प्रिय पाठको,
एक मनुष्य की सोच और लेखक के विचार उसके साथ हुए अनुभव की उत्पत्ति और दूसरो के दुवारा दी हुई जानकारी के मुताबिक होते हे. में एक लेखक के साथ साथ एक पत्रकार भी हू. जिसने एक विषय पे शोध की और पाया की भारत का समाज (हिन्दू) और पुलिस मुसलमानो के साथ अन्याय करती हे. इसी की वजह से लेखक के दिमाग में कुछ बाते घर कर गई और उसके विचारो की सीमा उसके शब्दों को रोक नहीं सकी जो सरकार, हिन्दू और पुलिस विरोधी बनते जा रहे थे.
लेकिन सहसा लेखक का सामना महाराष्ट्र आतंकवादी विरोध पथक से हुआ, विभाग के उच्च अधिकारिओ ने उसके विरोधी लेख और दुसरे देशो से सहानुभूति रखने के मामले में लेखक से पूछ ताछ की और यहाँ से लेखक का मन पुलिस, और समाज के प्रति बदला. जिस सकारात्मक तरीके से महाराष्ट्र आतंकवादी पथक के अधिकारिओ ने लेखक से पुछा और उसके दिमाग में जो नकारात्मक सोच घर कर गई थी उसको इंसानियत और समाज में भले कामो में लगाने की सीख से लेखक काफी प्रभावित हुआ. लेखक एक सभ्य और सुशिक्षित परिवार से हे लेकिन उसके अपने अनुभव और मुस्लिम समाज के साथ अन्याय
ने उसकी सोच की धारा को बदल दिया था.
लेखक को उसके भाई मोईनुद्दीन एहमद खान अधिवक्ता उच्च
न्यायालय बॉम्बे के साथ आयुक्त महाराष्ट्र आतंकवादी पथक ने मुलाक़ात के लिए बुलाया। आयुक्त साहब एक सुलझे दिमाग के इंसान हे और जब उन्होंने लेखक की पूरी जानकारी ली और कहा आपके लेखन की वजह से हमारे को बोहोत परेशानी हो गई आपने हमको ही काम पे लगा दिया तो लेखक को बोहोत ही आत्म गिलानी हुई और उसने सोचा हर पुलिस अधिकारी पक्षपात नहीं करता और मेने इन लोगो के साथ अपने लेखन के ज़रीये अच्छा काम तो हरगिज़ नहीं किया.
दोस्तों में आप लोगो को एक बात
अवष्य कहना चाहता हूँ पुलिस भी एक इंसान हे और उससे भी गलती हो सकती हे. दिन भर जब
पुलिस एक एक मुजरिम को तलाश कर के शाम को दफ्तर पहुचती हे और दफ्तर में जब मुजरिम
को पकड़ने का दबाव बनता हे तो हो सकता हे एक पुलिस अधिकारी अपना गुस्सा दुसरे
मुजरिम पे निकाल दे. हुवे होंगे कुछ एक हादसे पुलिस ज़िय्यातीओ के लेकिन उसके
लिए पूरे विभाग को ज़िम्मेदार ठहरना उचित नहीं होगा।
अभी भी अच्छे अधिकारी मौजूद हे
जिसका जीता जागता सुबूत हे महाराष्ट्र आतकवादी पथक जिसके अधिकारिओ ने लेखक के साथ मानवीय आधार पे पूछ ताज की और उसकी नकारात्मक सोच को सकारात्मक सोच पे बदलने में मदद की.
सोच बदलो देश बदलो.
ज़ुबेर अहमद खान
पत्रकार
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