Tuesday, 2 November 2021

मुनाफ़िक़ सोच के ऊपर अल्लाह और उसके फरिश्तों की लानत है।

अज़ीज़ नाज़रीन,

पाकिस्तान के वज़ीर और मुसलमानों के सबसे क़वी मुल्क और अज़ीम रहनुमा के बयान ने काफिर मुल्क के तमाम ज़ाफ़रानी कीड़ों और उसके मुवाफ़िक़ो को अंगार लगा दी है।   अब मुसलमानों की सबसे अदना और छोटी सोच रखने वाली तंज़ीम जमीयतुल ओलमा ए ज़ाफ़रान हिन्द का अदना मुलाज़िम मौलाना मेहमूद ज़ाफ़रानी की अदना सोच, मुसलमानों के साथ ग़द्दारी, काफिर मुल्क मुसलमानों के दुश्मन की ज़ाफ़रानी हामी सोच सामने आई है।   उस काफ़िर गुलाम ज़ाफ़रानी के सवालों का जवाब दे कर सहाफी जुबेर ने धज्जियाँ उड़ा दी.  पेश ख़िदमत हैं उसके सवालों पर सहाफी जुबेर के जवाब।

सवाल:  पाकिस्तान कौन होता है मुसलमानों के बारे में फ़िक्र करने वाला।  

जवाब: जवाब है जब तुम कुफ्र के साथ हो गए ज़ाफ़रानी गद्दारों के साथ मिल कर मुसलमानों का गला काटने लगे तो फिर पाकिस्तान की जानिब ही हर मोमिन देखेगा।   त्रिपुरा में इतना बवाल मचा मस्जिदे जला दी, क़ुरान जला दिए गए मुस्लिम क़त्ले आम किया, नबी अल्लाह की शान में बेहद अदना दर्जे की बकवास की गयी, किस गुफा में घुसे हुए थे। जब पाकिस्तान ने मज़म्मत की उसकी जानिब से बयान आया तब गुफा से बहार आये और बैदार हुए।  

सवाल: फिर वोह मुनाफ़िक़ बोलता है की हिन्द का मुसलमान पाकिस्तान के मुसलमान से ज़्यादा इस्लाम पसंद हैं। 

जवाब: उसको जवाब जब तुम्हारी सोच यह है की हमने पाकिस्तान के निज़ामे मुस्तुफा और शरीयत के क़ानून को ठोकर मार दी और हिन्दू क़ानून की पैरवी कर हिन्द में रहे, तो तुम्हारे पैरोकार मुसलमान भी वैसे ही इस्लाम पसंद होंगे।   अब जिसने निज़ामे मुस्तुफा और शरीयत के क़ानून को ठोकर मार दी फिर उसके लिए बचता ही क्या है।  ना दीन और ना दुनिया।  फिर भी अबू लहब की तरह हुज़ूर के चचा ज़ाद भाई होने का दम भरना है तो भरो।   सभी को तुम्हारी मुनाफ़ेक़त और कुफ्र  से रग़बत के बारे में पता पड़ चूका है।  

तुम्हारी सौच शैतानी सोच है अना ख़ैरूम मिनहूम, में इससे अफ़ज़ल हूँ में इससे ज़्यादा सजदे करने वाला हूँ।   आदम और शैतान में जंग किस बात की थी वोह महज़ एक सजदे की नहीं थी।   बल्कि अफ़ज़लियत की थी।  और तुम भी वही बोल रहे हो की पाकिस्तान के मुसलमानों से काफिर मुल्क का मुस्लिम अफ़ज़ल है ज़्यादा इस्लाम पसंद है तो तुम्हारी सोच शैतानी है।  और तुम कौन होते हो तमाम मुसलमानों की जानिब से बात करने वाले, क्या तुमने हिन्द के तमाम मुसलमानों का ठेका लिया है।  जिस तरह तुम पाकिस्तान के ऊपर तनक़ीद कर सकते हो की पाकिस्तान कौन होता है हिंदुस्तान के मुसलमानों के बारे में बात करने वाला तो हम भी वही कह सकतें हैं तुम किस हैसियत से मुस्लिम अवाम की बात कर रहे हो जब तुम्हारी सोच में मुनाफ़ेक़त की बू आती है।   उससे साफ़ ज़ाहिर हो रहा है की तुमको ज़ाफ़रानी हाकिमों से ग़ुलामी करने की और ऐसे बयानात देने की हिदायत है।  जबकी क़ुरान और हदीस में हर मोमिन हर मोमिना के लिए तड़प का, हुसने सुलूक का वाज़े हुकुम है।  अगर मुल्क से मोहब्बत का तस्सव्वुर होता तो दौरे पैग़म्बरीयत में जितनी भी जंगे हुई वोह मक्का में ही तो हुई।  मुल्क से मोहब्बत का कोई तस्सव्वुर नहीं अगरचे तुम काफिर हाकिम के हाथों में गुलाम भी हो तो तुम्हारी सौच में मुस्लिम हमदर्दी और इस्लाम के लिए तड़प दिखना चाहिए चाहे वोह तुम्हारे मुल्क का नहीं बल्कि तुम्हारा हमसाया ही क्यों ना हो।

सवाल: वोह बोलता है पाकिस्तान ने इस्लाम और मुसलमानों को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचाया है।  

जवाब:  पाकिस्तान ने नहीं तुम जैसे मुनाफ़िक़ों और मुनाफ़िक़ सौच ने माज़ी में और आज के दौर में इस्लाम और मुसलमानों को नुकसान पहुंचाया है।  

यज़ीद भी अपने आप को मुसलमान कहता था और आज के दौरे हाजरा में लानत का बाईस बना।  उस दौर में हाकिम की पैरवी करना इस्लाम समझा जाता था और हक़ की बात करने वाले को ग़द्दार।   और तुम तो यज़ीद के हामी दिख रहे हो इमामे हुसैन के सब्ज़ परचम के नीचे तो नहीं हो।  जबकी इमामे हुसैन हक़ के परचम के अलमबरदार थे और यज़ीद हाकिमियत के ग़ुरूर और तकब्बुर से चूर था। 

आज कुफ्र बनाम इस्लाम या हक़ बनाम बातिल की इस जंग में तुम बातिल ताक़तों के साथ खड़े हो और जो भी सेक्युलर हिन्दू हैं वोह यह समझ रहें हैं की कौन ग़लत है और कौन सही वोह हक़ के परचम के नीचे हैं, तो तारीख में तुमको लोग रज़ूली अल अज़बई जैसे ग़द्दार तसव्वुर करेगें और उन हिन्दुओं को जो हक़ के परचम के नीचे थे उनको हुर्र बोलके इज़्ज़त से मुख़ातिब करेंगे।

एक और हैं जमीयत के असद वोह पहुंच गए मुसलमानों के साबसे बड़े दुश्मन अबू जेहल के पास उसके सुदर्शन टीवी पर इंटरव्यू देने उसने जो बेइज़्ज़त्ती इस्लाम अल्लाह और नबी सल्लम की शान में की है वोह सब सुन कर गए।   क्या ज़रुरत थी किसी काफिर वोह भी दहशतगर्दों के चैनल पर इंटरव्यू देने की।   इन काफिर शिद्दत पसंदों और दहशतगर्दों से किसी भी क़िस्म की कोई भी गुफ्तगू नहीं होना चाहिए।उसके बाद दम भरते हो की हम मुसलमानों के साबसे बड़े रहनुमा हैं।  ख़ैरख़्वाह हैं।   पाकिस्तान मुसलमानों का दुश्मन है।   तुमने नबी की शान में गुस्ताखी करने वाले काफिर शिद्दत पसंदों के लिए क्या किया।   पाकिस्तान ने उस मसले को आलमी सतह पर लाया, अक़वामे मुत्तहिदा में मसले को उठाया।पाकिस्तानी क़रारदार की हिमायत बरतानिया ने की एयरोपियन यूनियन ने की और ब्रिटेन ने ऐसे गुस्ताख़े नबी के ख़िलाफ़ क़ानून नाफ़िज़ किया है।  तुमने क्या किया महज़ कुफ्र और काफिर मुल्क, ज़ाफ़रानी हुकूमत के तलवे चाटने और उसकी जी हूज़ूरी में अपने ही मज़हबी भाई को मुसलमानों को कोसने के अलावा क्या किया है।  सहाबा की तारिख पड़ो जब कुफ्र और इस्लाम की जंग होती थी तब एक क़बीले के मुस्लिम दुसरे नावाक़िफ़ क़ाबिले के मुसलमान सहाबा अपनी अज़वाज तक दे दिया करते थे।  

Zuber

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