Tuesday, 26 October 2021

मेरी पाक मोहब्बत, तुम्हारा धर्म युद्ध या लव जिहाद।

अज़ीज़ नाज़रीन,

हाल ही में बाबारे आज़म की क़ियादत में पाकिस्तान ने टी-२० आलमी क्रिकेट मैच में भारत को १० विकेट से शाकिस्त दी।   इधर पाकिस्तान जीता उधर भारत की टीम के चाहने वालों के यहाँ मातम पसर गया।   पाकिस्तान के जीतते ही तमाम भारत में अँधेरा छा गया और रौशन भारत को रात को पूरी लाइटें बंद कर के अँधेरे में ग़र्क़ाब करने का आगाज़ हुआ।

उसके बाद इल्ज़ामात का दौर शुरू हुआ, फिर क़ुर्बानी किसी की तो देना थी, अब बली का बकरा ना मिला तो गाये को ही ज़िबाह कर डाला।  जी हां नाज़रीन इस क़ुर्बानी देने में सबसे बेहतर कौन हो सकता था सो मोहम्मद समी को ज़ाफ़रानी ट्रोल आर्मी ने ट्रोल किया और उस हद तक ट्रोल किया की उनके सोशल मीडिया के तमाम एकाउंट्स पर बेहद अदना दर्जे की गाली गलोच, पाकिस्तान परस्त, ग़द्दार जैसे अलफ़ाज़, रिश्वत ख़ौरी के इलज़ाम यहाँ तक की ज़ाती इलज़ाम भी लगा दिए गए।  

अब यह बात इस सहाफी को कहने में ज़र्रा भर गुरेज़ नहीं है की टीम इंडिया में १२ खिलाड़ी थे और सभी नाकाम साबित हुए।   फिर कमो बेश खिलाड़िओं ने गेंदबाज़ी की जो सभी नाकाम साबित हुए फिर अकेले मोहम्मद समी को हाशिये पर लेने के पीछे उनका मज़हब ही है।   और यह ज़ाफ़रानी ज़ेहनियत का अदना दर्जा है की अगर पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कोई भी मुसलमान अपनी बेहतरीन कारगरदेगी करते हुए भी नतीजे नहीं दे पाया तो उसको पाकिस्तानी और गद्दार बोल दिया जाता है।  और यही शिकायत इस सहाफी की तमाम मुस्लिम अवाम से है अगर तुमने भारत के लिए अपनी गर्दन भी कटवा ली तो यह संघी, बीजेपी वाले और शिद्दत पसंद हिन्दू कभी तुमको वतन का वफादार नहीं समझेगें।   बल्कि तुम्हारी क़ुर्बानी में भी वोह बोल देंगें की उसको तो गर्दन कटवाने का शौक़ था वतन की मोहब्बत में गर्दन थोड़ी कटवाई है।  तुम्हारे हर अमल पर तुमसे भारत की वफादारी का सबूत मागेंगे। 

उसके बाद बीजेपी के सियासी दीमकों ने इस मुद्दे पर अपना और तंज़ीम का सियासी नफ़ा देखने का आगाज़ कर दिया।  जम्मू में हिन्दू और घाटी के अवाम ने पाकिस्तान की जीत पर जश्न मनाया।  उसके ऊपर बवाल मच गया गिरफ्तारियों का दौर शुरू हुआ।   लेकिन इसमें भी मुत्तसिब और फ़िरक़ापरस्त ज़ेहनियत गिरफ्तार किये गए सिर्फ ख़ास मज़हब के बच्चे थे जबकि जम्मू के अवाम को हिदायत दे कर जाने दिया गया।  जो ज़ाफ़रानी दीमक पाक की जीत के जश्न पर तनक़ीद कर रहें हैं और ऊल जलूल बयान बाज़ी कर रहें हैं में उनसे एक सवाल करता हूँ।

क्यों भाई यह क्या शिद्दत पसंद काफिरों की हिटलर शाही है की जो भारत में रहें उसी की इबादत करें और उस ही टीम की जीत पर खुशियां मनाये, उसी के बारे में सोचे उससे आगे सोच ही नहीं सकता।  इंसान उसी की जीत और हार पर खुशी और सौग बनाता है जिससे उसकी मोहब्बत होती है।  और तुम लोगों ने तो मोहब्बत पर क़ैद लगा दी है अब जज़बात और एहसासात पर भी बंदिश लगा रहे हो।  हर इंसान की अपनी पसंदीदा टीम होती है, और वोह उसके लिए चीयर करता है अब किसी की टीम पाकिस्तान पसंदीदा है तो किसी की हिंदुस्तान।   फिर अपनी पसंद की टीम के जीतने पर अगर कोई खुशी का इज़हार कर रहा है तो तुम उसके इज़हारे ख़यालात और जज़बात पर ग़द्दारी का तमग़ा कैसे लगा सकते हो। 

बिल फ़र्ज़ जिस रोज़ भारत हारी थी उस रोज़ हिन्दू अक़ीदत मंदों के लिए कोई खुशी का मौक़ा होता, और वोह खुशी का इज़हार करते भारत की हार को फरामोश कर के तो क्या उनके ऊपर भी  वही फलसफा लगाते जो आज बीजेपी की दीमकें झूठे और बेबुनयाद इलज़ाम लगा कर मुस्लिम अवाम को हरासा करना चाहती है।  अपनों की खुशी हर कोई मनाता है उसमे वतन परस्ती और ग़द्दारी कहाँ से आ गई।    

अब बीजेपी वाले, संघी और शिद्दत पसंद हिन्दू हर मुद्दे पर मुस्लिम अवाम को हाशिये पर ले लेते हैं भले ही उनकी गलती हो या ना हो।   चलिए आपका फलसफा मान लिया की हिंदुस्तानी टीम से मोहब्बत का इज़हार करो।  लेकिन एक तरफा मोहब्बत कैसे ख़ुशगवार नताइज देगी।   हम हिंदुस्तानी टीम की मोहब्बत बा दिले नखास्ता कर लेंगें लेकिन जब किसी मुस्लिम लड़के और हिन्दू लड़की की मोहब्बत सामने आये तो उसको लव जिहाद का नाम मत देना। 

यहाँ पर हिन्दू शिद्दत को दो बातें वाज़े करना चाहता हूँ, पहली तुम्हारी ज़ेहनियत दोगली है तुम लोग हर उस मुद्दे पर बवाल करते हो जिसमे तुमको सियासी नफा दिखता है।   भारत से मोहब्बत का तो महज़ एक बहाना है, ऐसा कर के तुम सियासी नफा देख रहे हो।  बिलफार्ज पाकिस्तान की जीत पर किसी ने पटाखे जलाये या इज़हारे तश्क्कुर किया तो इतना वबेला क्यू मचाया जा रहा है। अगर बीजेपी वाले, संघी, इन्तेहापसन्द हिन्दू भारत की टीम से मोहब्बत करने की बात करतें हैं ठीक है हम हमारे दिल को भारत की टीम के लिए फ़ारिग़ रखेंगे। लेकिन अगर किसी हिन्दू लड़की से किसी मुस्लिम लड़के की मोहब्बात हो जाए तो लव जिहाद, हिन्दू खतरे में आ जायेगे और ना जाने क्या क्या बोल कर एक्शन मत लो। तुम ही तो क़ानून बना रहे हो ना। फिर मोहब्बत भी हम उसी से करेगें जिससे दिल मिलेगा। ठीक है तुम अपने क़ानून वापिस ले लो और पुलिस हिन्दू लड़की और मुस्लिम लड़के की शादी मोहब्बत के मुद्दे पर कोई एक्शन ना ले तो हम हिन्दुस्तान की क्रिकेट टीम के लिए सोच सकतें हैं। 

दूसरी बात लड़के और उसके घर वालों को पूरा इख़्तेयार होगा की वोह हिन्दू लड़की को अपने इस्लाम मज़हब पर चलाएं, फिर हिन्दू लड़की की किसी भी क़िस्म की कोई भी शिकायत और अर्ज़ी पर ग़ौर ना किया जाए, की मुझे ज़बरदस्ती इस्लाम क़ुबूल करवाया जा रहा है, कियोंके ऐसी शिकायतें आम तोर पर हिन्दू दहशतगर्दों के दबाव में आ कर दी जातें हैं, उनका हक़ीक़त से दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं होता है।

यही हिन्दू दहशत का दोग़ला और दोहरी नीति है एक जानिब मोहब्बत करने को कहते हो दूसरी जानिब मोहब्बत करने पर क़ानून बनाते हो गिरफ्तार करते हो.  मेरा एक ही फलसफा है या तो मोहब्बत करो या नफरत, फिर मोहब्बत करो तो माशूक़ की हर चीज़ से मोहब्बत होती है और नफरत में तो कोई गुंजाइश ही नहीं है.

Zuber

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