मेरा आर्टिकल मेरी मन की बात हे लेकिन वो राजनेताओ की तरह ढकोसले बाज़ी नही बल्कि सही में दर्द हे उन तमाम भारतीयों का जो नेताओ की नीच बातो में आ कर अपना हक़ छोड़ देते हे. में यहाँ पर मोदी की मन की बात और चतुर लोमड़ी की तरह एक तीर से हज़ारो वार करने वाली आदत को नकारता हूँ और सभी देश वासिओ से अनरोध करता हूँ की मोदी जैसे मजे हुए नेता की बातो में आ कर अपने परिवार की खुशिया न छीने।
आज टेलीविज़न पे एक खबर में माथा घूम गया, जिसमे प्रधान मंत्री मोदी को एक विधवा टीचर की बड़ाई बघारते हुए सूना, जिसमे मोदी कह रहे थे, एक विधवा सेवा निर्वित शिक्षिका मेरी मन की बात सून कर अपनी गैस सब्सिडी त्यागने के लिए लाइन में खड़ी थी. मोदी बड़े गर्व से कह रहे थे की देश में ३० लाख से ज़्यादा लोगो ने अपनी गैस सब्सिडी छोड़ दी हे. मोदी ने सोची समझी साजिश के तहत टेलीविज़न, ऑफ.अम. रेडिओ और विज्ञापनों के ज़रिये समूचे भारत में मैसेज पास किया की य गैस सिलिंडर वो उन परिवारो को दिया जायेगा जिनके घर में जलाने के लिए लकड़ी हे और धूवे की वजह से आखे जलती हे. मोदी इतने गर्व से उक्त शिक्षिका का किस्सा सूना रहे थे, में मोदी से एक बात पूछना चाहता हू क्या उक्त विधवा शिक्षिका की भरण पोषण की ज़िम्मेदारी मोदी ने ली हे. अगर नहीं तो उनसे उनकी सब्सिडी छीनने का मोदी सरकार को कोई हक़ नहीं हे. दूसरी बात इन तीस लाख लोगो में कितने मोदी कैबिनेट में मंत्री और संत्री हे कितने बीजेपी के विधायक और संसद हे. कब तक आम जनता सरकार की भूख मिटाती रहेगी. कब तक लच्छेदार और दिल को छु लेने वाले भाषण सून कर जनता अपना पेट काट कर सरकार का खज़ाना भरती रहेगी. अगर सब्सिडी सुनियोजित तरीके से लेना ही थी तो सरकार ने उसको लागू ही किओ किया. देश के सांसद और विधयक मंत्री संत्री की कोई ज़िम्मेदारी नहीं हे देश का बोज कम करने की. कियो संसद और विदायको को हर जगह सब्सिडी चाहिए कोयो मंत्रीओ को हर वस्तु सब्सिडी वाले भाव में मिलती हे. कीयो सांसद और असेंबली हाउस में खाना कम भाव में मिलता हे. जो खाना आम जनता के लिए २०० से २५० रुपए का होगा वाही खाना १५ से २० रुपयो में मिलता हे इन सासदो और विद्याको को।
मोदी सरकार दिल को छु लेने वाले भाषण दे कर आम जनता का गाला काट रही हे. पहले गुजरात अब भारत, गुजरात में चल जाता था क्योकि गुज्जु जनता का एक जगह से नहीं बल्कि हज़ार जगहों से धंदा करने वाली जनता हे. लेकिन भारत गुजरात नहीं हे. अगर मोदी सही में भारत की जनता के बारे में सोचते हे और उनको सही में भारत की जनता की परवाह हे तो उनको अपने मंत्रीओ के बिल में कटौती करनी चाहिए और अपने विदेश दौरों को कम करना चाहिए. भारत की जनता का कितना खून चूसेगी सरकार, किसी भी बात को सहन करने की कोई सीमा होती हे. पहले तो गैस के दाम इतने बढ़ाना ही नहीं थे. फिर उसपे ज़ख्मो पे नमक डालने जैसा काम कर रही हे मोदी सरकार. मंत्रीओ संत्रीओ सासंद विधायक से ले कर पार्षद तक हर इंसान कमाता हे और हर वस्तु इनको सब्सिडी में मिलती हे बिजली, टेलेफोन बिल से लेकर रहने के लिए घर हर वस्तु इनको सॅब्सिडी भाव में मिलती हे, मोदी सरकार मगरमच्छोँ को छोड़ कर आम जनता से क़ुरबानी माग रही हे. अगर मोदी सरकार को भारत की अर्थविवस्ता सुधारने की इतनी ही चिंता हे तो मंत्रीओ के हर बिल में कटौती कर दे और एक क़ानून बना दे कोई भी वस्तू राजनेताओ को सब्सिडी भाव में नहीं मिलेगी फिर आम जनता से मोदी हक़ छोड़ने की बात कहे.
जागो इण्डिया जागो मोदी जैसे मजे हुए उधोगपति की बातो में न आ कर जो हक़ आपका हे उस हक़ के लिए जद्दोजेहद करो न की अपना ही हक़ नेताओ की बातो में आ कर छोड़ दो. फिर अगर मोदी सरकार सब्सिडी की बात ही करती हे तो एक सिंद्धांत या एक स्लैब फिक्स कर दे की उस स्लेब से नीचे रहने वालो की सब्सिडी एप्लीकेशन क़ुबूल नहीं होगी. ताके उस पैरामीटर में सिर्फ बिजनेसमैन और अमीर जनता ही आ सके.
ज़ुबेर एहमद खान
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