मेरी आवाज़ सुनो……
में एक पत्रकार हूँ जिसने मुस्लिम पिछड़ेपन और जेल में क्रिमिनल पर्सेंटेज इस वीषय पे शोध काम भी क्या हे. और इस शोध से पताचला की मुलसमान की आवाज़ को हमेशा दबा दिया जाता है.
लेकन
एक बात में ज़रूर कहना चाहूँगा मेरे लेखन से समाज में भेद भाव पैदा होगा ये मुझे नहीं मालूम था. लेकिन साध्वी बालिका सरस्वती के भाषण सून कर समाज पे में अमृत घोला जाएगा कियो साध्वी के ऊपर बेन नही.
पिछले साल २०१४ में जब बालिका वधु अपने प्यारो को सभोतिक कर रही थी जिस
ज़हरीले भाषा का प्रयोग ये साध्वी कर रही थी उससे साफ़ दिख रहा था की ये औरत देश
में दंगे भड़का देगी. साध्वी कहती हे "एक एक मुल्ले को ख़त्म करडालो"
कार्यकर्म विहपि ने आयोजित किया था. उसके इस भाषण के बाद कर्नाटक में दंगे
हुए और कम से कम ८० से ज़ायद जनता घायल हो गई. विहपि के गुंडों ने स्कूल
कॉलेज जाते हुए मुस्लिम बच्चो को मारा पीटा, एक मदरसे को तोड़ दया गाय. फिर
भी न तो उसकी गिरफ्तारी हुई और न उसके ज़हरीले भाषण ख़त्म हुए.
लेकिन
साध्वी बालिका, साध्वी प्राची, साधू योनि अदितनाथ, और न जाने कितने लोग
होंगे जो की ज़हरीले भाषा का प्रयोग करते होगे लेकिन उनके ऊपर कोई अंकुश
नहीं तो य कौन सी फ्रीडम ऑफ़ स्पीच हे
समझ नहीं आ रहा. मुसलमानो और क्रस्ती समाज के ऊपर अन्याय होता हे तभी तो
में लेखन के जरिया जनता और सरकार को जागरूक करता हू. ठीक हे मुसलमानो और
क्रिस्टी समाज के ऊपर होने वाले अन्याय खत्म कर दीजिय मेरा लेख भी खत्म हो
जायगा.
आपका अपना
ज़ुबेर अहमद खान
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