इंसानी समाज की संरचना आदम के जमीन पे आने के बाद शुरू हुई.
आदम और हव्वा इस संसार के पलहे मर्द और ओरत हे और हम सब उसी इंसानी ज़ात की पैदावार हे.
शुरू में जब संसार की संरचना हुई और आदम और हव्वा का मिलन हुआ तो हर एक घंटे में एक बच्चा पैदा होता था.
एक बार लड़की और दूसरी बार लड़का. अब आदम की एक लड़की पे उसके दो बेटे हाबील और काबील फ़िदा हुए. हाबील उस लड़की को अपना बनाना चाहता था और काबिल भी यही चाहता था. फिर यहाँ से शैतान का अमल शुरू हुआ और संसार का पहला खून
(गुनाह) हुआ वो भी एक लड़की को पाने ले लिए.
एक भाई ने दुसरे भाई का खून कर डाला उस लड़की को हासिल करने की चाहत लिए. जब इंसान के ऊपर शैतान हावी होता हे तो उसको अच्छा बुरा कहा नज़र आता हे. फिर जिसने खून क्या था उसने मकतूल की लाश को एक कपडे में लपेट के ज़मीन में दफ़न कर दिया. यहाँ दूसरा गुनाह नाफ़िज़ हुआ सबूत मिटाने का गुनाह.
हम उस समाज का हिस्सा हे जिसमे हर मनुष्य को अपने हक़ का अपने परिवार के लिए फैसला लेने का पूरा अधिकार हे.
लेकिन कई बार इंसान गलत फैसले करेके अपने परिवार की खुशहाली को तबाह कर देता हे.
कई बार इंसान गलती पहले कर देता हे बाद में पछताता रहता हे. इसी लिए कोई भी काम करने के पहले सोचो की उस काम का असर उसके परिवार की खूशीयो पे आपसे जुड़े हुए दुसरे लोगोके ऊपर क्या होगा.
गुस्सा इंसान का दुशमन हे और शैतान का साथी. गुस्से में किया हुआ हर फैसला आगे के जीवन में तकलीफ देता हे.
अगर कोई समस्या आन पड़े तो उसका समाधान शांत मन से करना चाहिए और अगर हो सके तो अपने बोहोत ख़ास दोस्त, घर के बड़े लोगो से सलाह कर के फैसला करना चाहिए. शैतान इंसान का खुला दुशमन हे और गुस्सा भी शैतान की ही देन हे.
जो लोग अपने परिवार से प्यार करते हे और अपने परिवार के लिए जीते मरते हे लेकिन गुस्से की वजह से कभी कभी ऐसा काम कर जाते हे की उसका मलाल उनको जीवन भर रहता हे. ऐसे लोगो से में निवेदन करूंगा की अगर वो अपने परिवार से प्यार करते हे और उनकी खुशी चाहते हे तो गुस्से पे काबू रखे. अपने परिवार से उनकी खुशिया हरगिज़ न छीने। कोई भी काम करने से पहले सोचे फिर काम करे.
वो इंसान बेवकूफ होता हे जो करता पहले हे और सोचता बाद में हे या पछताता रहता हे.
जुबेर एहमद खान
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