Sunday, 21 October 2018

हिन्दू आतंकिओ की बुद्धि हुई भ्रष्ट


पंजाब रेल हादसे का हिन्दू आतंकिओ के दिलो दिमाग पे गहरा धक्का लगा है, इस हादसे ने उनकी सोचने और समझने की ताक़त खत्म कर दी है.  भक्त इस बात को समझ रहे है और महसूस भी कर रहे है की हादसों और प्राकृतिक आपदाओं के पीछे बीजेपी के ही कुकर्म है लेकिन अब वो बीजेपी को कोस सकने और मोदी को रावण बोल बीजेपी और मोदी के कुकर्मो को इन सब हादसों के लिए खुल के बोलने से क़ासिर हैं. 

जिस तरह से बीजेपी, मोदी और हिन्दू आतंकिओं की आदत है किसी भी मसले पे अपने कुकर्मों को छुपाने के लिए एक बलि का बकरा तलाश कर के उसकी बलि दे दी जाए.  फिर ऐसा ही पंजाब रेल हादसे को दबाने के लिए मुस्लिम समुदाय के खिलाफ झूट और फरेब फैला के हिन्दू मुस्लिम फसाद करने की योजना है.

दो घटनाएं जिसमे हिन्दू तशद्दुत पसंद तंज़ीमों ने मुस्लिम समुदाय के ऊपर झूट फैला के षड्यंत्र रचा के दंगा किया है.

पहली घटना उत्तर प्रदेश के बागपत के तीलवाड़ा गांव से है जहाँ एक गाये के बछड़े की मौत पे एक मुस्लिम युवक पर रेप करने के आरोप में केस दर्ज करवा दिया गया है। बछड़े की शनिवार को मौत हो गई है। हालांकि रेप की घटना की पुष्टि नहीं हुई है और आगे की कारवाही और घटना की पुष्टि करने के लिए एक सैंपल आगरा लैब भेजा है। पुलिस प्रशासन रिपोर्ट आने का इंतज़ार कर रहा है।  वहीं घटना के बाद से गांव में तनाव है और हिंदू संगठन पुलिस पे दबाव बना के दंगा फसाद करने के लिए उत्तेजित भाषण बाज़ी कर रहे है।   छपरौली थाने के एसओ विजय कुमार ने बताया, 'बछड़े के मालिक की तहरीर पर हमने एफआईआर दर्ज कर ली है।

एक दूसरी घटना में बिहार के सीतामढ़ी गांव में मूर्ति विसर्जन के के बाद हिन्दू समाज की तरफ से ज़बरदस्त पत्थरबाज़ी होने के बाद दो गुटों में ज़बरदस्त झड़प हुई अफवाहों का बाजार गर्म न हो इसलिए इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है.

बिहार के सीतामढ़ी में शनिवार की सुबह दुर्गा मूर्ति विसर्जन को लेकर उठे विवाद के बाद दो गुटों में तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जिसके बाद पुलिस को हालात को काबू में लाने के लिए धारा १४४ लगानी पड़ी.  हिन्दू शर पसंदों ने आरोप लगाया है की जब वो लोग शहर के मधुबन इलाके में दुर्गा मूर्ति का विसर्जन करने के लिए जा रहे थे तभी मुस्लिम समुदाय की तरफ से कुछ उपद्रवियों ने पत्थरबाजी की जिसके बाद मामला उग्र हो गया. इसके बाद कई घंटों तक दोनों गुटों के बीच में जमकर पत्थरबाजी होती रही.

पत्थरबाजी की घटना में कुछ लोगों को गंभीर चोटें भी आईं हैं. दोनों तरफ से पत्थरबाजी के दौरान उपद्रवियों ने पुलिस के आधा दर्जन गाड़ियों के शीशे क्षतिग्रस्त कर दिया. उपद्रवियों ने इस दौरान कुछ मोटरसाइकिल और निजी वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया.

सीतामढ़ी पुलिस अधीक्षक विकास बर्मन ने बताया कि दुर्गा मूर्ति विसर्जन के दौरान दो गुटों के बीच में तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई थी मगर पुलिस ने माहौल को शांत करा दिया है. अफवाहों पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने इंटरनेट सेवा बन्द कर दिया है.

पत्रकार जुबेर का हालते हाजरा पे तनक़ीद

दोनों ही मामले झूट और फरेब पे आधारित है और ये हिन्दू आतंकिओं की मानसिक दिवालिये पन को दर्शाते है.  हिन्दू संघटनो को झूट के आधार पे दंगा फसाद करने के अलावा ओर क्या आता है. पंजाब रेल हादसे मे मौत के ताण्डव से इन लोगो की बुद्धि भ्रष्ट हो गई है सो इस तरह की हरकते कर के एक खास समुदाय को प्रताडित करना चाहते है.  मूर्ति वित्सर्जन के समय हिन्दू इन्तेहापंसदों का इल्ज़ाम था की पत्थर फेके गये, जिसकी वजह से फसाद हो गया. पहली बात हिन्दू आतंकी ज़ेहननशीन कर लें की मुस्लिम समुदाय को तुम लोगो से कुछ भी लेना देना नहीं है. तुम मूर्ती डुबाओ, तुम मूर्ती की पूजा करो कोई काहे को पत्थर मारेगा.  ना ही इस्लाम मज़हब इस बात की इजाज़त देता है और ना ही मुसलमान इतना कमज़ोर है की एक मूर्ती पूजा करते हुए लोगो पे बे वजह पत्थर मारेगा.  मुसलमान किसी को परेशान नहीं करते हां अगर कोई उनको परेशान करेगा तो उसको छोड़ते भी नहीं है. 

दूसरी बात इस तरह की अफवाहे फैला के क्या साबित करना चाहते है हिन्दू आतंकवादी और किसके कुकर्मो पे पर्दा डाल रहे है.  जब हिन्दू साधू संतों दूआरा महिलाओं पे बलात्कार की जैसे आंधी आ गई और हर दुसरे रोज़ मंदिरों, आश्रमों से साधू पकडे जाने लगे तो इन्ही हिन्दू संघटनो की एक आशू महाराज को आसिफ खान बता के इस्लाम और मुसलमानो को बदनाम कर दिल्ली में दंगा फसाद करने की की साजिश थी.  जो इस पत्रकार ने बे नकाब की और पुलिस और दिल्ली प्रशासन को सतर्क रहने की अपील की थी सो वो हादसा टल गया था.

उत्तर प्रदेश में बांदा जिले के चिल्ला थाना क्षेत्र के सादीमदनपुर गांव में एक स्कूल के आरोपी शिक्षक जयराज की कथित पिटाई से तीसरी कक्षा में पढ़ रहे छात्र की मौत हो गई। गांव के सहयोग बने आश्रम में अंरबाज (8) तीसरी कक्षा का छात्र था। किसी बात पर आरोपी शिक्षक जयराज ने उसे बुरी तरह पीटा था, जिससे उसका एक पैर और कई पसलियां टूट गई थीं।   परन्तु मुस्लिम समाज ने तो इसको पंजाब रेल हादसे से नहीं जोड़ा और ना ही ऐसा कहा की आरोपी शिक्षक ने मुस्लिम बच्चे की जान पंजाब में हुए हादसे पे अपने क्रोध की अग्नि को कम करने के लिए ली है. 

पुलिस की भी इन मामलो में दोहरी भूमिका है जहाँ एक और शिक्षक की पिटाई से हुई मौत पे उसके खिलाफ पुलिस ने गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया जबकि पूरे सबूत शिक्षाक के खिलाफ है तो काहे को उसके खिलाफ ३०२ की धाराओं में केस बुक नहीं किया गया,  वही दूसरी तरफ बछड़े से रेप की पुष्टि हुई भी नहीं है और ना ही फोरेंसिक रिपोर्ट आई है और बछड़े की मौत का कारण पता चल पाया है फिर भी पुलिस ने एक ना बालिग मुस्लिम के खिलाफ आईपीसी की ३७७ (अप्राकृतिक संबंध) और ४२९ (जानवर के साथ क्रूरता) की धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। 

पंजाब हादसे से इन आतंकिओं के सोचने और समझने की शक्ति ही खत्म हो गई है और वो मानसिक रूप से दिवालिये हो चुके है इसी लिए इस तरह की झूटी ओर बे बूनायाद बातों पे हिन्दू आतंकी फसाद मचाना चाहते है;  तो तय्यार रहे प्रकृतिक आपदाओं के लिये.  इनके अपने मौत के आगोश मे चले गये ओर जाते रहेगे फिर भी इनको अक़्ल नही आ रही है.  जितना झूट फरेब फेलाओगे उतना तुम ज़लील ओर रूसवा होगे. ए तो प्रकर्ति का नियम है.  तुम ना मानो हम तो मानते है.

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