अज़ीज़ नाज़रीन,
हक़ और बातिल के दरमियान जो जंग का आग़ाज़ हुआ है, उसमे इस्लाम और मुजाहेदीन हर महाज़ पर सुरखुरू हो रहें हैं. इस जंग की इब्तेदाह भारत से हुई थी और इसका ख़ात्मा भी भारत पर आ कर ही होगा। अफ़ग़ानिस्तान के तक़रीबन ८५ फीसद हिस्से पर अब मुजाहिदों का क़ब्ज़ा है और भारत के संघी दहशतगर्दों की सख़्त तरीन फ़ज़ीहत हो रही है. अमेरिका के ट्रम्प इन्तेज़ामियाँ के कन्धों पर बंदूक़ रख कर और अफ़ग़ानी ग़ुलाम हुकूमत से सांठ गाँठ कर के संघी दहशतगर्द इस्लामिक ज़मीन पर अपना क़ब्ज़ा ज़माना चाहता था. वोह महज़ आलमगीर औरग़ज़ेब रेहमतुल्लाह अलहे की फारस से बर्मा और कश्मीर से कन्याकुमारी तक हुकूमत करने के रूहानी जज़्बे और तारीख़ी रिकॉर्ड को तोडना चाहता था. साजिश, मंसूबा बना कर भारत की ज़ाफ़रानी हुकूमत ने संघी दहशतगर्दों को अफ़ग़ानिस्तान में घुसाया था. लेकिन अब फ़ज़ीहत हो रही है और जान के लाले पड़े हुए हैं.
भारत ने अपना मिशन अफ़ग़ानिस्तान में बंद कर दिया है और तमाम सिफारती इन्तेज़ामियाँ को वापिस आने की हिदायत दी है. लेकिन बड़ी बात वही है दुश्मनों को क्या अब तालिबान आसानी से जाने देंगें। पूरी तफ्तीश होगी क्या उनका मंशा था क्या साजिश थी. अफ़ग़ानिस्तान के किस किस हल्क़े में बम ब्लास्ट में भारत की हुकूमत का हाथ था. सब चीज़ें बहार निकल कर आयेगीं. जब अमेरिका के साथ मिल कर अफ़ग़ानी फौजियों ने इस्लाम और मुसलमानों के साथ ग़द्दारी की मुनाफ़िक़ाना किरदार पेश किया तो उनको नहीं बक्शा जा रहा है. फिर दुश्मन वोह भी ज़ाफ़रानी शिद्दत और संघी दहशत उसको किसी सूरत से तालिबान माफ़ नहीं करेगें।
नाज़रीन भारत की जंग के हर महाज़ पर सख़्त फ़ज़ीहत और रूस्वाई हुई है. हाल ही में क्रोएशिया और अज़रबाइजान के दरमियान जंग में क्रोएशिया को बेदर्द हार का सामना करना पड़ा था. जिस फतह के ऊपर और दौरान जंग इस सहाफी ने अज़रबाइजान की हौसला अफ़ज़ाई में मज़मून शाया किये थे. उस जंग में वालिद (इजराइल) और फ़रज़न्द (भारत) को मुँह की खानी पड़ी थी. ज़िल्लत और रूस्वाई की दहशत की पनाह गाह इजराइल के बग़दादी को अपनी कुर्सी से हाथ धोने पड़े थे. क्योंकि क्रोएशिया को भारत और इजराइल जंगी महाज़ पर जंगी आशियात, असासे और जंगी साज सामान से मदद रहे थे. जबकि अज़रबाइजान को तुर्की, पाकिस्तान और ईरान की मदद शामिल थी.
उस जंग में क्रोएशिया की हार को इस्लामिक बरदारी अमेरिका और बातिल ताक़तों की शाकिस्त तस्लीम कर के चल रहे थे. और हुआ वही अज़रबाइजान के फतह के परचम के साथ इजराइल, अमेरिका और भारत के तख्ते पलटने शुरू हो गए. उनकी ताक़त हौसले पस्त पढ़ गए. नतीजा इजराइल बग़दादी की दहशत का खात्मा हुआ और अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका का तख्ता पलट हुआ. अमेरिकी इतने ख़ौफ़ज़दा हो गए थे की काबुल एयर पोर्ट को रातों रात खामोशी से खाली कर के भाग खड़े हुए.
अब हदफ़ भारत ही होगा। जिस अहमद शाह अब्दाली, मेहमूद ग़ज़नवी जैसे जलील क़द्र बादशाहों को आक्रांता ज़ालिम लूटेरा बोल कर शिद्दत पसंद ज़ाफ़रानी अवाम के ज़ेहनों में आलूद भरते थे अब उन्ही बादशाहों की नस्लें भारत की जानिब यलग़ार करेगी.
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