Thursday, 31 May 2018

बहुमत से अल्प मत तक का सफर.


बहुमत से अल्प मत तक का सफर.  भाजपा के तमाम मंत्री संत्री बहुमत के अहंकार में डूब के बड़ी बड़ी बातें करते हुए दिखते थे. संबित से ले कर योगी और योगी से लेकर खुद प्रधान हिटलर.  किसी भी समाज के लोगो को कम समझ के आंकना फिर उसपे भक्तों का अल्लड और फूहड़ ट्रोलिंग मिजाज़ भाजपा को भारी पड़ा. ऊपर वाले के यहाँ देर है अंधेर नहीं. कहाँ भाजपा अकेले है सदन में २८० का अकड़ा रखती थी और कहाँ आज २७१ बहुमत से मात्र एक ज़्यादा. अब अगर मोदी नामक और भाजपाई अहंकारी जुबां और कार्यशैली की वजह से कही सिर्फ २ सांसदों ने इस्तीफा दे दिया तो भाजपा सरकार अल्प मत में आ जायगी और अगर घटक दलों में से किसी ने भी हाथ खींच लिया तो सरकार गिर जायगी. जो सरकार बहुमत के अहंकार में कुछ भी ऊट पटांग निर्णय ले रही थी किसी भी समाज के मज़हबी एतेक़ाद में हस्तक्षप करने की जुर्रत कर रही थी वह खुद अपनी सरकार बचाने के लिए मोहताजी की बैसाखी तलाश करते हुए दिखेगी.

इतना अहंकार के किसी भी समाज के धार्मिक मामलो में हस्तक्षेप करना, उसी समाज के धर्म गुरुओं की अनदेखी कर और उनसे विचार विमर्श किये बगैर सदन में हिटलर रुपी बिल पास करना.

कहाँ अकेले ही सदन में बहुमत का अकड़ा पार करने वाली भाजपा अब ५ साल भी पूरे करने में सक्षम नहीं होगी. वैसे भी भाजपा सरकार इतिहास तब्दील करने में माहिर है. अब खुद ही कही इतिहास बन के ना रह जाए और देश की जनता मिसाल दे उस हिटलर और अहंकारी रावण की जिसके पास अपूर्व सेना के होते हुए भी वो रावण ५ साल पूरे करने में सक्षम ना रहा.   

एक बार फिर भाजपा को इस पत्रकार की चूनौती मॅहगी पड़ी जो उसने २८ मई २०१८ सुबह ९ बज के ५० मिनिट पे आज तक के एक समाचार के ऊपर दी थी.

JournalistZuber Ahmed Khan 
28 May at 09:51  
 
इन्साफ होगा और ज़रूर होगा ये तो आतंकिओं की अदलिया से बहार आ गए लेकिन एक अदालत और है. जिस तरह से आप सभी ने देखा होगा जिस जिस ने क्राइम किया और अपने राजनैतिक रसूख के ज़ोर पे बहार आ गए उनके साथ ऊपर वाले ने क्या किया. हिन्दू आतंकवादी और मोदी एडमिनिस्ट्रेशन ज़्यादा खुशी ना मनाये उनकी खुशी जल्द ही मातम में बदलने वाली है.

अब मनाओ मातम भाजपाईओं इसके बाद इस पत्रकार को भाजपा नामक दैत्य और हिटलर रुपी रावण का अहंकारी बने रहने का कोई भी दूसरा कारण समझ में नहीं आता. अब तो इन लोगो को अपनी कार्यशैली और अहंकारी भाषा पे रोक लगाना ही पड़ेगी. अगर फिर भी भाजपाई वही पुराने बहुमत वाले रंग में रहते है तो २०१९ में उनको इसका भयावह परिणाम देखने को मिलेगा.





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