में एक पत्रकार हूँ जिसने ‘जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन’
में स्तनकोत्तर की उपाधि ली हे, लेकिन मेरी
भाषा और ज़हरीले बोल से मेरे बोहोत से शुभचिंतक और पाठक गण परेशान हे. जो मेरे शुभचिंतक हे वो सलाह देते हे की में भाषा
और क्रोध पे सय्यम रखूँ क्योकि आकस्मिक मेरे को कोई समस्या न आन पड़े. में मेरे सभी शुभचिंतको को धन्यवाद देता हूँ की
उन्होंने मेरे बारे में केयर की और जो पाठक गण हे जिनको मेरी ज़हरीली भाषा से दुःख हुआ
उनके लिए खेद प्रकट करता हू. लेकिन यहाँ पर एक बात
अवश्य बताता चलूँ की य भाषा और ज़हर में कहा से लाया, बहार से निर्यात तो किया नहीं
क्योकि मेरा किसी भी जिहादी तंजीम से न तो ताल्लुक हे और न ही में ऐसे किसी फंक्शन
या सेमिनार में जाता हूँ, जहाँ ज़हर की खेती होती होगी, जब मेरा जन्म भारत
में हुआ भारत में पड़ा भारत में कमाया तो य ज़हर भी भारत से ही मिला होगा। यहाँ के हालात अल्पसख्यक समुदाय के ऊपर ज़ुल्म राजनेताओ
के बड़े बड़े चुनावी वादे और चुनाव निकल जाने के बाद सब कुछ ख़त्म.
भाजपा को भारत के अधिकतर मुसलमानो ने मोदी के लच्छेदार
भाषण सून कर और अच्छे दिनों की उम्मीद पे वोट दिया था. लेकिन हुआ क्या भाजपा के आते ही दंगो की बारात आ
गयी हर एक रोज़ नया दंगा। संघ और भाजपा के खुद
के नेतागणो के ज़हरीले बोल मुसलमानो के लिए.
जब भी प्रधानमंत्री संघ और आतंकवादीओ को कुछ नसीहत देते एक नया ज़हरीला बोल आ
जाता, इतना ही नहीं उस ज़हरीले बोल पे अमल भी होता, जैसे की मुसलमानो और क्रिस्टी समाज
की ज़बरदस्ती नसबंदी करो उसके बाद उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में एक १५ वर्षीय मुलसमान
बच्चे की ज़बरदस्ती नसबंदी कर डालि. साध्वी
बालिका सरस्वती ने कहा मुसलमान लड़को को पत्थरों
से मारो अगर वो हिन्दू लड़कीयो से प्यार करते हुए पाये जाते है. उसके बाद दीमापुर का केस हो गया. भाजपा संसद योगी अदीदनाथ ने कहा १ हिन्दू लड़की के
बदले १०० मुसलमान लड़कियों को ज़बरदस्ती हिन्दू बनाओ, तो मेंगलोर में एक मुसलमान लड़की
को गन पॉइंट पे अगवा कर के बजरंगदल के प्रमुख ने ज़बरदस्ती शादी कर ली और उसके साथ होटल
में रेप किया.
हाल ही में १ जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अल्पसंख्यक
विरोधी बयानों पर 'संघ परिवार' को सीधा संदेश दियाहै। अपनी सरकार का एक साल पूरा होने
पर दिए ताजा इंटरव्यू में मोदी ने बाकायदा संघ परिवार का जिक्र किया। प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी ने अल्पसंख्यक विरोधी बयानों पर 'संघ परिवार' को सीधा संदेश दिया है और
कहा के किसी भी समुदाय के खिलाफ हिंसा और भेद भाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. लेकिन अगर कोई ऐसा करते हुए पाया गया तो उसके ऊपर
क्या कारवाही होगी ये कहना भूल गये जिसका रिजल्ट तुरंत आया.
मोदी की कडक वॉर्निंग और अल्पसख्यको के लिये
१ जून को दिया गया वक्तव्य का असर ये हुआ की
उसी रोज़ उत्तर प्रदेश के मुज़्ज़फ़्फ़रनगर में हिन्दू मुस्लिम फसाद हो गया यहाँ
य बात बताता चलूँ की मुजफ्फरनगर दंगो का आरोपी मोदी सरकार में मंत्री हे. मोदी की कडक
वॉर्निंग और नसीहत सिर्फ ज़ूबानी घोड़े बन कर रेह जाते है हर बार ऐसा ही होता हे मोदी
नसीहत देते हे और संघ नये शगूफे के साथ हाज़िर हो जाता हे. तो अब में मोहब्बत कैसे करू फिर ज़ेहरीले बोल न
निकले मेरी ज़ुबान से तो क्या निकले। दंगो की
वजह एक सलून में पहले अपनी शेव बनवाने को लेकर विवाद हो गया और सतेंदर नामक युवक ने
आसिफ की पिटाई कर दी जिस के बाद दोनों और से पथराव शुरू हो गया जिसमे कम से कम १४ लोग
ज़ख़्मी हो गये. और एक महिला को सर पे गंभीर चौट आई हे. मोदी जी आपसे एक निवेदन है जिस तरहा की सख्त ज़ूबान
बौल रहे उसी तरह् करवाही भी करे नहीं तो भारत की और सरकार की छवि अंतराष्ट्रिया समूदाय
मे बेहद खराब हूई है. मे एक अंतराष्ट्रिया पत्रकार हू और मेरे पास सभी प्रमुख अखबारो
की खबरे आती है. भारतीय मीडिया सरकार की कमियो को भले ही ना दिखाय लेकिन अंतराष्ट्रिया
उधोग जगत भारत मे निवेश नही करना चाहता है.
हरयाणा मे जो दंगल हूआ वो बिल्कुल संघ की दादागिरि थी. दंगल की वजह एक मस्जिद की ज़मीन थी, जैसा के आमतौर पे संघ, बजरंगदल और विहिप वक़्फ़ की ज़मीन को हड़पने के चक्कर में रहते हे और हरगिज़ नहीं चाहते की भारत में मस्जिद बने वो किसी भी तरह से विवाद पैदा करने में विश्वास रखते हे. यहाँ पर भी संघ ने शातिर तरीके से मस्जिद को गैर कानूनी और ग्राम पंचायत की ज़मीन पे कब्ज़ा कर के बनाई गई हे ऐसा दावा पेश किया। मुसलमानो ने मस्जिद के सारे पेपर ग्राम सभा में दिखा दिए उसके बाद विवाद न्यायलय पहुँचा वहां एड़ी चोटी का जौर लगा कर भी संघ य साबित नहीं कर पाया की मस्जिद ग्राम पंचायत की ज़मीन पे बनाई गई हे. और न्यायलय ने भी मोहोर लगा दी की मस्जिद की ज़मीन के पेपर कानूनन बिल्कुल सही है और मस्जिद गैर कानूनी नही है. फिर भी संघ ने दंगा फसाद किया और बेगुनाह लोगो को औरतो को मारा पीटा.
अब ऐसे में अगर मोदी सिर्फ ज़ुबानी घोड़े चलाते रहेंगे और कारवाही के नाम पे सिर्फ आश्वासन देते रहेंगे तो यक़ीनन मेरी ज़ुबान ज़हरीली होगी और मेरे मुख से अलफ़ाज़ ज़ेहर के रूप में कड़वे निकलेगे। तो अब मेरे पाठक और शुभचिंतक खुद फैसला करे की य ज़हर मेने भारत के खेतो से लिया हे जिसकी खेती मोदी सरकार के आने के बाद खूब पनप रही हे या विदेशो से निर्यात किया हे.
ज़ुबेर एहमद खान
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