Friday, 31 January 2025

बाप और बेटा

अज़ीज़ नाज़रीन, 

आज की कहानी बाप बेटे के दरमियान मोहब्बत और इज़्ज़त को ज़ाहिर करती है।  

किसी शहर में एक शख़्स रहता था।  उसने अपने अहल ए ख़ाना को आला मय्यार दिए और आला तालीम से नवाज़ा।  बेटा अब बोहोत बड़ा ताजिर बन गया।  उसने अपने वालिद के नाम पर कई कंपनियां खोली।  एक नई कंपनी की इफ़्तिताह पर कंपनी की इन्तेज़ामियाँ के तमाम आला मेमब्रानों का एक इजलास मुनक़्क़िद किया।   उसमे उसने अपने वालिद को सदर की कुर्सी पर फ़ाइज़ होने की गुज़ारिश की फिर उसने एक लम्बी चौड़ी तक़रीर की।   बेटे की इज़्ज़त अफ़ज़ाई देख कर वालिद ने बेटे के कंधे पर हाथ रख दिया। 

इस मौक़े पर सहाफ़ियों का हुजूम भी मौजूद था।  बेटे की तक़रीर के बाद सहाफ़ियों के सवाल जवाब का दौर का आगाज़ हुआ।  सहाफ़ी ने बेटे से पूछा इस दुनिया में सबसे ताक़तवर तुम किस को मानते हो।  वालिद को तवक़्क़ो थी की बेटा उसका नाम बताएगा लेकिन बेटे ने बड़े ही फख्र से  जवाब दिया में अपने आपको सबसे ताक़तवर मानता हूँ।  बेटे का जवाब सून कर वालिद का दिल टूट गया और उसने अपने बेटे के कंधे से हाथ उठा लिया। 

फिर सवाल किया गया आप दुनियां में सबसे ज़्यादा कामयाब किस को मानते हो तो उसने जवाब दिया बेशक मेरे वालिद को।  अब वालिद को कुछ माजरा समझ में नहीं आया।  अगर वोह कामयाब है तो बेटा कैसे सबसे ज़्यादा ताक़तवर हो गया।

इजलास के बाद बाप ने बेटे से पूछा बेटा तुमने अपने आपको दुनियां का सबसे ज़्यादा ताक़तवर किस बुनयाद पर बोला था।

वालिद की बात सून कर बेटा नूरानी मुस्कुराया और बोला जब सहाफ़ी मेरे से सवाल कर रहा था तब आपका हाथ मेरे कंधे पर था।  मेने अपने आपको सबसे ज़्यादा ताक़तवर जाना।  लेकिन जब आपने हाथ हटा लिया तो आप सबसे ज़्यादा कामयाब हो गए। 

बेशक वाल्दैन की शफ़क़त और तहफ़्फ़ुज़ में नस्लें परवान चढ़ती हैं।  

सहाफ़ी ज़ुबेर

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