Sunday, 25 January 2026

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया लेकिन मिल्लत को गर्त में झोंक दिया यह वादा कर की मुस्लिम कभी अपनी तंज़ीम खड़ी नहीं करेगें अपनी क़ियादत नहीं करेगें बस दूसरों को सपोर्ट करेंगे और वोह सियासी नुमाइंदा उनके हक़ के फ़ैसले करेगा. अब्दुल दरी बिछायेगा और कुर्सी लगाएगा फिर कुर्सी पर बैठा नुमाइंदा अब्दुल का इस्तासाल करेगा.  यह ग़ुलामी की सिफ़त हमारे सियासी आक़ाओं ने भरी है.  तभी से अब्दुल उस ही काम को कर रहा है. उस पर सितम देखिये मौजूदा वज़ीर आज़म पंचर पुत्र बोल कर मखौल उड़ाता है. मिस्टर प्राइम मिनिस्टर अब्दुल को ज़हनी ग़ुलाम बनाया इसलिए आप सत्ता के शीर्ष पर बैठे हो. अगर यह हक़ लेने इंसाफ़ होने की बात मिल्लत में पहले आ जाती तो आप गुजरात मुस्लिम नस्ल कुशी के जुर्म और इन्साफ़ के पैमाने पर जेल में होते. 

ख़ैर अब्दुल को देर सवेर अक़ल आ ही गई. अब अब्दुल तुम्हारी भपोती नहीं है. अब्दुल अपना हक़ मांगता है उसके मसाइल हल करने की बात करता है.  ईद बरात पर टोपी पहन गमछा डाल फोटो डालने से अब्दुल अब पिघलने वाला नहीं है. 

हमारे घर की सिफ़त कभी भी गुलामी वाली नहीं थी. हमारे वालिद ए बुज़ुर्गवार ने भोपाल में मेडिकल कॉन्फ्रेंस में महेश जोशी की ग़लत बात पर मंच पर जा कर उनको टोंका मंत्री महोदय गलत बयानी कर रहे हैं. वैसे ही हमारी जब से होश संभाला है कभी गुलामी नहीं की. जो बात हक़ थी वही कही.  

जो जो बातें २०१० से लेखन छेत्र में आने के बाद लेख या अख़बारों में तब्सिरों के तोर पर कहीं वही आज सियासी हलकों में आम हो रही हैं. 

१. २०१२ में असदुद्दीन के कांग्रेस से टूटने पर शिव सेना ने मजलिस को साम्प्रदाइक कहा था. उस पर हिंदुस्तान टाइम्स अंग्रेज़ी अखबार में मेने कहा था असदुद्दीन सेक्युलरिज़म के कुली नहीं है सेकुलरिज्म के बोझा ढोने की सारी ज़िम्मेदारी उनके कन्धों पर नहीं है. पहले शिव सेना अपने आप को देखे. 

२. सेकुलरिज्म यह नहीं की तुम दुसरे धर्म के धार्मिक कामों में हिस्सा लेने लगो मूर्ती पूजा करने लगो या हिन्दू मस्जिद में आ कर नमाज़ पढ़ना शुरू कर दे और बोले की में सेक्युलर हूँ. तुम अपने धर्म को पालने हुए समाज के हर तबके कें कितने मसले हल करते हो. 

३. सेक्युलर पार्टियों को बोला था हमारे कितने मसले हल किये ईद बरात पर टोपी पहन गमछा गले में डाल कर फोटों खिचवाने से हमारे मसले हल नहीं होंगे.

४. हर पुलिस स्टेशन में मंदिर का होना इस मुद्दे पर तो २०१५ में लेख लिखे हैं.

कुल मिला कर अब यह नतीजा निकल कर आता है अब्दुल अब दरी नहीं बिछायेगा कुर्सी नहीं लगाएगा. अब खुद कुर्सी संभालेगा तुम्हारे लिए तो हरगिज़ दरी नहीं बिछायेगा. 


Journalist Zuber

Monday, 22 December 2025

असदुद्दीन की बढ़ती मक़बूलियत।

अज़ीज़ नाज़रीन, 

भारत में इन्तेख़ाब का ख़ुमार ख़तम हुआ उसके साथ ख़तम हुआ अक़ीदत मंदों के भगवान की ऊल जलूल बकवास का दौर, जिसको सुन कर ऊबकारी आने लगी थी।  ऐसा महसूस होने लगा था की अब यह शख़्स वकाई में ज़ईफ़ हो गया है और इसको किसी बेहतरीन नफ़्सियाती जर्राह से राब्ता क़ायम करने की सख़्त ज़रुरत है। 

नाज़रीन हाल ही में बिहार में ६ रकून स्टेट असेंबली की फ़तह और महाराष्ट्र बल्दिया इन्तेख़ाब में मजलिस इत्तेहादुल मुस्लेमीन ने कारगरदेगी दिखाई है उस से साफ़ ज़ाहिर हो रहा है इत्तेहादुल मुस्लेमीन की मक़बूलियत में खासा इज़ाफ़ा हुआ है  जो बात वोह दिसम्बर २०२३ या उस से भी क़ब्ल कहते रहे थे उस ही मुद्दे पर मजलिस इत्तेहादुल मुस्लेमीन लड़े और फ़तह हासिल की है।

मजलिस के सदर हर मुबाहिसे हर तक़रीर में बोलते थे हर मुख़ालिफ़ खुद को मोदी से बड़ा हिन्दू दिखाना चाहता है।  अगर मुख़ालेफ़ीन हिन्दू मुस्लिम पर चुनाव लड़े तो हरगिज़ ज़ाफ़रानी महाज़ नहीं जीत पायेगें।  और मोदी चाहते ही यही है की चुनाव हिन्दू बनाम मुस्लिम कर दिया जाए फ़िर उसको हवा ज़ाफ़रानी तंज़ीम के तमाम रकून देना शुरू कर दें।  जहाँ एक तरफा चुनाव हुआ की उसका फ़ायदा बीजेपी को होगा।  मुख़ालेफ़ीन मुद्दों पर चुनाव लड़ें।  हरगिज़ उसको हिन्दू मुस्लिम नहीं होने दें और ना ही इन्तेख़ाब को मुद्दों से हट कर मोदी को हिन्दू मुस्लिम, मंदिर मस्जिद, हिंदुस्तान पाकिस्तान के नाम पर अग़वाह करने दें।  

मोदी, बीजेपी ने भरसक कोशिश की के इन्तेख़ाब हिन्दू मुस्लिम पर लड़ा जाए और अक्सरियत अवाम के दिल में नफरत का ज़हर मज़ीद बड़ा कर एक तरफ़ा अक्सरियत अवाम के वोट ज़ाफ़रानी तंज़ीम को मिल जाएँ।  

नाज़रीन मोदी नाम के इस ताजिर को मालूम है की हिन्दू कितना बेवक़ूफ़ है उसको मज़हब के नाम पर बहकाना कितना आसान हैं।  तभी तो भगवान रजनीश (ओशो) भगवान चंद्रास्वामी जैसे पाखंडी इस ही ज़मीन पर पैदा हुए।  

नाज़रीन अगर आज मुख़ालेफ़ीन में से कोई फ़तहयाब हुआ है तो उसकी वजह सिर्फ़ और सिर्फ़ असदुद्दीन हैं।  जिन्होंने मुख़ालिफ़ीन को जीत का मंत्र दिया और उसका असर अब दिख रहा है।  असदुद्दीन को वज़ीर ए आज़म देखना बोहोत से अवाम असंद करेगें।  जिनमे शामिल हैं एक बड़ी अक्सरियत मुस्लिम अवाम के साथ सिख, क्रिस्टी, दलित, आदिवासी और सेक्युलर हिन्दू।   कियोंके वोह तालीमी आफ़ता हैं, क़ानून और दस्तूर के जानकार हैं, दानिशमंद हैं आगे के हालात पर गहरी पकड़ होती है।   दूसरी बात वतन से मोहब्बत उनके अंदर कूट कूट कर भरी हुई है।  तीसरी बात बदउनवानी (करप्शन) के कोई भी इलज़ाम उनके ऊपर नहीं है। 

अगर इंडिया महाज़ को सीटें कम पड़ती है और मजलिस उनको सपोर्ट करती है तो वज़ीर ए आज़म की पहेली पसंद असदुद्दीन ही होंगे।  

सहाफ़ी ज़ुबेर

Wednesday, 2 April 2025

क़ानूनी चाबुक अब फ़रेबी सहाफ़ियों पर चलना चाहिए।

अज़ीज़ नाज़रीन,

हिंदुस्तान की तक़दीर में तबाही और बर्बादी, तक़सीम की अहम् वजह बेगुनाह मुसलमानों की ग़ैर क़ानूनी गिरफ़्तारी और अकसरियत अवाम के गुनाहों की अनदेखी रही है।  एक जानिब जहाँ मासूम शरजील इमाम, उमर ख़ालिद, शिफ़ा उर रेहमान, ताहिर हुसैन जैसे सैकड़ों मुसलमान दिल्ली दंगों के इलज़ाम में आजतक ५ सालों से जेल में बंद हैं।  वहीँ कपिल मिश्रा दंगों का एहम मुल्ज़िम ५६ लोगों का क़ातिल वज़ीर क़ानून बना बैठा है। आज ५ साल बाद कचहरी ने उसके ऊपर FIR  दर्ज करने की हिदायत दी है। अदालत ने कहा पुलिस की ट्रैक रिपोर्ट के हिसाब से वोह उस जगह मौजूद था जहाँ दंगा हुआ।  यह मज़हबी तफ़रीक़ है। इसके अहम मुजरिम भारतीय ज़ाफ़रानी मीडिया के वोह सहाफ़ियों की टोली है जो हर वक़त हिन्दू मुस्लिम करते थे।  मुसलमानों का मीडिया ट्रायल कर उनके लिए जेल का रास्ता हमवार करते थे। 

मुस्लिम आला तालीमी आफ़ता यूनिवर्सिटी के तहक़ीक़ीन को जेल में ५ सालों से क़ैद कर के रखा है।  नाज़रीन ऐसे कई मामले सामने आये जिसमे मीडिया ट्रायल के बाद पुलिस ने मुस्लिम बच्चों को गिरफ़्तार किया ५ साल ७ साल किसी किसी मामले में १० और २० साल जेल में रहने के बाद अदालत को उनके ख़िलाफ़ कोई ठोस सुबूत न मिलने पर उनको बाइज़्ज़त रिहा किया गया।  तब्लीग़ी जमात बेहतरीन मिसाल है।  कैसे कैसे अलफ़ाज़ बोले गए थे मौलाना साद साहब की रूहानियत को एक झटके में दहशतगर्दों से मिला दिया था।  कारोना बम, कारोना आतंकी।  जो जिस ज़मीर फ़रोश ज़ाफ़रानी सहाफ़ी के ज़ेहन में आ रहा वोह अलफ़ाज़ दिए जा रहे थे।  लेकिन अदालत ने क्या पाया कुछ नहीं ना ही साजिश के कोई सबूत मिले और ना ही ताबिलगी जमात का एक भी मुसलमान करोना फ़ैलाने का ज़िम्मेदार पाया गया सभी बाईज़्ज़त बरी हो गए।  

जहाँ हिन्दू दहशतगर्दाना जुर्म में मुलव्विस भी पाया जाता है तो उसको सिर्फ मुजरिम मुखातिब किया जाता है और मुसलमान पर फ़ौरन दहशतगर्द का लेबल लगा दिया जाता है।  अब अदालतों को सही और ग़लत का फ़ैसला करना होगा।  कपिल मिश्रा जैसे दरिंदे, ज़ालिम, वतन का ग़द्दार, इज्तेमाई क़ातिल को अदालत को दहशतगर्द  के क़ानून के अंदर गिरफ़्तार कर सज़ा देनी चाहिए।  

वहीँ ऐसे तमाम सहाफ़ियों के ख़िलाफ़ भी कारवाही होना चाहिए जो बग़ैर तहक़ीक़ मुस्लिम नौजवानों के ख़िलाफ़ एक तरफा माहौल तैयार करने के मुजरिम हैं।  उन सबके ख़िलाफ़ तहक़ीक़ होना चाहिए की किस के इशारे पर कहने पर यह सहाफ़ी से जल्लाद और दरिंदे बन गए।  इनकी आमदनी की जांच होना चाहिए।  २०१२-१३ में इनके पास कितनी दौलत और असासे थे और २०१४ के बाद इनकी आमदनी कितनी हुई।  

इनका इनकम टैक्स देना इनके जुर्म को कम नहीं कर सकता।  कियोंके अगर एक लूटेरा डाकू क़तल करता है और लूट के माल से एक चौथाई ग़रीबों में तक़सीम कर देता है बाक़ी अपने इस्तेमाल में लेता है। तो उसका जुर्म कम नहीं होगा।  उनकी सबकी जांच होना चाहिए मुजरिम साबित होने पर सज़ा के साथ तमाम असासे और दौलत ज़ब्त करना चाहिए।  

जिन मुसलमानों को हक़ की आवाज़ बुलंद करने पर जेल में ग़ैर ज़रूरी रखा गया उनको अक़वाम ए मुताहिदा से अमन और इंसानियत के मुहाफ़िज़ के तमग़े और एजाज़ से सरफ़रोज़ कर इज़्ज़त अफ़ज़ाई मिलना चाहिए।  जैसे नेल्सन मॉडेला को काले अवाम के हक़ के लिए हुकूमत से लड़ने पर जेल में रखा गया, बाद में उनको इज़्ज़त बक्शी गई।  

शरजील इमाम आला तालीमी आफ़ता तहक़ीक़ के तालिब इल्म हैं, उनके जैसा आला ज़हन और आला तालीम शायद ही किसी तालिब ए इल्म ने ली होगी।  वोह अपनी यूनिवर्सिटी के वाहिद तालिब ए इल्म हैं जो इतनी आला तालीम ले कर हर शेवे में सर ए फ़ेहरिस्त रहे।  

 

सहाफ़ी ज़ुबेर


Friday, 31 January 2025

बाप और बेटा

अज़ीज़ नाज़रीन, 

आज की कहानी बाप बेटे के दरमियान मोहब्बत और इज़्ज़त को ज़ाहिर करती है।  

किसी शहर में एक शख़्स रहता था।  उसने अपने अहल ए ख़ाना को आला मय्यार दिए और आला तालीम से नवाज़ा।  बेटा अब बोहोत बड़ा ताजिर बन गया।  उसने अपने वालिद के नाम पर कई कंपनियां खोली।  एक नई कंपनी की इफ़्तिताह पर कंपनी की इन्तेज़ामियाँ के तमाम आला मेमब्रानों का एक इजलास मुनक़्क़िद किया।   उसमे उसने अपने वालिद को सदर की कुर्सी पर फ़ाइज़ होने की गुज़ारिश की फिर उसने एक लम्बी चौड़ी तक़रीर की।   बेटे की इज़्ज़त अफ़ज़ाई देख कर वालिद ने बेटे के कंधे पर हाथ रख दिया। 

इस मौक़े पर सहाफ़ियों का हुजूम भी मौजूद था।  बेटे की तक़रीर के बाद सहाफ़ियों के सवाल जवाब का दौर का आगाज़ हुआ।  सहाफ़ी ने बेटे से पूछा इस दुनिया में सबसे ताक़तवर तुम किस को मानते हो।  वालिद को तवक़्क़ो थी की बेटा उसका नाम बताएगा लेकिन बेटे ने बड़े ही फख्र से  जवाब दिया में अपने आपको सबसे ताक़तवर मानता हूँ।  बेटे का जवाब सून कर वालिद का दिल टूट गया और उसने अपने बेटे के कंधे से हाथ उठा लिया। 

फिर सवाल किया गया आप दुनियां में सबसे ज़्यादा कामयाब किस को मानते हो तो उसने जवाब दिया बेशक मेरे वालिद को।  अब वालिद को कुछ माजरा समझ में नहीं आया।  अगर वोह कामयाब है तो बेटा कैसे सबसे ज़्यादा ताक़तवर हो गया।

इजलास के बाद बाप ने बेटे से पूछा बेटा तुमने अपने आपको दुनियां का सबसे ज़्यादा ताक़तवर किस बुनयाद पर बोला था।

वालिद की बात सून कर बेटा नूरानी मुस्कुराया और बोला जब सहाफ़ी मेरे से सवाल कर रहा था तब आपका हाथ मेरे कंधे पर था।  मेने अपने आपको सबसे ज़्यादा ताक़तवर जाना।  लेकिन जब आपने हाथ हटा लिया तो आप सबसे ज़्यादा कामयाब हो गए। 

बेशक वाल्दैन की शफ़क़त और तहफ़्फ़ुज़ में नस्लें परवान चढ़ती हैं।  

सहाफ़ी ज़ुबेर

Thursday, 6 June 2024

मोदी जीत कर भी हार गया।

मोदी का हाल आज ऐसा है जीत कर भी हार गया। एक सिनेमा आई थी "रेस" उसमे जो दरिंदा शैतान डाकू विलेन होता है वोह बोहोत बड़ा व्यापारी और अहंकारी दरिंदा होता है। वोह मैजिक गेम को अपने चमचे व्यापारी दोस्तों को फायदा पहुँचाने के लिये घोड़ों की रेस पर जूआ खेलता है। उसका मुक़ाबला हीरो से होता है। वोह दरिंदा शैतान हीरो के घोड़े की जीत पर खरबों रुपये का दाँव लगा देता है। रेस मे अपने घोड़े को धीरे चलवाता है। हीरो उस दरिंदे के घोड़े से अपने घोड़े को और धीरे करवा देता है। होता वहीं है जो राम को लाया है हम उसको लायेगें। और क़ातिल दरिंदा शैतान जीत जाता है। लेकिन उसने खरबों रुपये का जूआ जो हीरो के घोड़े पर लगा दिया था वोह सब डूब गया। आलिशान महल से निकल कर रोड पर आ गया दिल का दौरा पड़ा सो अलग। उस जीत का जश्न ही नही बना पाया। 

जिस तरह विलेन ने हीरो के घोड़े पर दाव लगाया था उसी तरह हीरो ने खरबों डॉलर विलेन के घोड़े की जीत पर लगाए थे। जब विलेन का घोड़ा जीत गया तो वोह तमाम पैसा हीरो को मिला और विलेन के हाथ आया भिकारी का कटोरा। 

मोदी जीत कर भी हार गया। भक्तों की ऐसी हालत है ना खुल के हँस पा रहे हैं और ना ही सबके सामने रो पा रहे हैं। उनको ख़ुद को नही समझ आ रहा है ख़ुशी बनाये या सोंग। 

वही हाल सियासत के घोड़े पर सवार जीत कर आये मोदी का है। अगर वज़ीर आज़म बन भी जाता है तो उसको ग़ुलाम के जैसे गले मे खीच तान का पट्टा हर वक़्त बँधा रहेगा। वोह कोई भी फेसला ग़ैर क़ानूनी मन माने तरीके से नही ले पायेगा। 

जितनी अय्याशी मौज मस्ती जनता के टैक्स पर करना थी कर ली अब पाई पाई का हिसाब देना होगा। 


Journalist ज़ुबेर

Sunday, 2 June 2024

जंग का अगला महाज़ खुलेगा हिंदुस्तान पाकिस्तान के दरमियान।

अज़ीज़ नाज़रीन, 

भारत में इन्तेख़ाब का ख़ुमार ख़तम हुआ उसके साथ ख़तम हुआ अक़ीदत मंदों के भगवान की ऊल जलूल बकवास का दौर, जिसको सुन कर ऊबकारी आने लगी थी।  ऐसा महसूस होने लगा था की अब यह शख़्स वक़ाई में ज़ईफ़ हो गया है और इसको किसी बेहतरीन नफ़्सियाती जर्राह या तबीब से राब्ता क़ायम करने की सख़्त ज़रुरत है।

नाज़रीन  जिस हिसाब से एग्जिट पोल के नतीजे आये हैं उसमे ज़ाफ़रानी महाज़ को ४०१ सीटें दिखाई गई हैं अगर वोह अदद हक़ीक़त नतीजों में तब्दील हो जातें हैं तो जंग का अगला महाज़ हिंदुस्तान पाकिस्तान के दरमियान खुल जाएगा।  जिस हिसाब से २०१४ की हिंदुस्तान की ग़ुलामी के बाद ज़हरीली कीड़े और मीडिया के ज़ाफ़रानी दरिंदों को पाकिस्तान बोहोत खटकता है हर मुद्दे पर पाकिस्तान के ऊपर अपना गुबार निकालते थे।  तो इंतेखाब में इस जीत के बाद सबसे पहली चीज़ कुछ होगी तो वोह पाकिस्तान के ऊपर हमला करने की होगी। 

वैसे भी जदीद इंडिया में हर वोह चीज़ जदीद हो चुकी है जो कभी बाहमी भाईचारे और पडोसिययों की मदद पर मबनी थी।  यहाँ तक की हिन्दू मज़हब की अक़ीदत भी तब्दील हो चुकी है और मोदी अब हिन्दू मज़हब का जदीद भगवान बन कर उभरा है।  फिर उसके फ़ैसलों को अकीदतमंद भी वैसे ही तसव्वुर करतें हैं जैसे की भगवान का फ़ैसला हो। 

वैसे तो हिन्दू मज़हब कई हिस्सों में बंटा हुआ है और एक नहीं लाखों भगवानों पर अक़ीदत है।  लेकिन जदीद भगवान मोदी के वजूद में आने के बाद मज़ीद हिन्दू मज़हब में कशीदगी बढ़ेगी।  जो हक़ीकत सनातनी हैं और राम के पुरशास्त्र पर यक़ीन रखतें हैं नाइंसाफीइंसानी खून बहाने किसी की हक़तलफी करने को गुनाह अज़ीम तस्लीम करतें हैं उनका भगवान मोदी के मज़हब और उसके अकीदतमंदों से सख्त टकराओ होता रहेगा।  कियोंके मोदी राक्षसों, ग़लीज़ विद्या, जादू टोना टोटका करके अपने मोदी मज़हब को फरोग दे रहा है।  जबकि सनातनी हिन्दू राम को मानाने वाले आला पाक तालीम, शफ़्फ़ाफ़ ज़ेहन इन्साफ पसंदी से काम करने पर यक़ीन रखतें हैं। 

मोदी ने तो हनुमान चालीसा को तब्दील कर के मोदी चालीसा लिख दिया।  ऐसा कहतें हैं हनुमान चालीसा पढ़ने से हिन्दू जंगजू में ताक़त आती है।  वहीँ मोदी चालीसा पढ़ने से ज़ालिम दरिंदों शैतानों को भगवान मोदी की मदद फ़राहम होती है।  वहीँ हिन्दू मज़हब में शिव को सबसे बड़ा अवतार माना जाता है कोई भी नया काम करने से क़ब्ल या तो

 " ॐ नमः शिवाय " लिखा जाता है या " ॐ गणपतये नमः " से काम का आगाज़ किया जाता है

वहीँ मोदी ने इस मन्त्र को तब्दील कर के ४०० पार नमः कर दिया है।

नाज़रीन मोदी नाम के इस ताजिर को मालूम है की हिन्दू कितना बेवक़ूफ़ है उसको मज़हब के नाम पर बहकाना कितना आसान हैं।  तभी तो भगवान रजनीश (ओशो) भगवान चंद्रास्वामी जैसे पाखंडी इस ही ज़मीन पर पैदा हुए।  अब भगवान मोदी गया जो कहता है में भगवान की जानिब से उसका ख़ास नुमाइंदा हूँ मतलब में भगवान हूँ।   मुझे किसी वालेदा ने अपनी योनी से नहीं जना बल्कि में तो ऊपर से भेजा गया हूँ।  एक ख़ास काम को सरंजाम देने के लिए मुझे भगवान से ख़ास हिदायत मिलती रहती है। 

ख़ैर हम जून का इंतज़ार करेगें।  लेकिन यह बात ते है अगर ज़ाफ़रानी महज़ को चार सो पार सीटें आती हैं तो खित्ते का अमन सख़्त ख़राब होने वाला है और हर हाल में दो एटॉमिक मुल्कों के दरमियान जंग होगी हर हाल में होगी।  वहीँ पाकिस्तान मई २०२४ को जब मोदी बीजेपी और मीडिया बोहोत पाकिस्तान का नाम ले कर कोस रहे थे तभी वाज़े कर दिया है हम एक जोहरी ताक़त हैं और हम जोहरी हथियारों को पहले नहीं इस्तेमाल करने के फ़लसफ़े को नहीं मानते।  अगर वक़्त आया तो हम दुश्मन पर पहले जोहरी हमला करने से नहीं चुकेगें। 

एक बात तो ते है अगले कुछ सालों तक मज़ीद हिंदुस्तान के अवाम को हर पल टेंशन, फ़िक्र और जंग के माहौल में जीना पड़ेगा।   जिस अमन और सुकून की उम्मीद लगाए बैठे थे हिंदी अवाम वोह अभी उन से कोसों दूर रहेगा।  जैसा की तवक़्क़ो कर रहे थे अगर सिलिंडर ५००० रूपये का हो जाए और पेट्रोल ५०० रूपये का सब्ज़ी भाजी १००० रूपये तक पहुंच जाएँ फ़िर भी हम मोदी को ही लायेगें, हम भूके मर जायेगें अपने बीवी बच्चों का गाला घोंट कर मार देंगें लेकिन हमारी पहली पसंद तो मोदी ही रहेगें वोह हमारे भगवान हैं। तो वैसा ही होगा इंशाअल्लाह वैसा ही होगा।  मेहगाई के चलते भगवान मोदी के मज़हब के अवाम को अपने बीवी बच्चों के गले घोंट कर मारना भी पड़ेगा, सुकून अमन फ़ौत भी होगा और सिलिंडर ५००० पेट्रोल ५०० पार भी होगा। 

जैसा की में हर बार बोलता हूँ कश्मीर मुद्दा जंग से ही हल होगा और ना सिर्फ कश्मीर बल्कि पूरा भारत होगा पाकिस्तान का ग़ुलाम।  फ़िर इस जंग में सख़्त बोहोत सख्त अमवात होंगी।  हर संघ, बीजपी और हिन्दू शिद्दत से पूरा ख़ित्ता पाक होगा। 

सहाफ़ी ज़ुबेर

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...