अज़ीज़ नाज़रीन,
भारत में इन्तेख़ाब का ख़ुमार ख़तम हुआ उसके साथ ख़तम हुआ अक़ीदत मंदों के भगवान की ऊल जलूल बकवास का दौर, जिसको सुन कर ऊबकारी आने लगी थी। ऐसा महसूस होने लगा था की अब यह शख़्स वकाई में ज़ईफ़ हो गया है और इसको किसी बेहतरीन नफ़्सियाती जर्राह से राब्ता क़ायम करने की सख़्त ज़रुरत है।
नाज़रीन हाल ही में बिहार में ६ रकून स्टेट असेंबली की फ़तह और महाराष्ट्र बल्दिया इन्तेख़ाब में मजलिस इत्तेहादुल मुस्लेमीन ने कारगरदेगी दिखाई है उस से साफ़ ज़ाहिर हो रहा है इत्तेहादुल मुस्लेमीन की मक़बूलियत में खासा इज़ाफ़ा हुआ है। जो बात वोह दिसम्बर २०२३ या उस से भी क़ब्ल कहते आ रहे थे उस ही मुद्दे पर मजलिस इत्तेहादुल मुस्लेमीन लड़े और फ़तह हासिल की है।
मजलिस के सदर हर मुबाहिसे हर तक़रीर में बोलते थे हर मुख़ालिफ़ खुद को मोदी से बड़ा हिन्दू दिखाना चाहता है। अगर मुख़ालेफ़ीन हिन्दू मुस्लिम पर चुनाव लड़े तो हरगिज़ ज़ाफ़रानी महाज़ नहीं जीत पायेगें। और मोदी चाहते ही यही है की चुनाव हिन्दू बनाम मुस्लिम कर दिया जाए फ़िर उसको हवा ज़ाफ़रानी तंज़ीम के तमाम रकून देना शुरू कर दें। जहाँ एक तरफा चुनाव हुआ की उसका फ़ायदा बीजेपी को होगा। मुख़ालेफ़ीन मुद्दों पर चुनाव लड़ें। हरगिज़ उसको हिन्दू मुस्लिम नहीं होने दें और ना ही इन्तेख़ाब को मुद्दों से हट कर मोदी को हिन्दू मुस्लिम, मंदिर मस्जिद, हिंदुस्तान पाकिस्तान के नाम पर अग़वाह करने दें।
मोदी, बीजेपी ने भरसक कोशिश की के इन्तेख़ाब हिन्दू मुस्लिम पर लड़ा जाए और अक्सरियत अवाम के दिल में नफरत का ज़हर मज़ीद बड़ा कर एक तरफ़ा अक्सरियत अवाम के वोट ज़ाफ़रानी तंज़ीम को मिल जाएँ।
नाज़रीन मोदी नाम के इस ताजिर को मालूम है की हिन्दू कितना बेवक़ूफ़ है उसको मज़हब के नाम पर बहकाना कितना आसान हैं। तभी तो भगवान रजनीश (ओशो) भगवान चंद्रास्वामी जैसे पाखंडी इस ही ज़मीन पर पैदा हुए।
नाज़रीन अगर आज मुख़ालेफ़ीन में से कोई फ़तहयाब हुआ है तो उसकी वजह सिर्फ़ और सिर्फ़ असदुद्दीन हैं। जिन्होंने मुख़ालिफ़ीन को जीत का मंत्र दिया और उसका असर अब दिख रहा है। असदुद्दीन को वज़ीर ए आज़म देखना बोहोत से अवाम असंद करेगें। जिनमे शामिल हैं एक बड़ी अक्सरियत मुस्लिम अवाम के साथ सिख, क्रिस्टी, दलित, आदिवासी और सेक्युलर हिन्दू। कियोंके वोह तालीमी आफ़ता हैं, क़ानून और दस्तूर के जानकार हैं, दानिशमंद हैं आगे के हालात पर गहरी पकड़ होती है। दूसरी बात वतन से मोहब्बत उनके अंदर कूट कूट कर भरी हुई है। तीसरी बात बदउनवानी (करप्शन) के कोई भी इलज़ाम उनके ऊपर नहीं है।
अगर इंडिया महाज़ को सीटें कम पड़ती है और मजलिस उनको सपोर्ट करती है तो वज़ीर ए आज़म की पहेली पसंद असदुद्दीन ही होंगे।
सहाफ़ी ज़ुबेर
No comments:
Post a Comment