बंगलादेश का भ्रष्ट पहला हिन्दू मुख्य न्यायधीश
हिन्दू स्टेट (हिंदू राष्ट्र) के आतंकवादीयो का सहायक मीडिया किसी भी देश की छवि को मिटाने के लिए एक पल भी पीछे नहीं रहता है जो देश उनके धार्मिक सिधान्तो के अनुकूल नहीं हैं और अगर देश इस्लामिक है तो सोने पे सुहागा। इस बार मीडिया की गन्दी नज़रे इस्लामी राष्ट्र बांग्लादेश पर पड़ती है, जो एक समय था जब पाकिस्तान
का हिस्सा हुआ करता था। फिर भारत
ने सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र में ज़मीन के उस टुकड़े को भारत में मिलाने की कोशिश
की थी, लेकिन जब सर्वशक्तिमान सच्चाई के साथ था तो किसी भी देश की दुर्भावनापूर्ण,
गड़बड़ी, झूठी बात नहीं चली उसको अपने अंदर मिलाने की अवैध प्रयास को ज़बरदस्त झटका
लगा और यह एक और इस्लामी देश बन गया।
हिंदू स्टेट (हिंदू राष्ट्र) के आतंकवादीयो के मुख पत्र और मीडिया समूह 'आज तक' ने सबसे भ्रष्ट, मनी लॉन्ड्रिंग, कामुक बांग्लादेश के उच्चतम न्यायलय का मुख्य न्यायाधीश के संदर्भ में गलत और भ्रमित करने वाली खबरों का संचालन किया। खबर का शीर्षक तथा सार ही इस बात को साबित करता है के खबर को गलत रूप दे के पेश करने के पीछे विदेशी और मैत्रीपूर्ण देश की छवि को बदनाम करने का उद्देश्य था। तथा पक्षपातपूर्ण, सांप्रदायिक स्वभाव और आपराधिक इरादों के साथ ही इस्लामी देश की छवि को धूमिल करना था। खबर का शीर्षक कहता है, “बांग्लादेश सरकार से तकरार के बाद पहले हिंदू न्यायाधीश का इस्तीफा”.
इस हिंदू आतंकवादीयो के मुख पत्र 'आज तक' ने तथ्यों को छुपाया और खबर का संचालन इस तरह किया के प्रतीत हो के बंगलादेश उच्चतम न्यायपालिका का सबसे आपराधिक, भ्रष्ट सदस्य और उच्चतम न्यायिक प्राधिकरण अपराधी सुरेंद्र कुमार सिन्हा को अपने धर्म के कारण बांग्लादेश की इस्लामी सरकार द्वारा परेशान किया जा रहा है। जबकि सत्य यह है कि अपराधी सुरेंद्र कुमार सबसे भ्रष्ट व्यक्ति हैं दुर्भाग्यवश वह बांग्लादेश सरकार द्वारा भरोसे का पात्र बना और उसे बांग्लादेश के शीर्ष न्यायिक प्राधिकरण के पद पर सर्वोच्च न्यायालय के पहले हिंदू मुख्य न्यायाधीश बनने का अवसर मिला लेकिन उसने अपनी अयोग्यता से साबित कर दिया था कि वह सही और योग्य नहीं था उस सम्मान के लिए जो उसको दिया गया क्योकि वह भ्रष्ट था, मनी लॉन्डरिंग के कई मामलों में शामिल था, और सार्वजनिक राजस्व का दुरुपयोग किया अब इतिहास उसे बांग्लादेश के पहले हिंदू प्रमुख भ्रष्टाचार के रूप में याद करेगा, न की बांग्लादेश के पहले हिंदू मुख्य न्यायाधीश के रूप में याद करेगा। जब उस पर आरोप लगाए गए तो उसने एक महीने की छुट्टी ली, जो उसके आरोपों को दोषी साबित करता है, और साबित करता है के वह उच्च न्यायिक प्राधिकरण के रूप में सेवाओं को संचालित करने के लिए ईमानदारी से काम नहीं कर सका। फिर वो फरार हो गया और जांच में न शामिल हुआ और न ही सहयोग कर सका। फिर यकायक एक महीने की अवधि के बाद उसने सीधे ऑस्ट्रेलिया से अपना इस्तीफा भेज दिया, जिससे उस पर संदेह और भी बढ़ गया कि जो भी आरोप उसके खिलाफ किए गए हैं वह सच है।
यह शख्स बांग्लादेश का पहला हिंदू भ्रष्ट व्यक्ति हे जो न्यायिक सेवाओं में था और जिसने अपने भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए सीधे सरकार के साथ संघर्ष में आ गया, सरकार जो सही रास्ते पर थी। जुलाई महीने में बांग्लादेश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने भ्रष्टाचार में शामिल न्यायाधीशों के खिलाफ महाभियोग के प्रस्ताव को पारित बांग्लादेश सांसदों द्वारा एक विधेयक को खारिज कर दिया और सांसदों की शक्तियों को ठुकरा के समाप्त कर दिया। इस भ्रष्ट व्यक्ति सिन्हा ने 16वें संशोधन को खारिज कर दिया और इस तरह यह अधिक स्पष्ट हो गया कि वह मनी लॉन्डरिंग में शामिल है और अनैतिक तरीक़ो से पैसा कमाते हैं। इस व्यक्ति सिन्हा के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों की पीठ ने भी सिन्हा के इस फैसले पर उंगली उठाई थी और इस आपराधिक व्यक्ति सिन्हा की ओर संदेह किया था और उन्होंने बांग्लादेश के पहले हिंदू भ्रष्ट व्यक्ति के साथ काम करना बंद कर दिया। यह आपराधिक व्यक्ति सिन्हा बेइज़्ज़ती की तीव्र अपमान का सामना नहीं कर पाया और 13 अक्टूबर को छुट्टी का बहाना बना के देश से फरार हुए।
अब मेरे लेख के वाचको को खुद तय करना है कि क्या बांग्लादेश सरकार का कार्य वैध है या हिंदू आतंकवादीयो के मुख पत्र 'आज तक' के पक्षपातपूर्ण मानसिकता पर आधारित एक भ्रष्ट न्यायिक प्राधिकरण को हीरो के रूप में पेश करना क्योंकि उनकी हिंदू पहचान है और उनके लिए सहानुभूतिपूर्ण वातावरण बनाने के लिए समाचार शीर्षक और अभिव्यक्ति न जायज़।
अगर एक शीर्ष न्यायिक प्राधिकारी ने निष्ठापूर्ण ढंग से देश को लूटा और समझा कि बांग्लादेश भारत के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध रखता है, जहां मोदी प्रशासन में संसद में सांप्रदायिक, डकैतों, गुंडों, आतंकवादियों की मौजूदगी है, और हिन्दू आतंकिओ के भगवा आदेश की उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और न्यायाधीशों सहित न्यायिक अधिकारियों की भी हिम्मत नहीं के वह अवमानना कर सके. तो मोदी के आग्रह पे मुझे भी सामूहिक माफ़ी मिल जायगी और मोदी प्रशासन द्वारा मेरी भी रक्षा होगी। इस व्यक्ति सिन्हा ने
सोचा होगा के वो डाका डालेगा, देश को लूटेगा फिर भी उसे माफ़ी मिल जायेगी तो बंगलादेश में थोड़ी ही मोदी राज चल रहा है जहा डाकू, मवाली, आतंकवादी सभी संसद में बैठे है और जो वो फैसला कर दे उसको न्यायधीशों को भी मानना पड़ता है. बंगलादेश सरकार ने सही किया था जजों को भी भ्रष्टाचार से जुड़े हुए मामलो में महाभियोग की प्रकिर्या से गुजरने के कानून को रद्द नहीं होने दिया. ये महाशय पहले हिन्दू डाकू होंगे जो मुख्य न्यायधीश होते हुए बंगलदेश में रह के भी वाल्मीकि नहीं बन पाए तभी तो भगोड़े की तरह देश से भाग गया और ऑस्ट्रेलिआ से अपना स्तेफ़ा भेजा.
हिंदू स्टेट (हिंदू राष्ट्र) के मीडिया
हाउस ज़ी न्यूज़, आज तक, इंडिया न्यूज उनके संवाददाताओं और मोदी द्वारा खरीदे गए पत्रकारों, द्वारा ऐसी भ्रमित गलत और गड़बड़ी फैलाने वाली खबरों
का ही प्रसारण और संचालन किया जाता है. आजतक की एक महिला पत्रकार, जो नेशनल न्यूज में संबोधन के दौरान बेशर्मी
की सारी हदें पार करते हुए अपने नाम के बाद खुले तौर पर मोदी का नाम जोड़ती हे। यह बड़ा
चिंतन का विषय है कि यदि एक विवाहित महिला अपने नाम के बाद पति के अलावा अज्ञात व्यक्ति
के नाम का प्रयोग करती है, तो ज़ाहिर होता है उस व्यक्ति के लिए उसका प्यार किस हद तक
होगा जो अपने पति को नहीं बल्कि खुद को एक पाराये मर्द मोदी के लिए आत्मसमर्पण करने
और उसको संतुष्ट करने के लिए तैयार है। भगवा मीडिया ने पड़ोसियों और दूसरो पर गलत खबरों
को खूब चाव लेते हुए दिखाया है, लेकिन इस तरह की तस्वीरों को पूरी तरह उपेक्षित और
अनदेखी कर दिया है। मोदी जैसे सबसे शक्तिशाली प्रधान मंत्री के साथ विमान में अदानी
और कंपनी क्या कर रही है क्या मोदी के इस हिस्से पर संदेह करने का पर्याप्त कारण नहीं
है कि वह भ्रष्ट परम्पराओ में शामिल हैं और उसका सम्बन्ध अदानी, अंबानी, रामदेव जैसे
कारोबारी टाइकूनंस से जुड़ा हैं और ये लोग गुजरात और हिमाचल प्रदेश में आगामी चुनाव
के लिए पार्टी के लिए धन की व्यवस्था कर रहे हैं।
जो मीडिया हाऊस और पत्रकारों ने सही और सच्ची खबरों को प्रसारित करने की हिम्मत की, उन्होंने मोदी प्रशासन के क्रोध का सामना किया। एनडीटीवी पे मोदी सरकार की सही खबरों के प्रसार के लिए प्रतिबंध लगा दिया है जो मोदी की छवि को धूमिल कर रहा था। प्रणीत राय, रविश कुमार, राणा अय्यूब, सागारिका घोष ने मोदी प्रशासन के रोष का सामना किया और उनके सही समाचार परिसंचरण के लिए उनको परेशान किया गया। अभिसार शर्मा ने एबीपी समाचार की नौकरी छोड़ दी और सही खबरों से जनता को जागृत करने के लिए फ्रीलांस पत्रकारिता की शुरुआत की। ज़ी न्यूज़ के एक पत्रकार ने २०१४ से पहले ज़ी न्यूज़ मीडिया को पाकिस्तान पे झूटी मन घडन्त आधार पर गलत समाचारों को प्रसारित करने से मना कर दिया था। उन्होंने अपने वृत्तचित्र और शिकायत पत्र में सभी पत्रकारों को संबोधित करने के पश्चात ज़ी न्यूज़ से जॉब समाप्त किया।
यह पत्रकार बांग्लादेश सरकार से प्रार्थना करता है कि वह सिन्हा को ऑस्ट्रेलिआ से प्रत्यर्पित करे और भ्रष्टाचार के आरोपों के लिए फांसी पर लटकाए। मैंने इस व्यक्ति के लिए फ़ासी की मांग इसलिए की है क्योकि वो कानूनी पेशे का जानकार है उसने न्यायपालिका की गरिमा का दुरुपयोग किया और सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश होने पर वह भ्रष्टाचार, मनी लाँडरिंग और राजस्व के अनैतिक स्रोत में शामिल था और उसको हर जुर्म की सजा मालूम होते हुए भी उसने जुर्म किया जिसकी सजा उसके लिए मौत की सजा हे।

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