Sunday, 26 May 2019

ख़ामोशी में पोशीदा हैं हज़ारों राज़

आख़िरकार वो घड़ी ही गई जब मोदी जी ने खुल के अपने गुस्से का इज़हार पाकिस्तानी बेगम से ज़ाहिर किया और अपने अड्डे पे उससे खफा हो कर मुँह मोड़ लियामोदी की ये ख़ामोशी एक दिखावा है या इसके पीछे कोई राज़ पोशीदा है जिसको पाकिस्तानी बेगम ने फाश कर दिया थापाकिस्तानी बेगम को हिन्दू दहशगर्दों की हिमायती और ज़ाफ़रानी जमात बीजपी से पार्लियमानी इंतेखाबात लड़ने का शर्फ हासिल हुआ.   फिर क्या था इस पाकिस्तानी बेगम को लगने लगा की अब तो वो हिन्दू समाज और हिन्दू दहशतगर्दों के लिए किसी मसीहा से कम नहीं हैजो कुछ भी ज़हर अंगेशी करेगी अवाम, शहीद, बाबए क़ौल किसी के भी खिलाफ कुछ भी बोलेगी हिन्दू ज़ाफ़रानी पार्टी उसकी हौसला अफ़ज़ाई करेगी.  

लेकिन इस पाकिस्तानी बेगम का रियाज़ कुछ कम हो गया, वो जोश में होश खो बैठी और कुछ ऐसे कलमात और बयानात मीडिया के रू बरू दे बैठी जिसकी वजह से ना सिर्फ ऑटोनोमस जर्नलिस्ट्स बल्कि लंगूर और लँगूरनियों की भी नाक भवें सिकुड़ने लगीमामले की नज़ाकत को भांपते हुए ज़ाफ़रानी पार्टी ने फ़ौरन ऐसे किसी भी बयानात से अपने आपको किनाराकश कर के अलहदा कर लियालेकिन ये क्या पाकिस्तानी बेगम तो रुकने का नाम ही नहीं ले रही थीअभी शहीद के ऊपर उसकी बदकलामी का गुस्सा ठंडा भी नहीं हुआ था की बाबाये क़ौल के ऊपर एक और हमला कर बैठीबस फिर क्या था अब तो बात काफी आगे निकल गई और ज़ाफ़रानी सिपाहियोंफ़ौजिओं और सिपहसालारों की हुदूत को पार करती हुए सीधे बादशाह सलामत को जा टकराई.   और नताइज के एक दिन पहले ही बादशाह सलामत बोल बैठे की वो महात्मा के ऊपर दिए हुए बयान पे साध्वी (पाकिस्तानी बेगमको कभी माफ़ नहीं करेगें

ये सहाफी बादशाह की ख़ामोशी को किसी और नज़रिये से देखता हैउनका गुस्सा अगर पाकिस्तानी बेगम के बयानात को ले कर है तो अपनी जगह जाइज़ है फिर उसके ऊपर बादशाह का ना सिर्फ गुस्सा बल्कि उसके खिलाफ कुछ एक्शन भी लिया जाता तो वो भी जाइज़ होतालेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ, गुस्सा दिखाया गया मुँह फेर लिया, हाथ जोड़े हुए पाकिस्तानी बेगम का सम्मान नहीं किया वग़ैरा वग़ैरालेकिन एक्शन कुछ दिखाई नहीं दिया.  फिर इस तरह का बर्ताव और मुँह फेर लेने की अदा तो आडवाणी पहले ही भोग चुके हैंतो उनसे किस बात पे खफा थे बादशाह सलामत. क्या ये सब सिर्फ दिखावा है और गुस्सा किसी और बात पर है.

ये बात किसी भी तालीमी आफ़ता अवाम से पोशीदा नहीं है की शहीद हेमंत करकरे मालेगाव ब्लास्ट में हिन्दू दहशतगर्दों के एक के बाद एक राज़ फाश कर रहे थेउन्होंने तोगड़िया, आडवाणी और मोदी को इस देशतगर्द हमले के सिलसिले में सवाल जवाब के लिए तलब किया था.   और कोई बईद नहीं की उन हिन्दू दहशतगर्दाना हमलो के तार दहशतगर्द और काबिज़ मुल्क इजराइल से जुड़े हुए होने के सबूत उनको मिल जाते अगरचे उनको शहीद ना किया जाता, जिसका सीधा शक ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों पे है.   जिसका ज़िक्र ये सहाफी अपने कई मज़्मूनों में कर चूका हैअगर हेमंत करकरे शहीद ना किये जाते तो मुकम्मल तहक़ीक़ाति मालूमात आज अवाम के सामने होती.

फिर जब पाकिस्तानी बेगम को इंतेखाबात के लिए ज़ाफ़रानी पार्टी ने मदु किया तो उसको लगा की अब तो तमाम क़ानूनी इदारे और अदलिया उसकी खाकी चड्डी के नीचे दफ़न हो गई वो जो कुछ भी करेगी जाइज़ क़रार दे दिया जाएगातो उसने शुरू की बेहूदा बयान बाज़ीअब बादशाह सलामत भी बड़े ही चतुर खिलाड़ी निकले उनको इस पाकिस्तानी बेगम के शहीद हेमंत करकरे पे दिए हुए बयान पे गुस्सा तो आया लेकिन महात्मा पे दिए हुए बयान में मू फूला के बैठ गएमें माफ़ नहीं करूँगा”पहले बोलते थे में माफ़ी नहीं मांगूगा और अब माफ़ नहीं करूंगा

क्या मज़ाक़ है,   आपको गुस्सा किस बात का है पहले ये ते कीजिये कही कोई राज़ आपका इस पाकिस्तानी बेगम की ऊल जलूल बयान बाज़ी से फाश तो नहीं हो रहा था, जिसको आप पोशीदा रखना चाहते थे.   जो हिन्दू दहशतगर्द एक शहीद की अज़मत नहीं पहचानती जो अपने मुख़ालिफ़ों से लड़ते हुए शहीद हुए उनको कहती है मेरे श्राप से वाट लग गईफिर आप ऐसी पाकिस्तानी ज़ेहनियत के साथ अपने अड्डे पे बैठ तो सकते हो और बड़ी बड़ी बातेमाफ़ नहीं करूंगा”, मुँह फेर लिया.

दूसरी बात इस पाकिस्तानी बेगम से पूछना है बद्दुआ किस को दी जाती है जो वतन के हक़ में लड़ाई लड़ रहा है उसको या जो आपका दुश्मन है उसकोफिर हेमंत करकरे तो दुशमनो से लड़ाई लड़ते हुए शहीद हुए और आपका श्राप उस शहीद रूह को मतलब आप पाकिस्तानी अजेंडे पे काम कर रही थी और वो दुश्मन जो भारत पे हमला किये वो आपके दोस्त थे और जिस बहादुर पुलस ऑफिसर  ने उस हमले में अपनी जान की शहादत पेश की वो आपके श्राप और बद्दुआ के मुस्तहिक़ हुए.    

बादशाह सलामत भी मजे हुए खिलाड़ी है उनको गुस्सा आया बोहोत आया जब पाकिस्तानी बेगम ने हेमंत करकरे को श्राप देने की बात कहीफिर एक और बयान जान बूझ कर दिलवाया महात्मा के ऊपर और अब गुस्सा निकाला बादशाह ने महात्मा वाले बयान पे जबकि उनका असली गुस्सा शहीद वाले बयान पे था क्योंकि उसमे दफ़न थे हज़ारों राज़, और कही बात का बतंगड़ बन जाता तो पाकिस्तानी बेगम को तमाम राज़ मीडिया के रू बरू बोलने पे मजबूर होना पड़ता, जिससे बादशाह सलामत के राज़ फाश होने का खदशा था.  हेमंत करकरे की शहादत में बादशाह सलामत की कारगरदेगी भी पोशीदा है. अब बात को हवा इस इंदाज़ में दिया जा रहा है की महात्मा की तुलना गोडसे से किये जाने पे में खफा हूँ और साध्वी को कभी माफ़ नहीं करूंगा

फिर बादशाह सलामत अड्डे पे उस पाकिस्तानी बेगम के साथ एक मरहले में काम कर सकतें हैं लेकिन बात नहीं करूंगा.   ये ही वजह है की ज़ाफ़रानी महाज़ ने अपनी पूरी कूव्वत और शिद्दत से अपनी ज़िम्नी जीत दिखाने के लिए .वी.एम् अदल बदल करने में लगा दियाक्योंकि अगर मुख़ालेफ़ीन संसद में आते तो बादशाह सलामत की खैर ना होती.

वो दहशतगर्द कौन थे जिनसे जंग लड़ते हुए हेमंत करकरे शहीद हुएफिर अगर ये हिन्दू आतंकी हेमंत करकरे के हक़ में बयान ना देते हुए उनकी शाहदत को अपना श्राप बोल रही है मतलब ये पाकिस्तानी बेगम है और पाकिस्तान के इशारे पे काम कर रही थीबादशाह सलामत इस पाकिस्तानी बेगम के साथ अपने अड्डे पे एक मंच पे बैठ सकतें हैं  परन्तु बात नहीं करेगें  क्या बकवास है.

खैर वजह चाहे कुछ भी हो ज़ाफ़रानी महाज़ की जीत में पोशीदा है हज़ारों राज़ और एक बात वाज़े है अगर बीजेपी ने जीत बगैर किसी जूए और डाकाज़नी के हासिल की है तो बीजेपी और हिंदुस्तानी अवाम की दहशतगर्दाना ज़ेहनियत खुल के सामने गईहिंदुस्तानी अवाम से तो लाख गुना अच्छे पाकिस्तानी हैं जो आतंकवाद पे % रवादारी रखते हैंहिंदुस्तानी सिर्फ दहशतगर्दी के खिलाफ बोलते हैं हकीकत में होते दहशगर्द ज़ेहनियत, दहशगर्दों हिमायती और दहशतगर्दी में मुलव्विस जबकि पाकिस्तानी एक तालीमी आफ़्ता, खुली सोच रखने वाले दहशतगर्दों पे सख़्त और अज़्म के पक्के होते हैं.   

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