अज़ीज़ नाज़रीन,
२०१४ के बाद जब ज़ाफ़रानी तंज़ीम ने भारतीय एवांन की ताक़त पर क़ब्ज़ा कर लिया, तब से इन्तेहापसन्द ज़ाफ़रानी अनासिरों ने तमाम अरब मुमालिकों, पाकिस्तान और कश्मीर समेत इस्लामी दुनिया में दरअंदाज़ी करना शुरू कर दिया। ये अनासिर बम धमाकों, इस्लामिक मुल्कों को कमजोर करने और इस्लाम के दुश्मनों के लिए जासूसी करने में शामिल थे।
जासूसी करने और इस्लामिक जमहूरियत ऑफ पाकिस्तान को तोड़ने की साजिश रचने के इलज़ाम में कई भारतीय जासूसों को पाकिस्तान में गिरफ़्तार किया गया था। हाल ही में कुलभोषण जाधव और तीन अन्य लोग इस्लामिक शिनाख़्त के साथ पाकिस्तान में रह रहे थे। वे झूठी और बेबुनयाद हदीसों के साथ मोमेनीन के दरमियान वस्वसे पैदा करने और इस्लामिक जमुहरियत में अनार्की पैदा करने में शामिल थे। जिससे यह कमजोर हो जाएगा और या तो बिखर जाएगा या फिर भारत इस पर क़ब्ज़ा कर लेगा। कुलभूषन जाधव को पाकिस्तान की आर्मी कोर्ट ने मौत की सज़ा सुनाई है. भारत ने आलमी अदालत में अपील की जिसे ख़ारिज कर दिया गया लेकिन मख़सूस दलीलें मंज़ूर कर ली गईं।
क़तर में साल 2022 में इस्लाम के सबसे बड़े दुश्मन और दहशतगर्द मुल्क इजराइल के लिए जासूसी करते हुए आठ भारतीय जासूसों को गिरफ्तार किया गया था। इन ज़ाफ़रानी अनासिरों को इसराइल के लिए जासूसी करने और फौज, बेहर और इस्लामिक ममलेकात के दीगर इदारों के एहम सुराग़ और जानकारी को इस्लाम और मुस्लिम दुनिया के सबसे बड़े दुश्मन दहशतगर्द मुल्क इज़राइल को साझा करने का मुजरिम पाया गया था।
इन कट्टर ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों को इस्लामिक ममलेकत में साबिक़ भारतीय नौसेना अफसर बोल कर दाख़िल हुए थे। अगस्त २०२२ में क़तर इस्लामिक ममलेकत की ख़ुफ़िया एजेंसी ने गिरफ़्तार किया गया था। ज़ाफ़रानी दहशत के इन आठ मेम्बरों को इज़राइल के लिए जासूसी करने का मुजरिम पाया गया था और क़तर की एक अदालत ने मौत की सजा सुनाई गई थी।
भारत ने क़तर अदालत के फैसले के खिलाफ भी उसी तरह अपील की, जैसे उसने पाकिस्तान की फ़ौजी अदालत के फैसले के ख़िलाफ़ की थी। मैं पूरे इस्लामी मुमालिकों से गुज़ारिश करता हूं कि वे भारतीय दहशतगर्दों, जासूसों, रॉ के एजेंटों या किसी और भारतीय एजेंटों, क़तल में शामिल एजेंसियों या इस्लामी ममलेकात की सालमियत को नुकसान पहुंचाने वाली एजेंसियों को आम माफ़ी न दें।
सज़ा ए मौत के लिए माफ़ी के अलावा, अगर कोई दूसरा रास्ता नहीं है, तो उन्हें यूं ही आज़ाद न होने दें, बल्कि मुआवज़े के तोर में माफ़ी के बदले में भारतीय ज़मीन मांगें। भारतीय तर्जुमे या एवांन के दस्तावेज़ (विधेयक) पर यक़ीन न करें बल्कि अक़वाम ए मुताहिदा को गवाह के सरपरस्त के रूप में शामिल करें। भारत की ज़मीन कुबूल करने से पहले आलमी फौज से मुहायदे पर दस्तख़त करने को कहें.
इस बार कश्मीर और बाबरी मस्जिद जैसे हालात नहीं होने चाहिए. दोनों ही मामलों में भारत सरकार ने एवान से मंज़ूर शुदा अपने ही क़ानूनों की ख़िलाफ़वर्ज़ी की और कश्मीर में फ़ौज की दरअंदाज़ी कराकर उसे भारतीय ज़मीन में मिला लिया और इस तरह कश्मीर के लोगों के साथ ग़द्दारी और धोखेबाज़ी की। हिंदू इन्तेहापसन्दों और बीजेपी ने बाबरी मस्जिद मामले में अदालत ए उज़मा में दिए अपने ही हलफ़नामे का पासो लिहाज़ नहीं किया है. भारतीय अदालत ए उज़मा ने बाबरी मस्जिद की ज़मीन भारत के "हिंदू डकैतों" को सौंप दी। अब वे “डकैती” की ज़मीन पर राम मंदिर की तामीर कर रहे हैं।
मुस्तक़बिल
में, अगर भारत सरकार अपने ही एवान की जानिब से मंज़ूर क़ानूनों की ख़िलाफ़वर्ज़ी करती है
और मुस्लिम दुनिया के साथ धोखाधड़ी करती है, भारतीय फ़ौज भेजकर मुस्लिम ज़मीन पर क़ब्ज़ा
करने की कोशिश करती है, तो उस वक़्त अक़वाम ए मुताहिदा मुदाख़ेलत करेगा और आलमी फ़ौज ज़मीन
की हिफ़ाज़त करेगी और भारतीय फ़ौज से लड़ेगी।
इसके अलावा क़तर सरकार से यह दरख़्वास्त है कि वह तमाम जुनूब छत्तीसगढ़ से लेकर तमिलनाडु तक, केरल को मिलाते हुए या पूरे शुमाली भारत जम्मू कश्मीर से लेकर मध्य प्रदेश तक, गुजरात को मिलाते हुए, भारत की ज़मीन के इल्हाक़ की मांग करें। जैसे ही क़तर या पाकिस्तान हुकूमत को भारत की जानिब से इल्हाक़ (विलय) का सर्टिफिकेट मिलता है, आलमी बरादरी और अक़वाम ए मुताहिदा की सरपरस्ती में भारत के पाकिस्तान या क़तर में इल्हाक़ वाले हिस्से की ख़ुदमुख्तारी की हिफ़ाज़त करने का बेन अक़वामी फ़ौज की यक़ीन दिहानी मिल जाती है। सभी शिद्दत पसंद हिंदुओं, संघियों के सभी दहशत के अड्डे, भाजपा के तमाम रकून को निकाल दें और ज़ाफ़रानी परचम को उखाड़ कर सब्ज़ परचम फेहरा दें।
इस्लामीक क़ानूनों के हिसाब से भारत के इल्हाक़ वाले हिस्से में अपने ख़ुद के कानून नाफ़िज़ कीजिये। भारतीय ज़ाफ़रानी अनासिरों ने झूठी और ओछी कहानियों पर मुसलमानों की जमीनें, घर और मस्जिदें हड़प लीं और इसे हिंदुओं को दे दिया।
यह इस्लामी दुनियां के लिए सुनहरा मौक़ा है जो भी भारत के ज़ाफ़रानी दहशत से परेशान है। अपने वतन में गिरफ़्तार किए गए संघी दहशतगर्दों पर इलज़ाम साबित होने की शक्ल में उन्हें मौत की सज़ा दी गई। अगर भारत सरकार माफ़ी के लिए अपील करती है, तो माफ़ी के बदले में भारतीय ज़ामिन के इल्हाक़ की मांग करें।
सहाफ़ी ज़ुबेर
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