Tuesday, 15 May 2018

कर्णाटक की अनैतिक जीत की तपिश वाराणसी की जनता ने भोगी.


ये पत्रकार समय समय पे भाजपा, संघ और भक्तो को सिक्योरिटी अलर्ट जारी करता रहता है. फिर भी शायद उनकी बुद्धि भ्रष्ट हो ही गई है.  इस पत्रकार की खुली चूनौती है भाजपा हिटलर उसका सहयोगी लक्ष्मण को के जब जब तुम फरेब करोगी और झूट, पाखंड के आधार पे अनैतिक तरीके से सत्ता का सुख भोगने की कोशिश करोगे तुमको उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.  और जब जब तुम बे गुनाहों को मरोगे तुमको अपनों को कंधो पे ढोना पड़ेगा.  २०१७ से लेकर अप्रैल २०१८ तक लेखक इस विषय पे अनगिनत लेख लिख चूका है. 

हाल ही में ई.वी.ऍम. में गड़बड़ी मचा के कर्नाटक में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी तो बन गई लेकिन फिर भी सत्ता से दूर रही. फिर जो गुन्हा उसने अनैतिक तरीके से चुनाव जीतने का किया था उसका ख़मयाज़ा तो जनता को ही चुकाना था.  क्योके देश का पंत प्रधान इस सब झूटी और फरेबी जीत में भागीदार था तो जवाल पंत प्रधान के संसदीय छेत्र की जनता को चूकना था. 

शाम ५ बजे तक स्तिथि साफ हो गई और भाजपा के खेमे में १०४ सीटें आई जिसकी वो कताई हकदार नहीं थी.  और ५.४५ मिनिट पे वाराणसी में भयंकर हादसा हो जाता है.  एक निर्माणधीन पूल गिर जाता है जिसकी चपेट में आ के कुल १२ लोग मौके पे ही मारे जाते है और कई मलबे में दब जाते है.  मरने वालों का आकड़ा बढ़ने की उम्मीद है.

फिर से ये बात सिद्ध हो गई के जब जब भाजपा गैर कानूनी हथकंडे अपना के चुनाव जीतने की कोशिश करेगी उसका भुगतान आम जनता को करना पड़ेगा.  कर्नाटक की १०४ सीटों पे भाजपा की जीत और वाराणसी का हादसा इस बात का सबूत है के भाजपा १०४ की भी हकदार नहीं थी.  क्योके भाजपा से ना सिर्फ उत्तर भारत बल्कि समूचा भारत त्रास है. लेकिन फिर भी वो जीत रही है मतलब साफ़ है गड़बड़ी मचा के जीत हासिल की जा रही है.

भाजपाइयों को सत्ता की भूख है अमित और हिटलर कहते फिरते है कांग्रेस मुक्त भारत लेकिन उस मुक्ति में तुम अपने कितने ऊपर पंहुचा रहे हो. क्योके तुम कांग्रेस को अनैतिक तरीके से मुक्त कर रहे हो तो ऊपर वाला तो सब देख रहा है.   

ये पत्रकार कांग्रेस का एजेंट या स्पोक पर्सन हरगिज़ नहीं है और जब जब कांग्रेस गलती करेगी उसको भी हाशिये पे लिया जाएगा. लंगूर पत्रकारों की तरह नहीं अंजना ॐ कश्यप भाजपा की गुलाम सिर्फ रूझानों पे इतनी उत्तेजित हो गई के उसने भाजपा को जीता हुआ घोषित भी कर दिया. इतनी उत्तेजना में भर गई के प्रत्याशिओं से सवाल भी कुर्सी से फुदक पुदक उचक उचक के पूछ रही थी. फिर जब फाइनल टेली आई तो समूची गर्मी उत्तेजना अंजना की ठंडी हो गई. और रही सही कसर इस हादसे ने पूरी कर दी.

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