट्र में ज़ाफ़रान महाज़ की हुकूमत हमेशा से ही बाटने वाली सियासत करती है और सिख-मुस्लिम, हिन्दू-मुस्लिम के अदना से मसले को बड़ा चढ़ा के झूटी, फरेबी रिपोर्ट के आधार पे और पेचीदा कर के अपनी सियासी रोटी सेकती है.

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