अज़ीज़ नाज़रीन,
आज का मौजू आने वाली बड़ी तबाही से मुनसलिक है। हाल ही में तमाम आलम में एक वबा कोविद-१९ (करोना वायरस) ने क़ेहर बरपा कर दिया है। यह करोना क्या है, यह असल में आला क़िस्म का एक कैंसर का वायरस है। जो सीधा इंसान के फेफड़ों, जिगर और जिस्म के मुख्तलिफ आज़ा पर हमला करता है। यह एक ऐसा कैंसर है जो पहले इंसानी नफ़्स ने कभी नहीं देखा, पाया और महसूस किया है। पुराने कैंसर से जब इंसान मुत्तासिर होता था तब उसको कुछ दिनों की मोहलत दी जाती थी के वोह अपना इलाज वगैरा के साथ ज़िंदा रह सकता था। जब हिन्द में कैंसर के मरीज़ों की भरमार हो रही थी तब इस सहाफी ने अपनी तहक़ीक़ात में पाया था उसपे कई मज़मूनों में कैंसर का ज़िक्र किया था। उस कैंसर में मरीज़ सालों साल बिस्तर पर पड़ा रहता है, लेकिन इस कोविद-१९ नाम के कैंसर में मरीज़ आन्नं फान्न में कुछ ही हफ़्तों के अंदर फौत हो रहा है।
जो जर्राह तबीब और साइंसदान दावा कर रहे हैं की हमने कोविद-१९ की वेक्सीन ईजाद कर ली है और हम जल्द ही करोना पर काबू पा लेंगे। यह लोग असल में अवाम को गुमराह कर रहे हैं। कोई सी वेक्सीन कोई सी दवा इस बीमारी पर काबू नहीं कर सकती। क्या कैंसर पर डॉक्टर्स ने क़ाबू पा लिया है जो कोविद पर क़ाबू पाने की बात करतें हैं।
दूसरी बात जो इस सहाफी ने अपनी तहक़ीक़ात और तफ्तीश में पाई है वोह यह है की जितने भी मरीज़ एक बार इस बीमारी से मुत्तासिर हो गए, वोह किसी भी क़िस्म की खुशफहमी में ना रहें की हम तो करोना निगेटिव हो गए अब हमें किसी क़िस्म का ख़तरा नहीं है। नहीं, असली इम्तेहान तो इनका ठीक होने के बाद ही शुरू होगा। उनको जिस क़दर परेशानी और तकलीफ का सामना करना होगा वोह उनकी सेहत और रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी से ताल्लुक़ रखता होगा। इस वबा या वायरस करोना से मुत्तासिर हो गए उनके लिए आगे की राह बेहद तशवीशनाक और दर्दनाक होगी। ठीक होने के बाद भी उनके ऊपर इस वबा और वाइरस का क़ेहर जारी रहेगा। ठीक हो गए मतलब मामला ख़त्म, ऐसा नहीं है हरगिज़ नहीं।
किसी
भी वक़्त यह वाइरस ठीक हुए शख्स के ऊपर दोबारा हमलावर हो सकता है। जब दूसरी मर्तबा हमलावर होगा तो दो गुनी ताक़त और
क़ुव्वत से हमला करेगा।
दरअसल यह इताबे इलाही है, और अज़ाब है उन लोगों पर जो मज़हबी इख़्तेलाफ़ में हद से ज़्यादा ताजाऊस करते थे और अपनी हुदूत पार कर के किसी के भी खुदा पर तोहमत तराशी करते थे। और जब ऊपर वाले का अज़ाब आता है तो सख़्त होता है। फिर कोई सिफारिश कोई अर्ज़ी मंज़ूर नहीं की जाती है। अब तो चखो उस अज़ाब का मज़ा जो तुम दूसरों के लिए तवक़्क़ो करते थे।
No comments:
Post a Comment