Sunday, 19 November 2017

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में को-एड की सिफारिश.



अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में ग्रेजुएशन स्नातक की पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं के क्लासरूम में अलग-अलग बैठने तथा अन्य मुद्दों पे एएमयू के विभिन्न मामलों की जांच के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने एक समिति का गठन किया था. अब समिति ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में ग्रेजुएशन स्नातक की पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं के क्लासरूम में अलग-अलग बैठने पर आपत्ति जताई है. UGC की समिति ने केन्द्र की मोदी सरकार से सिफारिश की है कि एएमयू में तत्काल प्रभाव से को-एड व्यवस्था से पढ़ाई शुरू कराई जाए. इसी समिति ने केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी है.


यूजीसी की समिति ने केंद्र को सौंपी अपनी रिपोर्ट में तर्क दिया है कि अलग-अलग पढ़ाई करने की वजह से छात्र प्रोफेशनल कोर्स से लेकर नौकरी के दौरान अपनी झिझक कभी दूर नहीं कर पाते हैं और इसका नुकसान भी उठाना पड़ता है.


यूजीसी की समिति ने शिया और सुन्नी के लिए अलग-अलग डिपार्टमेंट पर भी आपत्ति दर्ज कराई है. समिति में शामिल विशेषज्ञों का मानना है कि जब शिया और सुन्नी दोनों एक ही धर्म पर आधारित पढ़ाई करवाते हैं तो फिर दो अलग-अलग डिपार्टमेंट क्यों? समिति ने अपनी रिपोर्ट में इन दोनों विभागों को मर्ज कर देने की सलाह दी है.


एक दम सही निर्णय ये पत्रकार यूं.जी.सी. दुवारा दी हुई रिपोर्ट का समर्थन करता है और केंद्रीय नेतृत्व से निवेदन करता है की यूं.जी.सी. की सिफारिशें का सम्मान करे और तुरत लागू की जाए.  जहा सुन्नी-शिया, मेल-फीमेल किसी तरह का कोई भेद भाव ना हो. ये पत्रकार यूं.जी.सी. की रिपोर्ट से १००% इत्तेफाक रखता है के छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के दौरान अलग-अलग बैठने की व्यवस्था के चलते छात्र प्रोफेशनल कोर्स और फिर पढ़ाई के बाद नौकरी के दौरान भी अपनी झिझक दूर नहीं कर पाते. जिस वजह से उन्हें कई बार इसका नुकसान भी उठाना पड़ता है.  ये पत्रकार यूजीसी समिति की रिपोर्ट के उस हिस्से का भी समर्थन करता है जिसमे शिया और सुन्नी के लिए अलग-अलग डिपार्टमेंट पर भी आपत्ति दर्ज कराई है. समिति में शामिल विशेषज्ञों ने तर्क दिया है और उनका मानना है कि जब शिया और सुन्नी दोनों एक ही धर्म पर आधारित पढ़ाई करवाते हैं तो फिर दो अलग-अलग डिपार्टमेंट क्यों? समिति ने अपनी रिपोर्ट में इन दोनों विभागों को मर्ज कर देने की सलाह दी है.



यूजीसी समिति की रिपोर्ट के बाद अब ये पत्रकार केंद्रीय नेतृत्व से निवेदन करता 

है की यूजीसी समिति की रिपोर्ट पे आधारित सिफारिशें तुरंत लागू की जाए.

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