अमेरिका तक़रीबन अफ़ग़ानिस्तान की सरज़मीन छोड़ चूका है, कल रात ब्रतानियाँ का आख़िर हवाई जहाज़ बचे हुए फौजी अमले और दिगर अराकीनों को ले कर अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन से परवाज़ कर गए। इसी के साथ ब्रिटेन का अफ़ग़ानिस्तान में जंगी महाज़ का इक्तेदाम हुआ।
जहाँ तक अमेरिका का सवाल है उसके तक़रीबन सभी फौजी और अमेरिकी अवाम अफ़ग़ानिस्तान को छोड़ चुके हैं। मुतफ़र्रिक़ बचे हुए जो फौजी हैं वोह कल तक अफ़ग़ानिस्तान को छोड़ देंगे। उसके साथ अमेरिका का भी फौजी मश्क अफ़ग़ानिस्तान पर ख़त्म होगा। लेकिन जाने से क़ब्ल अमेरिका ने तालिबान हुकूमत को तमाम क़ुव्वत और ताक़त फ़राहम की है। यह कहना गलत नहीं होगा की अमेरिका ने अफ़ग़ानी फौजों को नहीं बल्कि तालिबान को फौजी मश्क में इज़ाफ़त की है।
अब तालिबान हुकूमत इतनी ताक़तवर हो गई है की आने वाले दिनों में काफिर दहशतगर्द जिन्होंने इन २० सालों में अफ़ग़ानिस्तान में क़त्ले आम किया था, बम ब्लास्ट किये थे, गोलियां बरसाई थी और हिंदुस्तानी ज़ाफ़रानी हुकूमत के इशारे पर काम करते थे उनकी शामत आने वाली है। एक एक को चुन चुन के ज़मींदोस्त करेगें। पोशीदा हो जाएँ यह काफिर दहशतगर्द चाहे कुफ्रिस्तान भारत की ज़मीन में या दुनियां के आख़िर हिस्से में जा कर भी छुप जायेगें तो उनको २० सालों में भी तलाश कर निकालेगें और काट डालेगे। अमेरिकी फौज की जानिब से तैयार करदा ऐसे तमाम ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों और मुनाफ़िक़ों का डाटा तालिबान के हाथ लगा है जो भारत की ज़ाफ़रानी हुकूमत के इशारे पर काम करते थे। और अफ़ग़ानिस्तान में दहशत की फेक्ट्री और अपने ब्रीडिंग कैंप खोल रखे थे। इन केम्पों में जैसा की इस सहाफी ने अपने गुजिश्ता तमाम हिंदी मज़मूनों और ख़बरनानों में इस बात को ज़ाहिर किया है की हिन्दू दहशतगर्दों के साथ दुर्गा वाहिनी की कुँवारी लड़कियां भी होती है। जिनको हिन्दू दहशतगर्दों के बच्चे पैदा करने के लिए वक़्फ़ किया जाता है। ऐसी लड़कियां अपने मिशन के तहत किसी भी मुल्क के आला ओहदेदारों, वज़ीरों और अज़ीम हस्तियों को अपने जाल में फसा कर उनसे अपना मक़सद हिन्दू दहशत की ज़मीन की तोहसीह पर काम में ली जाती है। जो सिन रसीदा हो जाती है उनको मुक़ामी दहशतगर्दों की दिल जोई के लिए रखा जाता है। यह मस्तूरातें अपने केम्पों से बहार नहीं जा सकती।
तालिबान की हुकूमत में तहक़ीक़ाति इदारे की स्पेशल यूनिट अल ईशा ने उस डाटा पर अमल का आगाज़ किया है। इसमें अमेरिका से मिले हर उस डाटा की तहक़ीक़ात निकाली जा रही है जो किसी वक़्त भारत के लिए काम करता था। और ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों को मुजाहिदों की जानकारी फ़राहम करता था। तहक़ीक़ात में ज़ाहिर हुआ है, की ९/११ के बाद अमेरिकी फौज के अफ़ग़ानिस्तान में हमलावर होते ही भारत के ज़ाफ़रानी दहशतगर्द अपनी पहचान छुपा कर और फरेबी, झूठे नामों से वहां खुफियां तरीके से दाखिल हो गए थे। फिर उन्होंने आलमगीर औरंगज़ेब रेहमतुल्लाह अलैहे की फारस से वेस्ट बंगाल और कश्मीर से कन्यकुमारी पर अज़ीम मुगलियाँ सल्तनत की नीव रखने के रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए मोदी जैसे फरेबी, झूठे, जालसाज़, धोखेबाज़, भगोड़े को बादशाह के तखत पर फ़ाइज़ किया।
यह ज़ाफ़रानी दहशतगर्द अफ़ग़ानिस्तान को अपना गुलाम और मोहरा बना कर, दुर्गा वाहिनी की लड़कियों से ब्रीडिंग प्लेस बना कर पाकिस्तान ईरान पर काबू कर फारस से ले कर वेस्ट बंगाल और कश्मीर से कन्यकुमारी तक उस धोखेबाज़, गद्दार दहशत की नीव रखना चाहते थे।
इस ज़िम्न में ब्रिगेडियर कमांडर नवाज़उद्दीन हक़्क़ानी ने सहाफी इजलास में मज़ीद तफ्सील से बताया है की तालिबानी तहक़ीक़ाति इदा अल ईशा की जानिब से बिओमेट्रिक स्कैनर का इस्तेमाल किया जा रहा है जो इससे क़ब्ल अमेरिकी फौज करती थी। वोह तमाम गुर और हुनर अमेरिकी फौज ने तालिबान को सीखा दिए हैं। इस तकनीक के ज़रिये पता चलेगा की कौन कौन से अफ़राद और आला ओहदेदार भारत की ज़ाफ़रानी दहशतगर्द तंज़ीम और रॉ के लिए काम कर चुके हैं।
अब यह वही ख़ौफ़ का माहौल तमाम ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों और मुनाफ़िक़ों देखा जा सकता है जो किसी ज़ामाने में एहमद शाह अब्दाली और मेहमूद ग़ज़नवी की फ़ौजिओं के आते ही देखा जाता था। जिसका ज़िक्र यह सहाफी अपने कई मज़मूनों में कर चूका है। अभी तो भारत को बोहोत भुगतना है। बेहद ज़्यादा खून रेज़ी होगी। हर काफिर दहशतगर्द, हर शिद्दत पसंद काफिर हर बीजेपी वाला काट डाला जाएगा। लाशें ही लाशें। चील, कव्वे गिद्ध और कुत्ते इनकी लाशों को नौचेगे। यह काफिर जितना ज़ुल्म करना था कर चुके। अभी तो भारत बोहोत भुगतेगा। क्योंकि अमेरिकी फौज ने तमाम जानकारी तालिबानी हुकूमत को फ़राहम कर दी है जिन लोगों ने २० सालों तक ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों के लिए काम किया और अफ़ग़ानिस्तान को तबाह करने में उनका नुमाया किरदार रहा अब उनको अपनी जान का खतरा साफ़ दिखाई दे रहा है। ऐसे ग़द्दारों को पहले सज़ा दी जाएगी जो अफगानिस्तान की दोस्ती का दम भरते थे और गले लग कर पीठ में खंजर मारा और उसके लिए ज़ाफ़रानी दहशतगर्द, बीजेपी वाले और शिद्दत पसंद काफिर मशहूर हैं।
०७ अगस्त २०१९ अपने एक हिंदी मज़मून मेरा ख़्वाजा महान. में अमित शाह और मोदी को ललकारा था और १५ दिनों की चूनौती दी थी अगर इस सहाफी को गिरफ्तार ना कर सको तो हुकूमत मुसलमानों के हाथों में दे देना नहीं तो मुस्लिम रियासत से जंग करना। २१ अगस्त २०१९ को १५ दिनों की मोहलत ख़तम होने पर हूकूमते हिन्द को अपने मज़मून हुकूमते हिन्द को पैग़ाम को जंग के लिए ललकारा था। और साफ़ कह दिया था लेकिन तुम जंग हरगिज़ हरगिज़ नहीं जीत सकोगे लाशें तुम्हारे अपनों की ही गिरेगी। अब वही सब होगा और ज़रूर होगा।
ब्रिगेडियर कमांडर नवाज़ुद्दीन हक़्क़ानी ने साफ़ इशारा किया है क्योंकि अब काबुल पर क़ब्ज़ा हो चूका है तो अब काउंटर इंटिलीजिएंस पर है। अल ईशा तहक़ीक़ाती इदारे ने डाटा स्कैन पर काम करना शुरू कर दिया है। काबुल में अभी दो रोज़ क़ब्ल जो धमाके हुए उसमे दहशतगर्दों की आख़िर कोशिश थी की किसी तरह से अमेरिका को अफ़ग़ानिस्तान में रोका जा सके। लेकिन सदर बाइडन से साफ़ अलफ़ाज़ में कह दिया की अब हुकूमत तालिबान के हाथ में है और अवाम को तहफ़्फ़ुज़ फ़राहम करना उनकी ज़िम्मेएदारी है अमेरिकी फौज किसी भी क़ीमत पर अफ़ग़ानिस्तान में नहीं रूकेगी।
तालिबान को अमेरिकी जदीद टेक्नोलॉजी और तहक़ीक़ात में इस्तेमाल होने वाला हाइड नाम का आले की अमेरिकी फौज की मदद फ़राहम है। जिससे अफ़ग़ानिस्तान के दुश्मन और दोस्ती का दम भरने वाले ऐसे दुश्मनों का पता चलेगा जो पीठ पर वार करते थ। उसके साथ साथ पाकिस्तान, चीन, रूस भी तालिबान हुकूमत को मदद फ़राहम कर रहें हैं।
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