Thursday, 29 June 2017

ये हे नपुंसको की फौज

दोस्तों आपसे निवेदन हे मेरा पूरा लेख पढ़िए और फिर कहिये क्या आपको भारत की सेना पे गर्व हे

हर देश के नागरिक को अपने देश की सेना से प्यार होता है देश की सेना पे अभिमान होता हे उसी तरह भारत की जनता को भी अपने देश की सेना से प्यार हे और क्यों हो वो देश की रक्षा जो करती है.   अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता और मुस्लिम चेहरा आज़म खान ने भारत की सेना पे कुछ टिप्पड़ी की जिसका में एक पत्रकार और इंसान की हैसियत से समर्थन करता हूँ.   आज़म साहब के सेना के ऊपर कमेंट पब्लिक डोमेन में आते ही गुमनाम लोगो का उनको ट्रोल करने का सिलसिला शुरू हो गया.  ट्रोलिंग में ऐसे चेहरे भी उत्तेजित हो कर ट्रोल करने लगे  जो अपने माता पिता को गाली देने पे भी उत्तेजित नहीं होते थे


आज़म साहब की टिप्पड़ी पे एक विशेष गुमनामी चेहरे का ट्वीट देखने को मिला जो अंधेरो में उजाले की तलाश करता दिख रहा था.  किसी हरयाणा के बीजेपी के संघी ने आज़म साहब की टिप्पड़ी पे ट्वीट किया "आज़म खान इतना ज़रूर याद रखना की हिन्दुस्तान में तू जिन्दा इसी लिए हे क्योकि सीमाओं पर सेना पहरा दे रही हे जिसे तुम अपमानित कर रहे हो में हरयाणा के उस गुमनाम चेहरे को कहना चाहता हूँ मारना और जिन्दा रखना उपरवाले का काम हे किसी बलात्कारी का नहीं।  फिर अगर भारत की सेना बलात्कारी नहीं होती तो सब जगह जहा जहा भारत की सेना के जवान तैनात हे एक ही जैसी खबरे कहे को सामने आती हे. सुकमा में जवानो के गुप्त अंग काटे गए. आज़म साहब कश्मीर का ज़िक्र कर रहे है के जवानो के गुप्त अंग काटे गए. शर्मीला एरोन १८ साल तक नार्थ ईस्ट में सेना के ज़ुल्म और महिलाओ पे बलात्कार के खिलाफ भूख हड़ताल पे बैठी थी.  नार्थ ईस्ट में महिलाओ ने नग्न नाच किया था भारतीय सेना की बढ़ती हुई बलात्कार की घटनाओ के खिलाफ।   आसाम में सेना के खिलाफ महिलाओ पे अत्याचार के खिलाफ एक रोष हे. 

देश की सेना पे हर नागरिक को अभिमान होना चाहिए लेकिन अँधा प्यार नहीं होना चाहिए जो ज़ुल्म और बर्बरता को भी इसलिए अनदेखा कर दे क्योकि वो देश की सेना कर रही हे.  यहाँ अपना पक्ष रखते हुए दो बाते ज़रूर साफ़ करना चाहूँगा एक जो मंत्री संत्री देश की सेना के लिए जान देने और जान लेने के जज़्बे का ढोंग और दिखावा करते हे कितने बीजेपी के मंत्रीओ के बच्चे सेना में अपना योगदान दे रहे हे.  दूसरी बात सेना में भर्ती होने के पीछे देश सेवा मकसद नहीं होता हे परन्तु जो लाभ  सेना में भर्ती होने के बाद प्राप्त होता हे उसको लेना मकसद होता हे. कैंटीन से हर वस्तु सब्सिडी भाव में, रेल तथा दुसरे ट्रासंपोर्ट में सब्सिडी, पेंशन, फ्लैट सब्सिडी रेट मेंस्टेटस वगेरा वगेरा.  अगर देश प्रेम हे तो क्या सरकार दुवारा दी जाने वाली सारी सुविधाय वापस ले ली जाए फिर भी जनता सेना में भर्ती होने के लिए आएगी।


जहा तक सेना का सवाल हे में बहैसियत एक नागरिक और पत्रकार कभी भी अँधा प्यार नहीं दिखाना चाहूँगा, अगर देश की सेना से कुछ गलत हो रहा हे तो सेना को भी कटघरे में खड़ा होना पड़ेगा और सेना का भी कोर्ट मार्शल होगा.   मुझे बहैसियत पत्रकार सेना के ज़ुल्म और बर्बरता के वीडियो कश्मीर से प्राप्त होते रहते हे. हाल ही में कुछ वीडियो मेरे को कश्मीर की न्यूज़ एजेंसीज से प्राप्त हुए और हर वीडियो में अकेला निहत्ता कश्मीरी और उसके ऊपर ज़ुल्म करते जवान,  बन्दूक उसके सीने पे और लाठीओ की बरसात करते अधमरे कश्मीरी पे सेना के जवान. फिर जब लाठीओ और थप्पड़ो से सेना के जवानो का दिल भर जाता तो कश्मीरी निहत्ते अकेले नौजवान को कहा जाता बोल पाकिस्तान मुर्दाबाद हिन्दुस्तान ज़िंदाबाद।  एक विडिओ में एक अकेला निहत्ता नौजवान रोड पे जा रहा होता है, और उसको - जवान घेर लेते है और लातो, घूसों और डाँडो की बरसात कर देते हे फिर एक कहता हे सजदा कर सजदा कर माँ, बहिन की गन्दी गालिया देते हे. वो कश्मीरी नौजवान कहता हे में रोज़े से हूँ. तो उसपे भारतीय सेना का एक जवान कहता हे किस ने कहा था रखने को हमने कहा था क्या; बोल. कल से रखेगा रोज़ा बोल; कल से रखेगा. मरता क्या नहीं करता उस बेचारे ने कहा नहीं रखूँगा।  तो इससे य भी साबित होता हे के भारतीय सेना न सिर्फ बर्बरता और तशद्दूत कर रही हे बल्कि एक मुस्लिम को उसके मज़हबी एतेक़ाद से भी दूर कर रही हे. क्योकि एक मुलसमान सजदा सिर्फ खुदा के सामने करता हे, और रोज़ा भी खुदा के लिए रखता हे.  

कुछ अंध भक्तो ने उन सभी विडिओ को झूटा और फ़िल्मी करार दिया लेकिन सेना की बर्बरता का में जीता जागता सबूत हूँ.  मेरे पिछले कश्मीर दौरे पे मेने भारतीय सेना का बर्बरता और ज़ुल्म का असली चेहरा और रूप देखा। में श्रीनगर से सोपोर जा रहा था. मेरी गाडी के आगे एक मारूति ८०० जा रही थी जिसको एक २०-२२ साल का नौजवान चला रहा था.  अचानक दूसरी तरफ से भारतीय सेना की एक जीप ने उस मारूति वाले के सामने लगा दी और - जवान बंदूकों से लेस उस मारूति वाले को ज़बरदस्ती कालर पकड़ के कार से बहार निकाल के मार पीट शुरू कर दी. में सब देख के भोचक्का रह गया. उस मारूति वाले की कार का फाटक खुला रह गया और फिर उसको लातो और थप्पड़ो से मार पीट करते हुए एक बड़ा सा सेना का वेयर हाउस टाइप था उसमे ले गए.  जिसमे एक पत्रे का बड़ा सा दरवाज़ा था.  लड़का सभ्य और पड़ा लिखा दिख रहा था.  मेरे पास विडिओ केमेरा था लेकिन वो समूचा द्रश्य शूट करने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाया, सोचा पराया स्टेट हे और सेना जब वहा के लोकल नागरिको के ऊपर ज़ुल्म और बर्बरता की सारी हदे पार कर सकती हे तो अगर मेने विडिओ शूट किया तो मुझे  ही गोली मार देंगे और इलज़ाम लगा देंगे की एक आतकवादी मारा गया.  मेने जब गाडी के चालक से पुछा सब क्या हे तो उसने जवाब दिया साहब तो यहाँ रोज़ का किस्सा हे. अब इसकी मौत पक्की हे और दुसरे रोज़ पेपर में न्यूज़ आएगी की एक आतकवादी सेना के साथ मुठभेड़ में मारा गया.  आगे उसने कहा तो ठीक हे के उसको अंदर ले गए मेने तो कई बार रोड पे गोली से मारते हुए देखा हे


में उन सभी भारत के लोगो से पूछना चाहता हूँ जो भारत की सेना को 'बॉयज ऑफ़ ब्रेव हर्ट्स' का खिताब देते हे जब भी एकेला निहत्ता कश्मीरी नौजवान दिखता हे तो - या उससे ज़्यादा सेना के जवान बंदूकों के साथ उसपे क्यों टूट पड़ते हे.  और उस अकेले पे तशद्दुत और बर्बता क्यों करते हे. अगर भारत की सेना के जवान 'बॉयज ऑफ़ ब्रेव हर्ट्सहे तो अकेले निहत्ते कश्मीरी पे - बंदूकों  से लेस भारत के सेना की क्या ज़रूरत हे. एक के ऊपर एक काफी हे.  क्योकि भारत की सेना के जवानो को खौफ हे निहत्ते कश्मीरी नागरिको से भी वो डरते हे इसलिए अकेले निहत्ते पे - या उससे ज़्यादा बंदूकों के साथ हमला करते हे

मेरा लेख कश्मीरी संगबाज़ो और निर्दोष जनता को समर्पित हे जो भारतीय सेना की बर्बरता और जुल्म के शिकार हो रहे हे.  मेरे ग्रुप 'ऑटोनोमस जर्नलिस्ट' और मेरे पेज 'जर्नलिस्ट जुबेर अहमद खान' पे कश्मीरी जनता के ऊपर भारतीय सेना के ज़ुल्म की बोहोत सी वीडियो दिख जायेगी.


जुबेर एहमद खान 
पत्रकार 


No comments:

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...