जब से भारत की सत्ता पाखण्डिओ, मवालीओ,
आतंकवादीओ, देश्द्रोहिओं, अपराधीयो, साम्प्रदाइक मानसिकता वाले लोगो के हाथ में है तब से भारत में पैसे की कमी हो सकती है काले धन की कमी हो सकती है परन्तु पाखण्डिओ
और बेरूपियो की कमी कैसे हो सकती है. एक तलाश करो और महाराज जैसे हज़ारो मिल जायगे. इसी कड़ी में लखनऊ के होटल अवध क्लार्क में अचानक
ही एक याकूब हबीबुद्दीन तुसी नामक बेरुपये पाखंडी ने मुगलों के वंशज होने का दावा पेश
करने से हड़कंप मच गया उक्त पाखंडी मीडिया के सामने आया और खुद को अयोध्या की विवादित
जमीन का वाजिब उत्तराधिकारी बताया. उसने दावा
किया के वो बहादुर शाह जफर का पर पोता है और बाबर उसके वंशज हैं और बाबर से लेकर बहादुर
शाह जफर तक उसके ही पुरखों ने मुग़ल सल्तनत के तौर पर राज किया. उसका दावा था ऐसे में
बाबरी मस्जिद या वर्तमान स्थिति में विवादित स्थल उसकी जागीर है और वह इसका मुतवल्ली
बनने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएगा.
अब सवाल ये उठता है के अभी तक ये वंशज
महोदय किस कुम्भकर्ण की नींद सो रहे थे जो उनको उठने में इतना वक्त लग गया. फिर इतिहास की इनको ज़रा कम जानकारी लगती है और लगता
है ये मोदी जी के वंशज हो सकते है. क्योके मोदी जी भी इतिहास की धज्जिया अपनी मर्ज़ी
से उड़ाते रहते है. इन महाशय को ये मालूम होना चाहिए के मुगलो के आखिर वंशज बहादुर शाह
ज़फर के सभी बेटो का सर कलम कर दिया गया था फिर ये पर पोते किधर से पैदा हो गए. अब अगर
ये महाशय मुगलो की किसी गलती का नतीजा है तो ये वंशज कहा से हो गए और बाबरी मस्जिद
का विवाद तो १९९२ में गहराया था फिर १९९२ से लेकर अभी तक क्या ये महाशय किसी गुप्त
मिशन पे थे या भाजपा की सरकार के आखिर दिनों का इंतज़ार कर रहे थे के कब भाजपा अपनी
आखरी सांसे गिने और कब ये उड़न तश्तरी या गरूड़ पक्षी की तरह पहुँच जाए भाजपा के लिए
संजीवनी बूटी ले कर.
अरे अब तो
ऐसे ठोंगी और पाखंडी ज़मीन फाड़ फाड़ के निकलेंगे ये लोग कोई और नहीं बल्कि सभी संघी आतंकवादीओ
के हामी है और सावरकर, गोलवलकर, गोडसे जैसे आतंकवादी इनके वंशज हे. वैसे भी हिन्दू
आतंकवाद पाखंड में ज़्यादा यकीन रखता है. पाखंडी साधु, पाखंडी सरकार, पाखंडी राजा, पाखंडी
कार्यभार तो इन जैसे पाखण्डिओ का दावा न्यायलय में दो मिनिट में हवा हो जायगा. इतिहास गवाह है के संघीयो ने सिर्फ और सिर्फ पाखंड
चापलूसी, का काम किया है कभी मुगलो की चापलूसी की कभी अंग्रेज़ो की.
न्यायलय को
इस पाखंडी के हर दावे की कस के जांच पड़ताल करनी चाहिए और अगर इसका दावा झूठा पाया जाता
है तो इसके ऊपर अदालत को गुमराह करने उसका समय बर्बाद करने और कई संगीन दफाओ में केस
बुक करना चाहिए. फिर न्यायलय को इस बात पे भी इसकी जांच पड़ताल करना चाहिए के इसने ऐसा
घिनोना काम किस के इशारे पे किया और इसका और इसके संघटन का इसके पीछे क्या उद्देश्य
था. कियोकि मुगलो के आखिर चिराग को तक क़त्ल कर दिया गया था और उनका एक भी वंशज नहीं
रहने दिया था. अगर ये महाशय मुगलो के किसी लौंडी गुलाम की औलादो से हे तो ये वंशज किधर
से हो गए.
हो सकता है इस पाखंडी ने सोचा होगा कुछ मिले या न मिले कम से कम नाम तो हो जाएगा मिडिया कवरेज मिलेगा ज़मीन जायदाद मिले न मिले ‘आज तक’ जैसे दलाल मिडिया के सामने अपने पाखंड के ज़रिये मशहूर तो हो जाउगा.
पत्रकार जुबेर
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