Monday, 12 April 2021

मलून सरकश शयातीन वसीम और नरसिंहानंद वलियों की गिरफ्त में।


नाज़रीन वसीम रिज़वी जैसे मुनाफ़िक़ दौरे हाजरा में ही नहीं बल्कि हर दौर में मौजूद थे। ख़्वारा जो अपने आपको बोहोत ही परेज़गारमुतक़्क़ी और इस्लाम का अलमबरदार तसव्वुर करता था उसकी जानिब रसूले अरबी ने अग़श्त्री दिखा कर सहाबा से कहा था देख लो इसको, इसकी नस्ल से ऐसे ऐसे लोग पैदा होंगे जिनकी इबादतक़यामुल लेलसदक़ा शरीयत ऐसी होगी की तुम इनके सामने अपने आपको अदना और हक़ीर तसव्वुर करोगे लेकिन वोह लोग इस्लाम से ऐसे ख़ारिज होंगे जैसे कमान से तीर।  इस मुद्दे पर २ तीन मज़मून २०१८ में भी शाया किये जा चुके हैं। 

नाज़रीन अब असल मुद्दे वसीम पर आतें हैं।  जिसकी क़ुरान करीम से २६ आयात को हटाने की पेटिशन आला अदालत ने खारिज कर दी इतना ही नहीं उसके ऊपर ५०,००० का जुर्माना भी लगा दिया।   यह वही रिज़वी था गुजिश्ता एक साल क़ब्ल तक हर उस मुद्दे पर जो इस्लाम से जुड़ा होता था लंगूर-लँगूरनियों के सामने बैठ कर बरहना होता था और लँगूरनियाँ इसको नंगा देख कर खूब लुत्फ़अन्दोज़ होती थी। चाहे बाबरी मस्जिद होट्रिपल तलाक़मदरसा बेनक़ुरान की बेहुरमतीमाइक पर अज़ानक़ुर्बानी हर मुद्दे पर इसकी मुनाफ़ेक़त सोच अलग ही होती थी।   बरहाल १ साल के अंदर चीज़ें तेज़ी से तब्दील हुई।   इस मुनाफ़िक़ ने २६ आयतों को हटाने की पेटिशन सिर्फ भाजपा और लँगूरनियों की ताक़त के बलबूते डाली थी।   इसने सोचा था की जिस तरह दिगर मुद्दों पर हर लँगूरनी और भाजपा की हिमायत इसको मिलती रही इस मुद्दे पर भी बड़ी वह वाही होगी।   इतना ही नहीं इसने इस नज़रिये पर की सुप्रीम कोर्ट तो भाजपा की एजेंट है मेरे हक़ में ही फैसला देगा, सहाफी इजलास में बड़ी बड़ी बातें बोल डाली।   में जंग आखिर सांस तक लडूंगा और अगर कभी भी ऐसा महसूस हुआ की में जंग हार रहा हूँ या सुप्रीम कोर्ट में फैसला मेरे हक़ में नहीं आया तो ख़ुदकशी कर लूँगा। 

ऐसा ही दावा इस मलून ने मोदी के २०१९ में ना जीत पाने पर किया था।   बारहाल २०१९ का इंतेखाब भारतीय जनखा पार्टी (बीजेपी) ने जालसाज़ी और फरेब से जीत लिया तो इसका हौसला और बढ़ गया।हर मुद्दे पर ख़ुदकशी कर लूँगा।   इसको बोहोत यक़ीन था जिस तरह राजा और तानाशाह मोदी भारत की हर हूकूमत के ज़ेरे इंतज़ाम इदारों पर हूकूमशाही कर रहा है सुप्रीम कोर्ट तो उसके पैरों के नीचे रेंगने वाला कीड़ा है जैसा चाहेगा मोदी फैसला ले लेगा।   लेकिन ऐन वक़्त पर भाजपा ने भी हाथ खींच लिया और शाहनवाज़ ने साफ़ अलफ़ाज़ में इस दिमागी मरीज़ की मज़म्मत की और कहा भाजपा इस मुद्दे पर वसीम के साथ नहीं है।   

अब बाबा कर लो ख़ुदकशी की तैयारी और हाँ कब और कहाँ करोगे ज़रा वीडियो में बताते जाना।   तुम इस बात का भी एतेराफ कर चुके हो की मरने के बाद मुझको दफनाया नहीं जाए बल्कि जला दिया जाए।  वैसे भी तमाम फ़िक़ह इस्लाम ने तेरे को इस्लाम से ख़ारिज कर दिया है और किसी भी क़बरस्तान में दफ़नाने की इजाज़त नहीं है।  तो तेरी ख़्वाहिश पूरी होगी तेरे को जलाया ही जाएगा।  कहीं शमशान घाट वाले इस मुद्दे पर बंट  ना जाए और तेरे को जलाने के मुवाफ़ेक़त में कोई नहीं आये क्योंकी तेरा तो मज़हब ही कोई नहीं। अगर ऐसी सूरते हाल पैदा होती है तो तेरी लाश को चील कव्वे खायेगें।  तेरे एहले ख़ाना भाई बंद पहले ही तुजसे क़ता ताल्लुक़ कर चुके हैं.  

दूसरा एक वोह दहशतगर्द यती नरसिंहानंद जिसने हाल ही में नबी यूल अरबी के ऊपर हद दर्जे की अदना तरीक़ेकार हिकमत के साथ सहाफी इजलास किया था।   वैसे भी यह दहशतगर्द हर मुद्दे पर मुसलमानों और इस्लाम से बेहद बुग्ज़ और कीना रखता है।  यह महाशय इस्लाम को पूरी दुनिया से ख़तम करने के अपने मिशन पर हैं।  इनको महात्मा गाँधी गद्दार हिन्दू दुश्मन आतंकी और साबिक़ वज़ीरे जम्हूरीया मरहूम अब्दुल कलाम में एक इस्लामिक दहशतगर्द दिखता है।  

बरहाल इसका भी इलाज़ किसी ख़्वाजा साहब के जानशीन और चाहने वाले फ़क़ीर ने कर दिया है।  जिस दिल्ली की सरज़मीन पर सहाफी इजलास कर के इस मलून ने ज़हर अंगेशी की थी उसी तर्ज़ पर उस फ़क़ीर ने ८ रोज़ का वक़्त दिया है जिसमे इस मलून नरसिम्हा नन्द के साथ साथ मिडिया की उन तमाम काली भेड़ों को भी मदू किया गया है जो इस्लाम और मुसलमान नाम आते ही अमलपेरा हो जाते थे।   और झूट फरेब की बुनयाद पर इस्लाम को ज़लील करते थे मुस्लिम अवाम को बेइज़्ज़त करते थे।ऐसी मीडिया की तमाम काली भेड़ें आये अवाम का हुजूम आये और ना सिर्फ यह मलून नरसिंहानंद बल्कि उसके साथ साथ उसके तमाम चेले चमचे पंडित अपनी अपनी मुक़्क़दस किताबें ले कर और जादूगर अपनी अपनी काले जादू का इल्म ले कर आएं और बड़ा सा अलावा जलाया जाए और उस अलावे में वोह तमाम पंडित अपनी अपनी किताबों के साथ और जादूगरी अपनी काली विद्या के साथ दाख़िल हों और वोह फ़क़ीर अकेला क़ुरान के साथ दाखिल होगा.

मज़ीद उन्होंने ललकारा जो बच गया उसी का मज़हब कामिल है।  तो चलो चमचो लंगूर और लँगूरनियों तुम ट्रिपल तलाक़ पर तो बड़ी बड़ी बातें करते नहीं थकते थे।  ब्रेकिंग न्यूज़ चलाते थे हर मीडिया हाउस पर किसी ना किसी बाज़ारू औरत को पकड़ कर बिठा देते थे जिसको ना हदीस का इल्म और ना इस्लाम से वाक़फ़ियत उनमे से ८० फ़ीसद तो काफिर और ऐसी होती थी जिनका इस मुद्दे से कोई ताल्लुक़ भी नहीं होता था।   तो अब ब्रेकिंग न्यूज़ चलाओ और आ जाओ मैदान में अगर तुम तमाम लंगूर लँगूरनिया एक बाप के जाइज़ औलाद हो, तो करो ललकार उस फ़क़ीर की मंज़ूर और जलाओ अलावा देखे कौन है होलिका और कौन है प्रलाद।   हो जाए फैसला। 

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