अज़ीज़ नाज़रीन,
कांग्रेस के आला किरदार रकून पार्लियमान जनाब मौअज़िज़ डीके सुरेश ने बटवारे का बिगुल फूंक दिया है।
मरकज़ी बजेट पर जवाब देते हुए कांग्रेस रकून पार्लियमान जनाब डी के सुरेश ने बरोज़ जुमेरात को कहा अगर मुख़्तलिफ़ महसूल से वसूल होने वाली रक़म के बटवारे में जुनूब के साथ हो रही नाइन्साफ़ी को दुरस्त नहीं की गई तो जुनूबी सूबे अलहदा मुल्क की मांग करने पर मजबूर हो जायेगें। उन्होंने मज़ीद दावा किया की जुनूब से जमा रक़म को हुकूमत शुमाली भारत में बाँट रही है, और जुनूबी भारत को उनका माक़ूल हक़ नहीं मिल रहा है।
कांग्रेस सियासतदां जनाब डी के सुरेश ने एवान में मज़ीद कहा हमारी मांग है की हमें अपने सूबे से जी. अस.टी., सरहद टैक्स और बराहे रास्त टैक्स में अपना हिस्सा मिलना चाहिए। हम जुनूबी भारत के साथ बोहोत नाइन्साफ़ी देख चुके हम हमारे हिस्से के पैसे को शुमाली भारत में बँटते हुए देख रहे हैं। अगर आज हम इसकी मज़म्मत नहीं करेगें तो आने वाले दिनों में जुनूबी भारत के लिए एक अलहदा मुल्क की तजवीज़ रखने की नौबत आ जाएगी।
कांग्रेस के सियसतदाँ की इस दिलेरी के लिए यह सहाफ़ी उनकी हौसला अफ़ज़ाई करता है। आज के नए भारत में जहाँ दहशतगर्दी, गुंडागर्दी, ज़ुल्म, नाइन्साफ़ी, हुकूमत के ज़ेरे इंतज़ाम दहशत अपने ऊरूज पर है ख़्वाह उस पर मोदी, योगी, अमित शाह जैसे ज़ालिमों दरिंदों की नस्ल कुशी और इंसानी क़त्ल ए आम की ज़ेहनियत के होते हुए इस तरह का जारिहाना बयान क़ाबिल ए तारीफ़ है।
कम से कम यह तो साबित हो गया की कांग्रेस तंज़ीम और उनके कोई भी नुमाइंदे आने वाले दिनों में मोदी की हिटलर शाही ज़ुल्म और बर्बरियत के आगे झुकने वाले नहीं हैं। अगर झुकने की नौबत आई तो मोदी हुकूमत को ही झुकना पडेगा नहीं तो होगी मज़ीद तबाही और मौजूदा ख़ाना जंगी पहुंचेगी अपने हतमी मरहले की जानिब।
जुमेरात का बयान मुस्लिम क़ियादत के मुँह पर एक तमाचा है। आज के नए भारत में जिस हिसाब से मुस्लिम अवाम को गाये बैल की तरह तसव्वुर कर के हकाला जा रहा है और उनके तमाम इंसानी हुक़ूक़ छीने जा रहें हैं उससे तो बेहतर होता कोई मुस्लिम नुमाइंदा एवान में ना ही होता तो बेहतर होता। मस्जिदों से ले कर घरों रोज़गार, मज़हब, तालीम, तिब्बी इमदाद, खान पान, पहनावे से ले कर हर मुद्दे पर मुस्लिम हक़ तलाफ़ी की जा रही है। यहाँ तक की अब तो हिन्दू शिद्दत के सामने उनकी बहिन बेटियां भी मेहफ़ूज़ नहीं हैं। फ़िर भी एवान के किसी मुस्लिम नुमाइंदों ने कभी यह नहीं बोला अगर हमारी नाइन्साफ़ी बंद नहीं हुई तो हम तोहसीह के बारे में सोच सकतें हैं।
अमूर अकलियती मामलों के वाज़ारतख़ाने ने अकलियतों के बजट में कटौती कर दी थी। फ़िर भी तमाम मुस्लिम नुमाइंदे ख़ामोश रहे। मुसलमानों की स्कॉलरशिप कम कर दी फ़िर भी चारों जानिब ख़ामोशी छाई रही। मुस्लिम तालिब इल्म और तुलबात को आला तालीम से महरूम कर दिया फ़िर भी ख़ामोशी छाई रही। मुसलमानों के घरों, रोज़गार, ज़मीन असासे ज़प्त कर उनके ऊपर दहशत गर्द ज़ालिम खूंखार क़ाफ़िरों की बस्ती बसा दी गई, एवांन से नुमाइंदगी ख़तम की गई फ़िर भी ख़ामोशी छाई रही।
ख़ुदारा अब तो बोलो अपना मुँह खोलो अब जो बटवारे की चिंगारी कांग्रेस ने सुलगाई है उसको बूझने मत दो और मज़ीद उसके अंदर आतिशी मसाले डालते रहो।
बिलडोज़र से मुस्लिम अवाम को तबाह करने की हिकमत योगी ले कर आया था उसके बाद वोह हिकमत आम हो गई और तमाम हिंदुस्तान में मुस्लिम बस्तियां घर बंगले रोज़गार मस्जिदें मदरसे तबाह किये गए।
मुस्लिम नुमाइंदों अब तो जागो। अगर क़ौम के लिए मिल्लत के लिए काम नहीं कर सके तो तुम्हारी एवान में मौजूदगी किसी काम की नहीं है। और यह वतन से गद्दारी हरगिज़ नहीं होगी। जब हुकूमत में बैठे हुए लोग सरकार हिन्दू राष्ट्र के लिए काम कर रही है अपने ही बनाये हुए क़ानून को नहीं मान रही है तो तुमको भी हक़ है भारत के बटवारे के लिए मिल्लत के हक़ के लिए काम करो। अगर वतन वतन खेलते रहे और सरकार मुस्लिम अवाम को तबाह करती रही बिल आखिर जब सब तबाह हो जायेगे तो ना ही तुम्हारा वतन रहेगा और ना ही तुम क़ौम और मिल्लत के लिए हमदर्द साबित होंगे। कियोंके जब भारत हिन्दू राष्ट्र बनेगा तब तुम्हारा किया बनेगा।
सहाफ़ी ज़ुबेर

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